श्री हनुमंत स्तवन (पंचचामर छंद/नाराच छंद) : श्री हनुमान प्राकट्योत्सव की मंगल कामनाएं,,
Aditi News Team
Thu, Apr 2, 2026
श्री हनुमंत स्तवन
(पंचचामर छंद/नाराच छंद)
अतुल्य शक्ति पुंज रूप राज देव रंजनं।
प्रचंड वेग वायु पुत्र शत्रु सैन्य भंजनं।।
सुवर्ण शैल दीप्ति काय भाल चंद्र सोहने।
नमो नमो महाबली कृपालु भक्त मोहने॥ 1 ॥
मनोजवं च मारुतं समान वेग धारणं।
जितेन्द्रियं सुबुद्धि धीर शोक दोष वारणं।।
विशाल देह वज्र सार अंग अंग सोहते।
ललाम भाल नागरेणु भक्त चित्त मोहते॥ 2 ॥
उदग्र रूप धारि वारि लंक दग्ध कीन्हि रे।
पसारि काय राहु सो ग्रसन भानु लीन्हि रे।।
अगाध सिंधु लाँघि के समुद्र पार धावते।
विभीषणै मिलाय राम नाम गान गावते॥ 3 ॥
उखारि शैल हाथ में सजीवनि ले आयऊ।
लखन सुप्रान राखि के सुमोद चित्त छायऊ।।
गदा घुमाय शत्रु के कपाल फोड़ि डारहीं।
महारथी निसाचरैं पछाड़ि मारि डारहीं॥ 4 ॥
कपीश रीछ संग लै सुसेतु लंक बाँधियो।
धनुर्धराधि राम को सुकाज वीर साधियो।।
पुकारि कूँदि के समर अराति झुंड गारहीं।
हनूमतैं किलक हुमक सुहूँक मारि डारहीं॥ 5॥
असाध्य काज कीन्हि के सुसिद्धि हाथ लायऊ।
अपार सिंधु पार जाई जानकी दिखायऊ।।
मातु मुद्रिका सुदीन्हि राम सिद्धि दीन्हि रे।
उजारि के असोक बाट काज राम कीन्हि रे॥ 6 ॥
नमो नमो हे अंजनी सुपुत्र वीर बांकुरे।
नमो नमो हे सुदेव रूप देव ठाकुरे।।
सदा सहाय दास के उदार चित्त धारिये।
कृपा कटाक्ष फेरि के सकल दुविघ्न वारिये॥ 7 ॥
सुछंद ईश को सुमिरि सुपाठ जो भी ठानही।
तहाँ न व्याधि संकटैं न काल आँखि तानही।।
हिये बिराजि राम भरत सुलक्ष्मणादि जानकी।
जय सुवंत वीरवंत जय जय हनुमान की ॥ 8 ॥
वंदना सतत चरण , हे अंजनीकुमारकं।
अभय विभा प्रदायकं विनय विनीत धारकं।।
कृपाकटाक्ष वर्षिणं, सुगति शरण वत्सलम्।
विपत विभुं विदारिणं भवाब्धि सेतु मंगलं॥ 9॥
आप सभी को हनुमत प्राकट्योत्सव पर हार्दिक अभिनंदन।
सुशील शर्मा
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अदिति न्यूज,(सतीश लमानिया)
सुशील शर्मा, वरिष्ठ साहित्यकार