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July 16, 2024
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खेत- तालाब योजना का मिला लाभ, मछली पालन से कमा रहे लाखों रुपये,जल स्तर हुआ पहले से बेहतर

खेत- तालाब योजना का मिला लाभ, मछली पालन से कमा रहे लाखों रुपये,जल स्तर हुआ पहले से बेहतर

नरसिंहपुर 20 सितम्बर 2023. कलेक्टर सुश्री ऋजु बाफना ने बुधवार को चीचली जनपद की ग्राम पंचायत पलेरा, बारछी, रहमा में यहां के लोगों द्वारा किये जा रहे मछली पालन के कार्य को देखा। ग्राम पंचायत पलेरा के ग्राम बेलखेड़ी के कृषक श्री भैरव प्रसाद विश्वकर्मा बताते हैं कि उनके पास 3 एकड़ खेती की भूमि है, जिसमें से लगभग आधा एकड़ में मछली पालन का कार्य कर रहे हैं। खेत- तालाब योजना से उन्होंने अपनी निजी भूमि में तालाब निर्मित करवाया है। मछली के बीज डालकर मछली पालन कार्य से उन्हें प्रतिवर्ष दो लाख रुपये का मुनाफा हो रहा है। उन्हें मछली विक्रय करने के लिए कहीं जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। गांव के ही नजदीक के मछली विक्रेता यहां आकर उनसे मछली क्रय करते हैं।

 

वे बताते हैं कि एक एकड़ में गन्ने की फसल लगाने पर लगभग 70 हजार रुपये प्राप्त होते हैं। पारम्परिक खेती की बजाय उन्होंने मछली पालन करने का निर्णय लिया। इसका फायदा यह हुआ कि इसमें किसी भी प्रकार का जोखिम नहीं है। साथ ही कम क्षेत्र में मछली पालन से उनकी आमदनी भी बढ़ी है। इस पानी का उपयोग अपनी फसलों के लिए सिंचाई के रूप में लेते हैं। वे बताते हैं कि पहले यहां का भू- जल स्तर कम था, जो खेत- तालाब निर्मित करने के बाद काफी बेहतर हो चुका है। उनसे प्रेरित होकर गांव के अन्य लोग भी खेत- तालाब योजना का लाभ ले रहे हैं।

 

यहां निर्मित अमृत सरोवर तालाब का निरीक्षण भी कलेक्टर सुश्री बाफना एवं जिला पंचायत सीईओ श्री दलीप कुमार ने किया। इस तालाब में जल ज्योति स्वसहायता समूह की महिलाओं द्वारा मछली पालन का कार्य किया जा रहा है। इसमें होने लगभग दो हजार मछली के बीज डलवाये हैं। इसके साथ ही वे सिंघाड़ा उत्पादन का भी कार्य करेंगी। कलेक्टर सुश्री बाफना ने यहां मौजूद लोगों को बायोफ्लॉक के माध्यम से मछली पालन की भी जानकारी दी।

 

ग्राम बारछी के श्री दयाशंकर धुर्वे एवं ग्राम रहमा के श्री राजकुमार रजक ने भी अपनी निजी भूमि में खेत तालाब निर्मित करवाया है, जिसमें उन्होंने पहली बार मछली के एक हजार बीज डलवाये हैं। इसकी लागत उन्हें लगभग ढाई हजार रुपये आई है। उन्होंने मछली पालन का प्रशिक्षण बगासपुर में लिया है। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें मछली को देने वाले चारे, आवश्यक सावधानियां बरतने की जानकारी प्रदान की गई है। भूमि का कटाव न हो, इसके लिए उन्होंने तालाब की बंड के चारों ओर अरहर की फसल बोई है। वे निश्चिंत हैं कि उन्हें इसका भरपूर लाभ मिलेगा।

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