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: शिक्षक दिवस पर विशेष,,(हे शिक्षक,) कविता एवं विद्यार्थियों को (संदेश)

Aditi News Team

Fri, Sep 5, 2025
*हे शिक्षक* ( शिक्षक की पीड़ा को उकेरती कविता - सुशील शर्मा)   वह खड़ा है ब्लैकबोर्ड और समाज दोनों के बीच, एक अदृश्य पुल की तरह जिस पर हर कोई गुजरता है पर कोई नहीं देखता उसकी दरारें।   सरकार उसे जिन्न समझती है कभी जनगणना का भार, कभी चुनाव ड्यूटी का पहाड़, कभी योजनाओं का हिसाब, कभी फाइलों का अनंत जंगल। पाठशाला उसकी पहली पहचान है, पर गैर-शिक्षकीय आदेशों में उसकी पहचान घुल जाती है।   शिक्षक दिवस आता है एक दिन, जब फूलों की वर्षा होती है, सम्मान पत्र दिए जाते हैं, तालियाँ बजती हैं, लेकिन बाकी तीन सौ चौंसठ दिन वह सिर्फ सरकारी कर्मचारी कहलाता है। समाज और तंत्र उसे संदेह की दृष्टि से देखते हैं जैसे उसके श्रम पर भरोसा करना भूल चुके हों।   वह जानता है उसकी पहली बीस साल की सेवा कागजों पर मिटा दी गई है, उसकी पेंशन आधी अधूरी है, वह अपने भविष्य को लेकर सुरक्षित नहीं है, फिर भी आज की पीढ़ी के भविष्य को गढ़ने में व्यस्त है।   और सच है कुछ शिक्षक हैं भी ऐसे, जो समय पर विद्यालय नहीं पहुँचते, जो बच्चों की आँखों में भविष्य नहीं, धुँधलका भरते हैं, जो किताबों से ज्यादा शराब की बोतलों को महत्व देते हैं। वे गिने-चुने हैं, पर उन्हीं की परछाई पूरे शिक्षक समाज को कलंकित कर देती है। उनकी वजह से ईमानदार शिक्षकों की निष्ठा पर भी उंगलियाँ उठती हैं।   आज भी बहुसंख्य शिक्षक आज भी टूटी कुर्सियों और धूलभरे कमरों में पसीना बहा रहे हैं, अपने घर की आर्थिक कठिनाइयों को भूलकर बच्चों की आँखों में सपनों की रोशनी भर रहे हैं।   वह खड़ा है धूप में, बारिश में, टूटी कुर्सियों और धूलभरे कमरों में, सिर्फ इसलिए कि बच्चे सपनों को पहचानना सीखें।   कितनी अजीब विडम्बना है जिस समाज को वह साक्षर बनाता है वही समाज उसे तिरछी निगाहों से देखता है। जिस देश को वह भविष्य देता है उसी का तंत्र उसकी वृद्धावस्था का सहारा छीन लेता है।   फिर भी वह टूटता नहीं, वह शिकायतों का पुलिंदा नहीं बनता, वह सिर्फ चॉक उठाता है, और बच्चों की आँखों में भविष्य की रेखाएँ खींच देता है।   उसके हाथों में अक्षर हैं, अंक हैं, विचार हैं। उसके हृदय में निष्ठा है, धैर्य है, विश्वास है। वह जानता है उसका जीवन शायद सरकारी कागजों में अधूरा रह जाएगा, पर उसकी मेहनत हर उस बच्चे के जीवन में पूर्णता पाएगी जो उसे "सरजी" कहकर पुकारता है।   यही उसका उत्सव है, यही उसका पुरस्कार है।   सुशील शर्मा *संदेश*   मेरे प्यारे विद्यार्थियों, ढेर सारा स्नेह   शिक्षक दिवस के इस पावन अवसर पर, आप सभी को मेरी ओर से हार्दिक शुभकामनाएँ! यह दिन केवल शिक्षकों को सम्मानित करने का नहीं, बल्कि शिक्षा के महत्व और गुरु-शिष्य परंपरा को समझने का भी है। आज मैं आपसे एक शिक्षक के रूप में नहीं, बल्कि आपके एक मार्गदर्शक के रूप में बात करना चाहता हूँ।   आज की दुनिया में शिक्षा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं है। आप सभी के सामने कई नई चुनौतियाँ हैं। इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारियों का अंबार, परीक्षा का दबाव, और भविष्य को लेकर अनिश्चितता, ये सब आपके मन में कई सवाल पैदा करते हैं। लेकिन इन चुनौतियों से घबराना नहीं है, बल्कि इनसे निपटने की कला सीखनी है। इसके लिए, आलोचनात्मक सोच (critical thinking) विकसित करना बहुत जरूरी है। आप जो भी पढ़ें, देखें या सुनें, उस पर विचार करें कि क्या वह सही है। जानकारी को सिर्फ रटने के बजाय उसे समझना सीखें।   एक शिक्षक केवल वह नहीं है जो आपको पाठ पढ़ाता है, बल्कि वह आपका सच्चा मित्र और मार्गदर्शक भी है। हमारी भूमिका आपके जीवन में ज्ञान का प्रकाश फैलाने की है। हम आपको सही रास्ता दिखाते हैं, आपकी शंकाओं को दूर करते हैं और आपकी क्षमताओं को पहचानकर उन्हें निखारने में मदद करते हैं। एक शिक्षक और विद्यार्थी के बीच का रिश्ता सिर्फ कक्षा तक सीमित नहीं होता। यह एक मजबूत मानसिक और भावनात्मक जुड़ाव है, जो आपको जीवन भर सही निर्णय लेने में मदद करता है। जब आप हमें अपनी परेशानियाँ बताते हैं, तो हम आपका हाथ थामकर आगे बढ़ने का हौसला देते हैं।   आप सभी का सबसे पहला कर्तव्य अपने लक्ष्यों को निर्धारित करना है। यह जरूरी नहीं कि हर कोई डॉक्टर या इंजीनियर ही बने, बल्कि आप अपनी रुचि के अनुसार कोई भी लक्ष्य चुन सकते हैं। इन लक्ष्यों को पाने के लिए कठिन परिश्रम, अनुशासन और ईमानदारी ही आपके सबसे बड़े साधन हैं। साथ ही, यह भी याद रखें कि आपका विद्यालय सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि आपका दूसरा घर है। इसे स्वच्छ और सुंदर बनाए रखना आप सभी की जिम्मेदारी है। स्कूल में कूड़ा इधर-उधर न फेंकें, दीवारों को गंदा न करें और पानी का सदुपयोग करें। एक स्वच्छ वातावरण में ही एक स्वस्थ मन का विकास होता है।   अंतिम में, मैं आप सभी को यह विश्वास दिलाता हूँ कि हम शिक्षक भी अपने कर्तव्यों के प्रति सचेत हैं। हमारा कर्तव्य केवल आपको पढ़ाना नहीं, बल्कि आपको एक अच्छा इंसान बनाना भी है। हम आपको ज्ञान के साथ-साथ नैतिक मूल्य, ईमानदारी और सम्मान का पाठ भी सिखाएँगे। हम आपके सपनों को पूरा करने में हर संभव मदद करेंगे। आप सभी हमारे लिए गौरव हैं। हमें उम्मीद है कि आप अपने ज्ञान और संस्कारों से इस देश का नाम रोशन करेंगे। आप सभी का भविष्य उज्ज्वल हो!   आप सभी को शुभ आशीष सुशील शर्मा प्राचार्य

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