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July 16, 2024
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नरसिंहपुर, कृषि विभाग द्वारा फसलों के लिए किसानों को समसामायिक सलाह

कृषि विभाग द्वारा फसलों के लिए किसानों को समसामायिक सलाह

नरसिंहपुर।जिले में मानसून आ चुका है, अभी तक जिले में एक जून से 52.2 मिमी वर्षा दर्ज की जा चुकी है। उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग ने किसानों को खरीफ दलहनी एवं तिलहनी फसलों के लिए समसामायिक सलाह दी है।

लगातार वर्षा होने पर सामान्य फीड ड्रिल से नाली में बोनी करने पर बोनी के तुरंत बाद ज्यादा वर्षा होने पर बीज सड़ने की संभावना रहती है। अंकुरण के बाद कुछ दिन लगातार वर्षा होने पर नाली में बोनी करने पर बरसात का पानी नाली में भरने लगता है और पौधों की जड़े भी नाली में होने से पौधों की वृद्धि में प्रभावित होती है। अत: किसानों को सलाह दी गई है कि खरीफ दलहनी एवं तिलहनी फसलों की बोनी रिज- फरो पद्धति (मेड़, नाली) पद्धति से करें। इस पद्धति से फसल बोनी करने पर बीज या पौधा मेड़ में रहता है एवं अगल- बगल नाली रहती है। सामान्य फीड ड्रिल को भी रिज- फरो फीड ड्रिल बनाया जा सकता है, पीछे की टाइन्स में 2 से 3 इंच मोटा लकड़ी गुटका लगाकर एवं V की शेष की निर्धारित साइज लगभग 14 इंच व्यास की पंजी लगा सकते हैं। बोनी आगे की टाइन्स से 18 इंच कतार से कतार की दूरी पर करते हैं। यदि खेत में ढलान है, तो फसलों की बोनी ढलान के विपरीत दिशा में करें, ताकि ऊपर की उपजाऊ भूमि का वर्षा जल से छरण न हो।

तुअर की बोनी करने हेतु किसान गन्ना रेजर से 3 फिट या 4 फुट पर मेड़ बनाकर पौधों से पौधों की 1 से 1.5 फिट की दूरी रखें। उर्वरक एवं तुअर का बीज डिवलिंग कर सकते हैं। इस विधि में 1 से 2 किलो बीज से 1 एकड़ की बोनी की जा सकती है। खरीफ में जोखिम कम करने एवं उत्पादकता में वृद्धि और अधिक आय प्राप्त करने के लिए अंतरवर्ती खेती उपनाना चाहिये। तुअर की कतार से कतार 3 या 4 फिट पर तुअर की कतार से कतार की दूरी रखने पर बीच में 2 लाइन ज्वार की बोनी कर सकते हैं (तुअर+ज्वार 1:2 अनुपात में) इसी प्रकार सोयाबीन एवं उडद के साथ ही 4:2 अनुपात में ज्वार की बोनी भी कर सकते है। ज्वा्र के साथ अंतरवर्ती खेती में अंकुरण के पूर्व पेन्डीमेथालीन नींदानाशक दवा का 2 ली. प्रति हेक्टेयर की दर से छिडकाव कर सकते है।

मक्का या धान की बोनी करने के लिए 50 प्रतिशत नाइट्रोजन की मात्रा बोनी करते समय प्रयोग करें तथा शेष 25 प्रतिशत मात्रा बोनी के 20 दिन बाद और शेष 25 प्रतिशत मात्रा 40 दिन बाद पौधों के बगल में दें। बोनी के लिए सोयाबीन 30 किग्रा प्रति एकड़, उड़द 8 किग्रा प्रति एकड़, तुअर 6 किग्रा प्रति एकड़ मक्का 8 से 10 किग्रा प्रति एकड़ बीज का प्रयोग करें।

खरीफ फसलों की बोनी हेतु 1 बोरी डीएपी के स्थान पर 1 बोरी 12:32:16 एनपीके का काम्‍प्‍लेक्‍स उर्वरक का प्रयोग ज्यादा लाभदायक है। क्योंकि इसमें पोटाश तत्व भी रहता है, जिसके कारण पौधों में रोग एवं कीड़े भी कम आते हैं। साथ ही दाने में चमक भी रहती है। यदि केवल डीएपी या सिंगल सुपर फास्फेट उर्वरक का प्रयोग कर रहे हैं, तो प्रति एकड़ 15 से 20 किलो म्यूरेट आफ पोटाश का प्रयोग करें। तुअर की बोनी सीडड्रिल से करने पर पौधों से पौधों की दूरी बहुत कम हो जाती है। अत: तुअर की अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए पौधों से पौधों की दूरी 1.5 फिट रखते हुए बीच के पौधों को उखाड़कर बिरलन करें।

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