: सिहोरा गोसलपुर में नवांकुर सखी हरियाली यात्रा कार्यक्रम का शुभारंभ
Sat, Jul 26, 2025
गोसलपुर में नवांकुर सखी हरियाली यात्रा कार्यक्रम का शुभारंभ
रिपोर्टर अनिल जैन सिहोरा।
प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के आवाहन पर मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद विकासखण्ड सिहोरा नवांकुर संस्था गोसलपुर के द्वारा नवांकुर सखी हरियाली यात्रा का शुभारम्भ नगर के शासकीय कन्या शाला गोसलपुर में भाजपा जिला उपाध्यक्ष पुष्पराज सिंह बघेल समाजसेवी शिवनारायण पटैल जनपद सदस्य धमेंद्र सिंह राजपूत की उपस्थिति में नवांकुर सखी हरियाली यात्रा संगोष्ठी,पौधा वितरण कार्यक्रम का आयोजन संपन्न हुआ संगोष्ठी कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य अतिथि पुष्पराज सिंह बघेल द्वारा बताया गया की स्वैच्छिकता के आधार पर महिलाओं को पर्यावरण संरक्षण एवं उनमें पर्यावरण संरक्षण के लिए अपनत्व का भाव विकसित करने हेतु मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद द्वारा नवांकुर सखी योजना"लागू की गई है जिसमें पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के माध्यम से समाज एवं परिवार तक पहुँच के साथ घर आंगन में पूर्व वित्तपोषित नवांकुर संस्था द्वारा हरियाली अमावश्या पर आयोजित कलश यात्रा/हरियाली यात्रा में उपलब्ध कराई जाने वाली बीज रोपित थैलियों की देख-भाल(सुरक्षा एवं )जल व्यवस्था करते हुए पौधा तैयार करना तथा तैयार पौधों को महत्वपूर्ण अवसरों जैसे जन्मदिन,वैवाहिक वर्षगाँठ तथा पुण्य तिथियों में उन्हें रोपित करना है नवांकुर सखी कार्यक्रम में पंजीकृत महिलाओं के साथ संवाद हेतु जिला समन्वयक मध्यप्रदेश जनअभियान जबलपुर धनश्याम रायपुरिया ने सभी उपस्थित महिलाओं को अपने घर आँगन में पौधे की देखभाल एक पेड़ माँ के नाम अंतर्गत पौधारोपण करने के विषय मे जानकारी दी गई कार्यक्रम के पश्चात उपस्थित सभी नवांकुर सखियो को फलदार,छायादार,औषधि युक्त पौधो के साथ पोधो की थैली, एवं बीजो का वितरण किया गया है कार्यक्रम का संचालन श्री भारत महरोलिया विकासखण्ड समन्वयक के द्वारा किया गया है कार्यक्रम का आभार हेमचंद असाटी नवांकुर संस्था के द्वारा किया गया है ।कार्यक्रम में संस्था की प्रमुख प्रियंका तंतुवाय बलराम पटेल हेमचंद असाटी महेंद्र सिंह ठाकुर रवि सिंह ठाकुर मनीष पटेल अरुण पटेल कमल पटेल अर्पित चौबे राज पटेल आदित्य प्रीतवानी दीपक पटेल युद्धवीर पटेल गुलाब सिंह मरकाम श्याम सिंह लोधी नरेश पटेल सुरभि कोरी संध्या बर्मन ज्योति श्रीवास्तव शकुंतला ठाकुर शशीता खटीक पूजा पटैल माया झारिया प्रभा कोरी आराधना अवस्थी की उपस्थिति में कार्यक्रम संपन्न किया गया।
: किसानों की दुर्दशा के लिए सरकार जिम्मेवार, किसान सभा
Sat, Jul 26, 2025
किसानों की दुर्दशा के लिए सरकार जिम्मेवार, किसान सभा
मध्य प्रदेश किसान सभा के संयुक्त सचिव जगदीश पटेल ने विज्ञप्ति जारी कर बताया कि वर्तमान में मूंग उत्पादक किसानों की दुर्दशा के लिए डबल इंजन की सरकार को जिम्मेवार ठहराया है,सरकार ने किसानों के आंदोलनों के आगे घुटने टेककर मज़बूरी में मूंग की खरीदी कर रही है जिसमें 3.51लाख मीट्रिक टन खरीदी का लक्ष्य रखा है जबकि पंजीयन 8लाख मीट्रिक टन से अधिक हो गया है। सरकार को सभी किसानों की मूंग खरीदी करने में पसीने छूट रहे हैं, इसलिए किसानों को किसी भी तरह परेशान कर ओने पौने दाम में बेचने मजबूर कर रहे हैं। किसान सभा किसानों के किसी भी तरह के शोषण दमन के खिलाफ संघर्ष में किसानों के साथ है। 23जुलाई 2025को मध्य प्रदेश किसान सभा की टीम द्वारा समर्थन मूल्य पर खरीदी केंद्र, आनंद वेयर हाउसिंग सालीचौका, स्वर्णपरी वेयर हाउस पोड़ार तिराहा सालीचौका, मां रेवा वेयर हाउस पोडार तिराहा सालीचौका, विनायक वेयर हाउस सालीचौका, श्री माया वेयर हाउस सालीचौका का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस बीच वेयर हाउस एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र राय जो शासन सत्ता से तालुक रखते हैं उनके वेयर हाउसों में खरीदी चल रही है उनका दौरा कर उनके ऑफिस में उनसे मुलाकात कर किसानों को परेशानी न हो किसान हित में व्यवस्था बनाए रखने की चर्चा की गई।प्रत्येक खरीदी केंद्र पर 150से 200ट्रैक्टर ट्रॉली की लाइन लगी हुई हैं जिनमें भारी बरसात के बीच एक सप्ताह से किसान लाइन में लगे हुए हैं।आनंद वेयर हाउसिंग सालीचौका की तुलाई 22जुलाई से समिति एवं वेयर हाउस मालिक की आपसी खींचतान में पिछले 24 घंटे से बंद थी, मजबूर होकर किसानों ने वहां उपस्थित किसानों ने चक्काजाम कर दिया, यह खबर किसान सभा के साथी भोजराज पटेल ने दी, इसी दौरान सूचना प्राप्त हुई कि किसान यदि दोबारा चक्का जाम करते हैं तो उन पर प्रकरण दर्ज किए जाएंगे, जानकारी मिलते ही किसान सभा की टीम चक्काजाम स्थल आनंद वेयर हाउसिंग सालीचौका खरीदी केंद्र पर पहुंचे जब तक वेयर हाउस अध्यक्ष जितेंद्र राय एवं पुलिस प्रशासन द्वारा 1घंटे के अंदर पुनः खरीदी करने के आश्वासन पर जाम को किसानो ने खोला, किसान 1घंटे का इंतजार कर रहे थे और पुनः जाम करने की बोल रहे थे इस स्थिति में मध्य प्रदेश किसान सभा से मै जगदीश पटेल एवं महासचिव करणसिंह अहिरवार पुलिस चौकी पहुंचकर प्रभारी महोदया से वस्तुस्थिति को समझा उन्होंने संबंधितो से बात कर बताया सर्वेयर गाडरवारा से निकल गया पानी गिरने के कारण रस्ते में रुकना पड़ा, समय लग सकता है, हमारी टीम ने किसानो से सब्र रखने की अपील की जिससे कि किसानों की तुलाई भी शुरू हो और किसी भी प्रकार की स्थिति भी न बिगड़े , आखिर कुछ किसानो ने न जितेंद्र राय और न ही प्रशासन और न ही किसान सभा की अपील को तबज्जों दी और चक्का जाम कर दिया उसी समय सर्वेयर एवं पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचे, जैसा कि सर्वेयर के आते ही तुलाई शुरू होना थी चालू हुई।कुछ स्वार्थी जिम्मेवारियों के कारण फिर खरीदी रोक दी गई, पीड़ित किसानों को सलाह दी गई कि सबसे पहले प्रशासन को सूचित कर समस्या हल न होने पर आंदोलन की राह पकड़ें।दूसरे दिन तुलाई बंद रहने से किसान सभा के भोजराज पटेल सहित पीड़ित किसान पुलिस चौकी पहुंचकर खरीदी शुरू नहीं होने की स्थिति में पुनः आंदोलन की राह पकड़ने का ज्ञापन दिया ।किसानों को सलाह दी गई कि बगैर प्रशासन को पूर्व अवगत कराए कोई आंदोलन न किया जाए क्योंकि कार्पोरेट पूंजीपतियों की सरकार है, किसानों का दमन करने में पीछे नहीं हटेगी। प्रशासन की पहल पर विवादित खरीदी केंद्र आनंद वेयर हाउस पर प्रशासनिक टीम आई और पुनः खरीदी शुरू हुई।किसानों की दुर्दशा,अन्याय अत्याचार के खिलाफ किए गए संघर्ष में मिली जीत पर सभी का क्रान्तिकारी अभिवादन करती है।मध्य प्रदेश किसान सभा शासन प्रशासन से मांग करती है नूर वेयर हाउस में किसान के साथ मारपीट करने बालों को गिरफ्तार किया जाय, केंद्रों पर किसानों को ठहरने , पेयजल जैसी निर्धारित व्यवस्थाएं तत्काल की जावे, खरीदी केंद्रों पर पुलिस प्रशासन की गश्त की जावे जिससे विवाद एवं चोरी होने जैसी अव्यवस्था को रोकी जा सके,केंद्रों में तोल कांटों की संख्या बढ़ाई जाए, नए खरीदी केंद्र खोले जाएं, स्लॉट बुक करने में आ रही समस्या को सरल बनाया जाय, पंजीयन करा चुके सभी किसानों के स्लॉट बुक कर सभी की मूंग खरीदी की जावे, तय डेट में खरीदी न होने की स्थिति में स्लॉट बुक करने एवं खरीदी की डेट बढ़ाई जाए,प्रशासन या प्रबंधकों द्वारा किसानों के साथ अभद्र व्यवहार न किया जाए, पर्ची या बिल तत्काल किसानों को प्रदाय किया जाए, किसानों को नियम अनुसार समय सीमा के अंदर भुगतान किया जाय।शासन प्रशासन को मध्य प्रदेश किसान सभा चेतावनी देती है बेवजह किसानों को परेशान करने से बाज आएं अन्यथा किसान सभा के कार्यकर्ता जहां भी हैं किसानों के साथ आंदोलन करने बाध्य होंगे जिसकी जवाबदारी शासन प्रशासन की होगी।
: श्रावण मास : धार्मिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य में एक सूक्ष्म विश्लेषण एवं श्रावण गीत
Sat, Jul 26, 2025
श्रावण मास : धार्मिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य में एक सूक्ष्म विश्लेषण एवं श्रावण गीत
सुशील शर्मा
भारतीय संस्कृति में बारह महीनों का विशेष महत्व है, परंतु श्रावण मास (सावन) को विशेष रूप से धार्मिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अत्यंत पावन एवं पुण्यकारी माना गया है। यह मास वर्षा ऋतु के मध्य में आता है, जब धरती हरीतिमा से आच्छादित हो जाती है और प्रकृति अपने संपूर्ण सौंदर्य में खिल उठती है। इस माह का संबंध विशेष रूप से भगवान शिव से जुड़ा है, किन्तु इसके पीछे न केवल धार्मिक मान्यताएं हैं, बल्कि वैज्ञानिक एवं आयुर्विज्ञान संबंधी कारण भी छिपे हुए हैं। प्रस्तुत आलेख में हम श्रावण मास की बहुआयामी महत्ता का विस्तृत और सूक्ष्म विश्लेषण करेंगे।
1. पौराणिक एवं धार्मिक संदर्भ :
श्रावण मास का नाम 'श्रवण नक्षत्र' के आधार पर पड़ा है, जो इस मास की पूर्णिमा तिथि के निकट होता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार यह मास चातुर्मास का प्रारंभ है वह कालखंड जब भगवान विष्णु क्षीर सागर में योगनिद्रा में लीन रहते हैं और सृष्टि का संचालन भगवान शिव के हाथों में आ जाता है। यही कारण है कि इस मास में शिवपूजन की विशेष परंपरा विकसित हुई है।
शिव महिमा और श्रावण:
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के समय निकले हलाहल विष को जब संपूर्ण सृष्टि संकट में डालने लगा, तब भगवान शिव ने उसे अपने कंठ में धारण कर लिया और नीलकंठ कहलाए। यह घटना श्रावण मास में घटित मानी जाती है। इसी कारण श्रावण मास में शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा आदि चढ़ाने की परंपरा है, जिससे शिव के कंठ की शीतलता बनी रहे।
2. सांस्कृतिक पक्ष :
श्रावण मास भारतीय जीवन के उल्लास, प्रेम, भक्ति और सौंदर्य का प्रतीक बन चुका है। यह महीना लोकगीतों, पर्वों और मेलों का भी संगम है।कजली, फाग, मल्हार जैसी लोकधुनें गांवों-गांवों में गुंजती हैं।हरियाली तीज, नागपंचमी, रक्षा बंधन, शिवरात्रि, श्रावणी उपाकर्म जैसे पर्व इसी माह में आते हैं।स्त्रियां इस मास में सौंदर्य और शृंगार का पर्व मनाते हुए उपवास करती हैं और सुहाग की लंबी आयु की कामना करती हैं।
श्रावण और लोककला
श्रावण मास में रचनात्मकता चरम पर होती है। मेंहदी लगाना, झूला झूलना, गीत गाना, पारंपरिक वस्त्र पहनना आदि इसके जीवंत उदाहरण हैं। यह महीना स्त्रियों के लिए विशेष रूप से उमंग और आस्था का प्रतीक बन चुका है।
3. आयुर्वेद एवं विज्ञान के दृष्टिकोण से श्रावण का महत्व
भारत के ऋषियों ने धर्म और स्वास्थ्य को कभी अलग नहीं माना। श्रावण मास का विज्ञान अत्यंत गूढ़ है और इसके नियमों का पालन व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है।
पाचन तंत्र की शिथिलता
मानसून के कारण वातावरण में आर्द्रता बढ़ जाती है, जिससे पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है। आयुर्वेद अनुसार वर्षा ऋतु में अग्नि मंद हो जाती है। अतः इस मास में उपवास, फलाहार, सात्त्विक भोजन, नीम, तुलसी, त्रिफला, पंचामृत आदि का सेवन लाभकारी होता है।
जलजनित रोगों का समय
इस समय मलेरिया, टाइफाइड, डेंगू, पीलिया, हैजा जैसे रोग फैलने की संभावना अधिक होती है। अतः शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए कई उपवास और व्रत किए जाते हैं जिससे विषाक्त तत्व (toxins) शरीर से बाहर निकलते हैं।
शिवलिंग पर जलाभिषेक का वैज्ञानिक आधार
शिवलिंग पर जलाभिषेक से न केवल धार्मिक आनंद की अनुभूति होती है, बल्कि यह क्रिया मन को एकाग्र करती है। इसके पीछे जल की ध्वनि, कंपन और ध्यान केंद्रित करने की प्रक्रिया अंततः मानसिक तनाव को कम करती है।
4. पर्यावरणीय पक्ष
श्रावण मास वर्षा का चरम होता है। यह प्रकृति के नवजीवन का काल होता है। हरियाली पर्व, वृक्षारोपण, तुलसी पूजन जैसी परंपराएं इस मास में जुड़ी हैं, जो हमें पर्यावरण-संरक्षण का पाठ पढ़ाती हैं।जल संरक्षण का भाव शिवलिंग पर जल अर्पण से उत्पन्न होता है, जो जल की पवित्रता और उपयोगिता का संकेत है।वृक्षों की आराधना, जैसे पीपल, वट, बेल, तुलसी आदि को पूजने से उनकी रक्षा होती है।नदी स्नान और तीर्थ यात्रा का चलन भी जल स्रोतों के संरक्षण से जुड़ा है।
5. मनोवैज्ञानिक लाभ
श्रावण मास में प्रतिदिन नियमपूर्वक ब्रह्ममुहूर्त में उठना, स्नान, जप, ध्यान, व्रत, शिवपूजन आदि क्रियाएं मन को स्थिरता, शांति और आनंद प्रदान करती हैं। यह आत्मअनुशासन का अभ्यास है। इसके अतिरिक्त उपवास रखने से आत्मसंयम, इच्छाओं पर नियंत्रण और मन की दृढ़ता विकसित होती है।
6. सामाजिक समरसता
श्रावण मास में धार्मिक यात्राएं, कथा-भागवत, सामूहिक पूजन, भजन-कीर्तन आदि सामाजिक समागमों का आयोजन होता है जिससे जनसामान्य में एकता, सहिष्णुता और सेवा की भावना जाग्रत होती है। कांवड़ यात्रा इसका जीवंत उदाहरण है जिसमें लाखों शिवभक्त एक भाव में बंधकर यात्रा करते हैं।
7. युवा वर्ग और श्रावण
आज के वैज्ञानिक युग में यदि श्रावण मास की परंपराओं को केवल आस्था के रूप में न देख कर वैज्ञानिक, सामाजिक और मानसिक विकास के उपकरण के रूप में देखा जाए, तो युवा वर्ग के लिए यह मास आत्मविकास का अवसर बन सकता है।आत्मानुशासनसंयमप्रकृति से जुड़ावयोग-प्राणायामशाकाहार की प्रवृत्तिइन सबके माध्यम से श्रावण मास युवा वर्ग के लिए नवजीवन का संकल्प लेकर आता है।श्रावण मास केवल एक धार्मिक मास नहीं है, बल्कि भारतीय परंपरा की वैज्ञानिकता, प्रकृति-संवेदना और आत्मशुद्धि की महान यात्रा है। यह महीना संयम का, साधना का, संवेदना का और सृष्टि के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है। यदि हम इस माह के पीछे छिपे गूढ़ तात्पर्यों को समझें, तो न केवल हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होगा, बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय चेतना भी जाग्रत होगी।श्रावण हमें शांति, सहिष्णुता, साधना और समर्पण सिखाता है आइए, इस श्रावण को सिर्फ एक परंपरा न मानें, बल्कि एक पुनर्जागरण का पर्व मानकर मनाएं।श्रावणगीत श्रावण की बूँदें हैं पावन, हरियाली मन भाए।मन मंदिर में भक्ति जगे नित, शिव का नाम सुहाए।। मेघों की वाणी मधुरिम है, कजरारे नभ छाए।सावन सजा फुहारों में अब, तन-मन भीगें जाए।।गौरी करें अर्चना शिव की, जपें निरंतर भोले।बेल पत्र अर्पित कर-कर के, शिव चरणों को धोले।। जन मानस भक्ति में डूबा,शिव का रंग चढ़ाए।श्रावण की बूँदें हैं पावन,हरियाली मन भाए।। कांवड़िए गाते हर-हर बम, पथ में नर्तन करते।गंगाजल अभिषेक करें सब, भोले झोली भरते।।व्रत उपवास करें सब नारी, मंगल रूप सजाए।श्रद्धा, संयम ,संकल्पों का, अनुपम रंग चढ़ाए।। जीवन के नव अनुबंधों में,मन के रंग रँगाए।श्रावण की बूँदें हैं पावन,हरियाली मन भाए।। वन, उपवन सब हरे-भरे हैं, जीवन रस बरसाए।धरती माँ की गोद सजी अब, नवल रंग मुस्काए।।भक्ति, प्रकृति, प्रेम का संगम, आशा नई जगाए।सजता सावन, संवरे तन मन,गोरी मन शरमाए। त्योहारों का पावन मौसम,मन में भक्ति जगाए।श्रावण की बूँदें हैं पावन,हरियाली मन भाए।।
सुशील शर्मा