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September 22, 2021
ADITI NEWS
शिक्षा

भोपाल,शिक्षक अपने आचरण से विद्यार्थियों को सेवा संस्कार दें, राज्यपाल

शिक्षा का उद्देश्य आत्म-निर्भर बनाना हो , श्री मंगुभाई पटेल,अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय का 54वां स्थापना दिवस समारोह सम्पन्न

राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा है कि प्राध्यापकों को अपने आचरण एवं संस्कारों के आदर्श को सामने रखते हुए विद्यार्थियों को शिक्षा देनी चाहिए। पाठ्यक्रम में लौकिक एवं पारलौकिक दोनों प्रकार के विषयों को स्थान दें। उन्होंने कहा है कि छात्र हमारे देश की संपत्ति हैं। देश को विकास के पथ पर ले जाने वाले राष्ट्र निर्माता हैं। इसलिए इनके साथ हमारा व्यवहार ऐसा होना चाहिए जिससे उनके मन में किसी भी तरह का असंतोष नहीं रहें। उनमें सेवा भाव उत्पन्न करना शिक्षकों का दायित्व है। विद्यार्थियों में यह भाव तभी जागृत होगा, जब हम सब निष्ठा से अपनी जिम्मेदारियों का पालन करेंगे। श्री पटेल अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के 54वें स्थापना दिवस समारोह को राजभवन भोपाल से आज ऑनलाइन संबोधित कर रहे थे।

राज्यपाल श्री पटेल ने सभी शिक्षकों से कहा है कि प्रतिभाशाली छात्रों को उनकी पूरी क्षमता का एहसास कराते हुए, उनके कौशल ज्ञान को समृद्ध करने के साथ उन्हें समाज में योगदान देने के लिए प्रेरित करेंI उन्होंने छात्र-छात्राओं से कहा है कि उन्हें विचार करना चाहिए कि हम अपने समाज, प्रदेश और देश के विकास के लिए क्या कर रहे है और क्या कर सकते हैं। उन्होंने कहा है कि हमारा देश बुद्ध, गाँधी और विवेकानंद का देश है, जिसकी नींव वसुधैव कुटुंबकम् पर आधारित है जहाँ प्रत्येक व्यक्ति के हृदय में करूणा, अहिंसा, सहानुभूति समाहित है। हमारा देश इन्हीं गुणों के कारण विश्व गुरू कहलाता है। उन्होंने कहा है कि शिक्षा का उद्देश्य छात्र-छात्रा को आत्म-निर्भर बनाकर पैरों पर खड़ा करना होना चाहिये। केवल नौकरी के लिए शिक्षा पर्याप्त नहीं हो सकतीI शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो विद्यार्थी का शारीरिक, मानसिक, आत्मिक विकास और चरित्र का निर्माण करे केवल पुस्तकों द्वारा शिक्षा दिया जाना पर्याप्त नहीं है। शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जिसमें अधिकारों के साथ कर्त्तव्यों के पालन की जिम्मेदारी का भाव हो।

राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि देश और समाज के उत्थान के कार्यों में छात्रों के सक्रिय योगदान देने पर ही राष्ट्र का भविष्य निर्भर करता है। हर युग और समय में युवा वर्ग के सामने समस्याओं से जूझने की चुनौती रहती है, आगे भी रहेगी। इसलिए शिक्षकों की यह जिम्मेदारी है कि वे युवा वर्ग में दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने और समस्याओं से जूझकर विपरीत धाराओं का रुख मोड़ने का विश्वास और संकल्प शक्ति उत्पन्न करे। उन्होंने कहा कि हम सभी सौभाग्यशाली है कि आज शिक्षा किसी धर्म, वर्ग सम्प्रदाय, अमीर और शक्तिशाली के लिए ही सीमित नहीं रही है। आज हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था केवल मेहनत, लगन और मज़बूत इच्छा शक्ति मांगती है। गरीब से गरीब परिवारों के ऐसे कितने ही प्रतिभावान छात्र-छात्राएँ हैं जो परिवार की ग़रीबी, जिम्मेदारियों और विपरीत परिस्थितियों के बावज़ूद अपनी मेहनत और लगन से नई ऊँचाईयों को छू रहे है। उन्होंने कहा कि जरुरत कर्त्तव्य पालन की हैं। सबसे बड़ा गुण समय और अनुशासन का पालन करना ही है। छात्र-छात्राओं का ध्येय, धैर्य और एकाग्र भाव से शिक्षा प्राप्त करना होना चाहिये।

राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि देश में पहली बार एक सशक्त और समावेशी शिक्षा नीति को लागू किया गया है। इसमें आज की तेजी से बदलती दुनिया के लिए जरुरी सभी बदलावों को शामिल किया गया हैं। अधिक से अधिक लोगों तक ज्ञान का प्रकाश पहुँचाने में विश्वविद्यालयों की भूमिका इसमें अहम् है। राज्यपाल ने इस अवसर पर शोध पत्रिका विंध्य भारती और न्यूज़ लेटर प्रतिबिम्ब का विमोचन किया। उन्होंने कहा कि विंध्यभारती छात्र-छात्राओं की मौलिक अनुसंधानात्मक प्रतिभा को प्रकाशित करने का प्रभावी साधन बनेगीI उनके उज्जवल भविष्य का पथ प्रशस्त करेगीI न्यूज़लेटर का प्रकाशन संस्था की उपलब्धियों, एकेडमिक रचनात्मक गतिविधियों के साथ ही पारदर्शिता के प्रसार में सहयोगी होगा।

स्थापना दिवस समारोह मे कुलपति भटिंडा विश्वविद्यालय पंजाब के आर.पी. तिवारी ने कहा कि नई शिक्षा नीति छात्रहित और राष्ट्रहित केन्द्रित है। नीति की मंशा ऐसी प्रजातांत्रिक शिक्षा प्रणाली बनाना है, जो युवाओं को शिक्षित, प्रशिक्षित कर, उनकी सामाजिक उपादेयता को प्रभावी बनाए। उन्होंने कहा कि नीति के सभी आयामों को सफलता पूर्वक लागू करने में विश्वविद्यालयों की भूमिका महत्वपूर्ण है। नीति को सफलता पूर्वक लागू करने से विश्वपटल पर देश विश्व गुरू के रूप में स्थापित होगा। कुलपति डॉ. रामकुमार आचार्य ने स्वागत उद्बोधन दिया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के अधिकारी-कर्मचारी, विश्वविद्यालय से जुड़े सभी महाविद्यालयों के प्राचार्य एवं प्राध्यापक शामिल थे।

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