: नेशनल दिव्यांग एम्पयुटी फुटबाल मे पहली वार दूसरे नम्बर पर
Sun, Feb 25, 2024
नेशनल दिव्यांग एम्पयुटी फुटबाल मे पहली वार दूसरे नम्बर परसागर-नेशनल एम्पयुटी फुटबाल चैम्पियनशिप चरखी दादरी हरियाणा 23से25 फरबरी 2024 तक आयोजित हाथ पैर कटे दिव्यांगों का फुटबॉल चैम्पियनशिप का आयोजन हरियाणा पैरा एम्पयुटी फुटबाल एसोसिएशन के द्वारा आयोजित किया गया था। डा इनाम खान चेयरमेन पैरालंपिक मध्यप्रदेश के मार्गदर्शन मे खेलने गई दिव्अयांग फुटबाल प्परतियोगिता मे सभी लीग मैच जीतने के वाद केरल हे फाइनल मैच हुआ पहली वार मध्यप्रदेश के खिलाडियों ने फुटवाल जी जान से खेली अधिक अनुभवी केरल टीम ने 4 गोल किए पर मप्र के खिलाडियो ने भी केरल के विरूद्ध 2 गोल किए ओर दूसरे स्थान पर रही केरल पहले स्थान पर मध्यप्रदेश के इतिहास मे पैरा एम्पयुटी फुटबाल मे यह पहली बार हुआ की 8 राज्यो के साथ मध्यप्रदेश दुसरे स्थान पर रहा इस पूरे ईवेंट मे कमलेश रजक मेनेजर,इकराम खान खेल कोच,खेल एवं युवा कल्याण विभाग सागर के प्रदीप अविद्रा,डीपी यादव जेडी सामाजिक न्याय विभाग,मकसुद खान,अबरार खान,कलीम खान,सत्यम भील राकेश बख्सी,नसीम खान का सहयोग रहा ।
: दृष्टिबाधित दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण वितरित
Tue, Feb 13, 2024
दृष्टिबाधित दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण वितरितगाडरवारा। बीते रविवार को स्थानीय शनि मंदिर स्थित आडिटोरियम में समावेशी शिक्षा प्रकोष्ठ शासकीय प्रगत शिक्षा अध्यययन संस्थान जबलपुर के सौजन्य से दृष्टिबाधित दिव्यांगों को सहायक उपकरण वितरण मप्र शासन के स्कुल शिक्षा मंत्री राव उदयप्रताप सिंह द्वारा किया गया। इस अवसर पर साईंखेड़ा विकासखण्ड से आमंत्रित दृष्टिबाधित दिव्यांग जनों में गोपाल कुशवाहा, सुक्कीबाई धानक, आकाश त्रिवेदी, मन्नूलाल धानक, राजू कौरव, सुरेश झारिया, लक्ष्मी तिवारी, पार्वती छीपा, दिनेश बाथरे, परमु प्रसाद, हल्के भैया आदि शामिल रहे। कार्यक्रम में प्रभारी अधिकारी डॉ रामनरेश पटैल सहित अन्य मौजूद रहे ।
: स्वास्थ वर्धक जानकारी आप भी जानिए कौन सी धातु के बर्तन में भोजन करने से क्या लाभ और क्या हानि होती है
Tue, Feb 6, 2024
स्वास्थ वर्धक जानकारी आप भी जानिए कौन सी धातु के बर्तन में भोजन करने से क्या लाभ और क्या हानि होती है
सोना
सोना एक गर्म धातु है। सोने से बने पात्र में भोजन बनाने और करने से शरीर के आन्तरिक और बाहरी दोनों हिस्से कठोर, बलवान, ताकतवर और मजबूत बनते है और साथ साथ सोना आँखों की रौशनी बढ़ता है।
चाँदी
चाँदी एक ठंडी धातु है, जो शरीर को आंतरिक ठंडक पहुंचाती है। शरीर को शांत रखती है इसके पात्र में भोजन बनाने और करने से दिमाग तेज होता है, आँखों स्वस्थ रहती है, आँखों की रौशनी बढती है और इसके अलावा पित्तदोष, कफ और वायुदोष को नियंत्रित रहता है।
कांसा
काँसे के बर्तन में खाना खाने से बुद्धि तेज होती है, रक्त में शुद्धता आती है, रक्तपित शांत रहता है और भूख बढ़ाती है। लेकिन काँसे के बर्तन में खट्टी चीजे नहीं परोसनी चाहिए खट्टी चीजे इस धातु से क्रिया करके विषैली हो जाती है जो नुकसान देती है। कांसे के बर्तन में खाना बनाने से केवल ३ प्रतिशत ही पोषक तत्व नष्ट होते हैं।
तांबा
तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से व्यक्ति रोग मुक्त बनता है, रक्त शुद्ध होता है, स्मरण-शक्ति अच्छी होती है, लीवर संबंधी समस्या दूर होती है, तांबे का पानी शरीर के विषैले तत्वों को खत्म कर देता है इसलिए इस पात्र में रखा पानी स्वास्थ्य के लिए उत्तम होता है. तांबे के बर्तन में दूध नहीं पीना चाहिए इससे शरीर को नुकसान होता है।
पीतल
पीतल के बर्तन में भोजन पकाने और करने से कृमि रोग, कफ और वायुदोष की बीमारी नहीं होती। पीतल के बर्तन में खाना बनाने से केवल ७ प्रतिशत पोषक तत्व नष्ट होते हैं।
लोहा
लोहे के बर्तन में बने भोजन खाने से शरीर की शक्ति बढती है, लोह्तत्व शरीर में जरूरी पोषक तत्वों को बढ़ता है। लोहा कई रोग को खत्म करता है, पांडू रोग मिटाता है, शरीर में सूजन और पीलापन नहीं आने देता, कामला रोग को खत्म करता है, और पीलिया रोग को दूर रखता है. लेकिन लोहे के बर्तन में खाना नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसमें खाना खाने से बुद्धि कम होती है और दिमाग का नाश होता है। लोहे के पात्र में दूध पीना अच्छा होता है।
स्टील
स्टील के बर्तन नुक्सान दायक नहीं होते क्योंकि ये ना ही गर्म से क्रिया करते है और ना ही अम्ल से. इसलिए नुक्सान नहीं होता है. इसमें खाना बनाने और खाने से शरीर को कोई फायदा नहीं पहुँचता तो नुक्सान भी नहीं पहुँचता।
एलुमिनियम
एल्युमिनिय बोक्साईट का बना होता है। इसमें बने खाने से शरीर को सिर्फ नुक्सान होता है। यह आयरन और कैल्शियम को सोखता है इसलिए इससे बने पात्र का उपयोग नहीं करना चाहिए। इससे हड्डियां कमजोर होती है. मानसिक बीमारियाँ होती है, लीवर और नर्वस सिस्टम को क्षति पहुंचती है। उसके साथ साथ किडनी फेल होना, टी बी, अस्थमा, दमा, बात रोग, शुगर जैसी गंभीर बीमारियाँ होती है। एलुमिनियम के प्रेशर कूकर से खाना बनाने से 87 प्रतिशत पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं।
मिट्टी
मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने से ऐसे पोषक तत्व मिलते हैं, जो हर बीमारी को शरीर से दूर रखते थे। इस बात को अब आधुनिक विज्ञान भी साबित कर चुका है कि मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाने से शरीर के कई तरह के रोग ठीक होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, अगर भोजन को पौष्टिक और स्वादिष्ट बनाना है तो उसे धीरे-धीरे ही पकना चाहिए। भले ही मिट्टी के बर्तनों में खाना बनने में वक़्त थोड़ा ज्यादा लगता है, लेकिन इससे सेहत को पूरा लाभ मिलता है। दूध और दूध से बने उत्पादों के लिए सबसे उपयुक्त हैमिट्टी के बर्तन। मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने से पूरे १०० प्रतिशत पोषक तत्व मिलते हैं। और यदि मिट्टी के बर्तन में खाना खाया जाए तो उसका अलग से स्वाद भी आता है।पानी पीने के पात्र के विषय में 'भावप्रकाश ग्रंथ' में लिखा है....जलपात्रं तु ताम्रस्य तदभावे मृदो हितम्।पवित्रं शीतलं पात्रं रचितं स्फटिकेन यत्।काचेन रचितं तद्वत् वैङूर्यसम्भवम्।(भावप्रकाश, पूर्वखंडः4)अर्थात् - पानी पीने के लिए ताँबा, स्फटिक अथवा काँच-पात्र का उपयोग करना चाहिए। सम्भव हो तो वैङूर्यरत्नजड़ित पात्र का उपयोग करें। इनके अभाव में मिट्टी के जलपात्र पवित्र व शीतल होते हैं। टूटे-फूटे बर्तन से अथवा अंजलि से पानी नहीं पीना चाहिए।