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July 29, 2021
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मध्यप्रदेश के मुख्य समाचार

अस्पतालों में 20 पीएसए ऑक्सीजन प्लांट शुरू
30 सितम्बर तक 111 ऑक्सीजन प्लांट लगेंगे
नरसिंहपुर, 14 जून 2021. मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर मध्यप्रदेश को ऑक्सीजन उत्पादन में आत्म-निर्भर बनाने के विशेष प्रयास किये जा रहे हैं। इस क्रम में कोविड-19 के उपचार में प्रदेश के अस्पतालों में ऑक्सीजन आपूर्ति की समस्या के निराकरण के कारगर उपाय के तौर पर लगाये जा रहे पीएसए ऑक्सीजन प्लांट शुरू हो चुके हैं। राज्य सरकार द्वारा मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, सिविल अस्पताल और कम्युनिटी हॉस्टिपटल में 111 हवा से ऑक्सीजन बनाने की अनूठी टेक्नोलॉजी पर आधारित पीएसए (प्रेशर स्विंग, एडजॉर्व्सन) ऑक्सीजन प्लांट लगाने के आर्डर दिये गये थे। शासन द्वारा जारी आदेश के अनुक्रम में अब तक 20 प्लांट लगाये जा चुके हैं।
   स्वास्थ्य आयुक्त श्री आकाश त्रिपाठी ने बताया कि पीएसए ऑक्सीजन प्लांट को समय पर लगाने के लिये संबंधित निर्माता कम्पनियों को निर्देशित किया गया है। उन्होंने बताया कि 15 जून तक 25, 30 जून तक 40, 30 जुलाई तक 81, 30 अगस्त तक 91 और 30 सितम्बर तक पूरे 111 पीएसए ऑक्सीजन प्लांट की स्थापना अस्पतालों में कर दी जायेगी। इनसे अस्पताल के लिये ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित होगी। उन्होंने बताया कि अस्पतालों में उपलब्ध ऑक्सीजन बेड और आईसीयू आदि को ध्यान में रखते हुए जरूरत की ऑक्सीजन आपूर्ति सुनिश्चित हो सके, इसी अनुक्रम में क्षमता के पीएसए प्लांट लगाये जा रहे हैं। इसमें 100 लीटर प्रति मिनिट से लेकर 1500 लीटर प्रति मिनिट की क्षमता वाले पीएसए प्लांट शामिल हैं। पीएसए प्लांट्स की स्थापना 10 बिस्तर के आईसीयू अस्पतालों से लेकर 150 बिस्तर (आईसीयू) वाले अस्पतालों में ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिये की जा रही है। उन्होंने बताया कि पीएसए ऑक्सीजन प्लांट्स की स्थापना केन्द्र सरकार और राज्य सरकार के मद से प्राप्त राशि से की गई है।

कॉलेज के विद्यार्थी करेंगे कोरोना से बचाव और टीकाकरण के लिए लोगों को जागरूक
प्रदेश में “युवा शक्ति कोरोना मुक्ति” अभियान चलाया जाएगा
नरसिंहपुर, 14 जून 2021. मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सहयोग से कोविड महामारी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए ‘युवा शक्ति कोरोना मुक्ति’ अभियान चलाया जाएगा। इसके अंतर्गत उच्च और तकनीकी शिक्षा के शासकीय महाविद्यालयों के शिक्षकों एवं लगभग 16 लाख विद्यार्थियों को ‘कोविड अनुकूल व्यवहार एवं वैक्सीनेशन’ के संबंध में प्रशिक्षण देकर उनके माध्यम से लोगों को कोरोना के प्रति जागरूक किया जाएगा।
   अभियान के अंतर्गत कॉलेजों में विद्यार्थियों को छोटे-छोटे समूहों में कोविड अनुकूल व्यवहार और टीकाकरण के महत्व के बारे में जानकारी दी जायेगी। ये विद्यार्थी, अपने परिवार तथा आस-पास के समाज के नागरिकों को कोरोना से बचाव और वेक्सिनशन से होने वाले लाभों की जानकारी देंगे।
   अभियान की प्रभावी रियल टाइम ऑनलाइन मॉनीटरिंग के लिए एक मोबाइल एप भी विकसित किया गया है, जिसके माध्यम से ‘युवा शक्ति कोरोना मुक्ति’ अभियान की प्रतिदिन की गतिविधियों और प्रगति की समीक्षा की जायेगी।
   अभियान की पूर्व तैयारियों के संबंध में आज प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा श्री अनुपम राजन, सचिव तकनीकी शिक्षा श्री मुकेश गुप्ता, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन एवं यूनिसेफ के राज्य स्तरीय अधिकारियों द्वारा सभी जिलों के लीड कॉलेजों, इंजीनिरिंग एवं पॉलीटेक्निक कॉलेज के प्राचार्य, जिला टीकाकरण अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने नारियल का पौधा लगाया
नरसिंहपुर, 14 जून 2021. मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री निवास परिसर में नारियल का पौधा लगाया। मुख्यमंत्री श्री चौहान अपने संकल्प के अनुसार प्रतिदिन एक पौधा लगाते हैं।

जन-भागीदारी से होगी अब प्रदेश में हरियाली
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने नर्मदा जयंती से अब तक लगाए 131 पौधे
नरसिंहपुर, 14 जून 2021. मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में राज्य सरकार ने जन-सहभागिता से बड़े संकल्पों को पूरा करने में सफलता पाई है। हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण के संरक्षण एवं संवर्धन के लिये मुख्यमंत्री श्री चौहान ने हमेशा ही प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत कर जन-समुदाय को वृक्षारोपण के वृहद अभियान से जोड़ने का सफल प्रयास किया है। प्रदेश में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर का नियंत्रण जन-भागीदारी मॉडल की वजह से ही संभव हुआ है। ग्राम, वार्ड, नगर और जिला स्तर पर बनी क्राइसिस मैनेजमेंट कमेटियाँ, जन-प्रतिनिधि, स्वयंसेवी संगठनों, स्व-सहायता समूहों और कोरोना वालेंटियर्स की सक्रियता और पहल ने कोविड अनुकूल व्यवहार अपनाने के लिए लोगों को प्रेरित करने और स्व-नियंत्रण की अद्भुत मिसाल प्रस्तुत की। परिणामस्वरूप अब प्रदेश बेहतर स्थिति में हैं। कोरोना की आपदा में जनता की पहल और ऊर्जा को निश्चित दिशा मिली।
प्रदेश के स्थाई हित में होगा जन-भागीदारी की ऊर्जा का उपयोग
   मुख्यमंत्री श्री चौहान ने जन-भागीदारी की इस ऊर्जा का प्रदेश के दीर्घकालीन और स्थाई हित में उपयोग करने के उद्देश्य से वृक्षारोपण अभियान में भी जन-जन को जोड़ने की दिशा में कार्य आरंभ किया। एक सच्चे जन-नेता के रूप में इसकी पहल स्वयं से की। नर्मदा जयंती 19 फरवरी को मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रतिदिन एक पौधा लगाने का संकल्प लिया और निरंतर उसे पूरा किया। यह प्रदेश की जनता के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत करने का प्रयास था। मुख्यमंत्री श्री चौहान इस क्रम में अब तक 131 पौधे लगा चुके हैं।
पेड़ लगाना आनंद की अनुभूति है
   मुख्यमंत्री श्री चौहान ने पचमढ़ी में उनके द्वारा 2016 में लगाए गए आम के पेड़ में आये फल को देखकर ट्वीट किया है कि ‘आप भी जब पौधा लगाएँगे, उसकी देखभाल करेंगे और जब वह पेड़ बड़ा होकर आपको फल देगा तो मैं विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि उससे ज्यादा आनंद की अनुभूति आप को नहीं होगी।’ मुख्यमंत्री श्री चौहान का यह आत्मानुभूति का भाव उनकी, सबको साथ लेकर चलने की भावना को दर्शाता है। प्रदेश के विकास की बात हो, जनता के कल्याण की बात हो या चुनौतियों का सामना करने का समय हो, मुख्यमंत्री श्री चौहान प्रदेश की जनता को साथ लेकर चले हैं।
प्रकृति की शक्तियों के साथ सामन्जस्य जरूरी
   मुख्यमंत्री श्री चौहान प्रदेशवासियों को वृक्षारोपण अभियान से भावनात्मक रूप से जोड़ने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। वे प्राय: जलवायु परिवर्तन के प्रभावों, ग्लोबल वार्मिंग के खतरों से लोगों को आगाह करते हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान प्राय: जनता से संवाद में कहते हैं कि तन-मन और धन से भी ऊपर वन, प्रकृति और पर्यावरण को रखना हमारी संस्कृति हमारा संस्कार है और इसका पालन आवश्यक है। कोरोना ने ही हमें इस दिशा में सीख दी है कि मानव अस्तित्व के लिए प्रकृति की शक्तियों के साथ सामन्जस्य रखना जरूरी है। इसके लिए धरती की हरियाली बढ़ाना सबसे सरल उपाय है। यह ऐसा कार्य है जो प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर कर सकता है। वृक्ष लगाने और इसकी देखभाल करने से धरती पर न केवल ऑक्सीजन बढ़ेगी अपितु सम्पूर्ण जीवन ऊर्जा की वृद्धि होगी।
वृक्ष जीवित ऑक्सीजन प्लांट हैं
   मुख्यमंत्री श्री चौहान का मानना है कि भारतीय संस्कृति में पौधों के रोपण को शुभ कार्य माना गया है। वृक्ष पूजनीय है, क्योंकि उन पर देवताओं का वास माना गया है। कई भारतीय संस्कारों, व्रतों और त्योहारों के माध्यम से वृक्षों की पूजा-अर्चना की परम्परा है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने 10 जून को वटसावित्री अमावस्या के अवसर पर पचमढ़ी में बरगद का पौधा लगाकर लोकोपयोगी संदेश दिया कि प्राणवायु का यह बड़ा स्रोत वास्तव में प्राण-रक्षक है। मुख्यमंत्री श्री चौहान वृक्षों को जीवित ऑक्सीजन प्लांट की उपमा देते हैं।
जन-जन का हो वृक्षारोपण अभियान से जुड़ाव
   मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रदेश में जन-जन को वृक्षारोपण अभियान से जोड़ने, उन्हें पौधा लगाने के लिए प्रेरित करने और सम्मानित करने के लिए विश्व पर्यावरण दिवस से सम्पूर्ण प्रदेश में अंकुर अभियान आरंभ किया। अभियान में पौधा लगाने और उसकी देखभाल की जिम्मेदारी लेने के लिए लोगों को प्रेरित किया जाएगा। पौधा लगाने वाले प्रतिभागियों को वृक्ष वीर और वृक्ष वीरांगना कहा जायेगा। इस अभियान में प्रतिभागियों को प्राणवायु अवार्ड से सम्मानित भी किया जायेगा।
घर बनाने वाले हर व्यक्ति के लिए पौधा लगाना जरूरी
   मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रदेश में वृक्षारोपण को प्रोत्साहित करने और जन-जन की इसमें भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए बिल्डिंग परमीशन को भी वृक्ष लगाने से जोड़ दिया है। अब प्रदेश में घर बनाने वाले हर व्यक्ति के लिए पौधा लगाना जरूरी हो गया है।  मुख्यमंत्री श्री चौहान प्रदेशवासियों से अपने जन्म दिवस, विवाह वर्षगाँठ के मौके पर और अपने प्रियजनों की याद में पौधा लगाने की अपील करते हैं।
पौधा लगाना जीवन रोपने के समान
   मुख्यमंत्री श्री चौहान का मानना है कि पौधा लगाना जीवन रोपने के समान है। पेड़ हमें जीवन देते हैं। एक बड़ा पेड़ कई पक्षियों और जीव-जंतुओं को आश्रय प्रदान करता है। प्रत्येक पेड़ की पर्यावरण संतुलन बनाये रखने में भूमिका है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रतिदिन पेड़ लगाने के अपने संकल्प के परिपालन में अब तक 131 पौधे लगाये हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने नर्मदा जयंती पर 19 फरवरी को अमरकंटक में गुलबकावली और साल का पौधा लगाकर प्रतिदिन पौधा लगाने का संकल्प लिया था। इस क्रम में मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा भोपाल के अतिरिक्त होशंगाबाद, नसरूल्लागंज, जवलपुर और पन्ना के अतिरिक्त पश्चिम बंगाल के जगत वल्लभपुर, गुजरात के भरूच में भी पौध-रोपण किया गया।
स्थानीय जलवायु के अनुरूप हो वृक्षारोपण
   मुख्यमंत्री श्री चौहान का मानना है कि स्थानीय जलवायु के अनुरूप ही वृक्षारोपण किया जाए। मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा वृक्षारोपण के संकल्प के अंतर्गत आम, पारिजात, सप्तपर्णी, नीम शीशम, करंज, बरगद, पीपल, कदम, बाँस, हरसिंगार, गूलर, बेलपत्र, खिरनी, चंदन, गुलमोहर, अशोक, मौलश्री, मुनगा, अमरूद, आँवला, शमी, संतरा, सीताफल, संतरा, कचनार, रीठा, आदि का पौध-रोपण किया गया। मुख्यमंत्री श्री चौहान की पहल पर जन-भागीदारी से प्रदेश की धरती को हरा-भरा करने का अभियान नई मिसाल स्थापित करेगा।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने महाराणा प्रताप और महाराजा छत्रसाल की जयंती पर किया नमन
नरसिंहपुर, 14 जून 2021. मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने निवास पर महाराणा प्रताप और महाराजा छत्रसाल की जयंती पर उनके चित्र पर माल्यार्पण कर नमन किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने महाराणा प्रताप को नमन करते हुए कहा कि मातृभूमि के गौरव और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपना जीवन होम कर देने वाले शौर्य और पराक्रम के प्रतीक वीर महाराणा प्रताप की गौरव गाथा सदैव हम सबको मातृभूमि की सेवा के लिए प्रेरित करती रहेगी।
   मुख्यमंत्री श्री चौहान ने मध्यकालीन भारत में विदेशी आतताइयों से बुंदेलखंड की स्वतंत्रता के लिए लगातार संघर्ष करने वाले बुंदेलखंड केसरी महाराजा छत्रसाल के संघर्षपूर्ण जीवन का स्मरण किया।

मुख्यमंत्री श्री चौहान से विधानसभा अध्यक्ष श्री गिरीश गौतम की सौजन्य भेंट
नरसिंहपुर, 14 जून 2021. मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान से विधानसभा अध्यक्ष श्री गिरीश गौतम ने मुख्यमंत्री निवास पर सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने श्री गौतम का पुष्प भेंट कर स्वागत किया।

आईआरएडी एप परियोजना के क्रियान्वयन में प्रदेश अग्रणी : एडीजी श्री सागर
नरसिंहपुर, 14 जून 2021. अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक पुलिस प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान  श्री डी.सी. सागर ने बताया कि  मध्यप्रदेश  आईआरएडी परियोजना के क्रियान्वयन में  सबसे आगे है।  प्रदेश में अब तक  14 हजार सड़क दुर्घटनाओं का डाटा उक्त एप में दर्ज किये जा चुके हैं। इससे प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी। सागर में सर्वाधिक एक हजार दुर्घटनाओं की प्रविष्टियाँ की गई हैं।
   एडीजी श्री सागर ने बताया कि आईआरएडी परियोजना देश की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है, जो कि वर्तमान में छ: राज्य तमिलनाडू, कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश में पायलट रूप में क्रियान्वित की जा रही है। इस परियोजना का क्रियान्वयन राजमार्ग मंत्रालय भारत सरकार द्वारा किया जा रहा है। देश में सडक दुर्घटनाओं की दर को कम करने के साथ ही दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु एवं घायलों की दर में कमी लाना इसका मुख्य उद्देश्य है। वर्तमान में इस परियोजना में चार विभाग पुलिस, परिवहन, सडक स्वामित्व वाले विभाग और स्वास्थ्य विभाग को जोड़ा गया है।
   श्री सागर ने अपेक्षा कि है कि सभी विभाग इस मुहिम में अपनी भागीदारी निभाते हुए प्रदेश के अव्वल की स्थिति को बरकार रखने में समुचित सहयोग करेंगे। प्रदेश में सडक दुर्घटनाओं में कमी लाते हुए सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु दर में कमी लाते हुए गंभीर रूप से घायल होने वाले व्यक्तियों को गोल्डन हावर्स में अस्पताल पहुँचाये जाने की इस पहल में मानवीयता के नाते सहयोग भी दर्ज करायें। सभी के सहयोग से परियोजना की परिकल्पना ‘सभी के लिये सुरक्षित सडक” के सपनों को साकार कर सकेंगे।

आओ सीखें कार्यक्रम छोटे बच्चों में विकसित करेगा शैक्षणिक समझ
‘हमारा घर-हमारा विद्यालय-प्रयास’ अभ्यास पुस्तिका 15 जुलाई से पहले होगी वितरित
नरसिंहपुर, 14 जून 2021. छोटे बच्चों में भावनात्मक विकास और शैक्षणिक समझ विकसित करने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा ‘आओ सीखें’ कार्यक्रम में 15 जून से 15 जुलाई 2021 तक व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से विभिन्न छोटे ऑडियो और वीडियो भेजे जाएँगे।
   संचालक, राज्य शिक्षा केन्द्र श्री धनराजू एस ने बताया कि इसके साथ ही ‘हमारा घर-हमारा विद्यालय’ के अंतर्गत बच्चों में विषय की प्रारंभिक समझ को विकसित करने की दृष्टि से ‘प्रयास’ अभ्यास पुस्तिका का वितरण भी 15 जुलाई से पहले किया जाएगा। अभ्यास पुस्तिका के मुद्रण और 15 जुलाई के पहले सामग्री बच्चों को उपलब्ध कराने के संबंध में सभी जिला परियोजना समन्वयकों को निर्देश दिए गए हैं।
   श्री धनराजू ने बताया कि 16 जुलाई से 15 अगस्त तक विद्यार्थियों के लिए ‘हमारा घर-हमारा विद्यालय-प्रयास’ अभ्यास पुस्तिका सामग्री जिलों को मेल पर प्रेषित की जा रही है। इस 48 पेज की सामग्री को जिले स्तर पर कक्षा 1 व 2 और कक्षा 3 से 5 के लिए बहुरंगी तथा कक्षा 6 से 8 के लिए ब्लैक एंड व्हाइट प्रिंट में मुद्रित कराकर बच्चों को उनके घर पर कार्य करने के लिए 15 जुलाई के पूर्व उपलब्ध करानी होगी।
   श्री धनराजू ने बताया कि वर्तमान में कोविड-19 के कारण विगत सत्र माह मार्च 2020 से शालाएँ पूर्णतः बन्द हैं। सत्र 2021-22 में जब तक परिस्थितियों सामान्य नहीं हो जाती हैं, बच्चों के शैक्षणिक उन्नयन के लिए राज्य शिक्षा केन्द्र ने विभिन्न चरणों में कार्य करने की योजना तैयार की है। इसके अलावा शिक्षकों अथवा वॉलेंटियर के सहयोग से बच्चों से घर पर रहते हुए कुछ अन्य गतिविधियाँ भी कराई जा सकती हैं। पालक, अभिभावक और बच्चे इन गतिविधियों के फोटो और वीडियो बनाकर अपने शिक्षकों को प्रेषित कर सकते हैं।

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