पावन वर्षायोग–2026 के अंतर्गत परम पूज्य आचार्य गुरुवर : खितौला में भक्ति एवं उल्लास के साथ संपन्न हुआ चातुर्मास मंगल कलश स्थापना महोत्सव
Aditi News Team
Sat, Aug 1, 2026
रिपोर्टर अनिल जैन
खितौला में भक्ति एवं उल्लास के साथ संपन्न हुआ चातुर्मास मंगल कलश स्थापना महोत्सव
खितौला। पावन वर्षायोग–2026 के अंतर्गत परम पूज्य आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज की शिष्या एवं आचार्य गुरुवर श्री समय सागर जी महाराज की आज्ञानुवर्ती शिष्या आर्यिका माँ 105 सूत्रमति माताजी ससंघ के पावन सान्निध्य में शुक्रवार को खितौला में चातुर्मास मंगल कलश स्थापना महोत्सव अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर खितौला सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ भव्य मंगल कलश शोभायात्रा से हुआ। शोभायात्रा में महिलाएं सिर पर मंगल कलश धारण कर चल रही थीं, वहीं पुरुष, युवा एवं बच्चे भी भक्ति भाव से सम्मिलित हुए। जयघोष, मंगल गीतों एवं धर्मध्वजों के साथ निकली शोभायात्रा ने पूरे नगर को धर्ममय वातावरण से सराबोर कर दिया।
शोभायात्रा के उपरांत कार्यक्रम स्थल पर आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज के चित्र का अनावरण एवं दीप प्रज्वलन कर समारोह का विधिवत शुभारंभ किया गया। इसके पश्चात मंगलाचरण एवं धार्मिक विधानों के साथ चातुर्मास मंगल कलश स्थापना का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।
प्रथम मंगल कलश की स्थापना का सौभाग्य महेश चंद्र जैन एवं अंकुर जैन परिवार को प्राप्त हुआ।
द्वितीय मंगल कलश की स्थापना श्रीमती रजनी जैन एवं नीरज जैन परिवार द्वारा की गई।
तृतीय मंगल कलश राकेश जैन, राहुल जैन एवं रोहित जैन परिवार द्वारा स्थापित किया गया।
चतुर्थ मंगल कलश की स्थापना मुकेश जैन, श्वेतांक जैन एवं मयंक जैन परिवार ने श्रद्धापूर्वक संपन्न की।
पंचम मंगल कलश स्थापित करने का सौभाग्य कैलाश जैन, शैलेष जैन एवं सचिन जैन परिवार को प्राप्त हुआ।
षष्ठम मंगल कलश रवि कुमार जैन, प्रकाश जैन एवं अमन जैन परिवार द्वारा विधि-विधान के साथ स्थापित किया गया।
कार्यक्रम के सांस्कृतिक सत्र में बच्चों एवं महिलाओं ने धर्म, त्याग, तप और संस्कारों पर आधारित मनमोहक नाट्य प्रस्तुतियां देकर उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। उनकी प्रस्तुतियों को उपस्थित जनसमुदाय ने खूब सराहा तथा तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
इस अवसर पर वंदनीय आर्यिका माँ 105 सूत्रमति माताजी ने अपने मंगल आशीर्वचनों में कहा कि चातुर्मास आत्मशुद्धि, स्वाध्याय, संयम, तप और धर्म आराधना का अनुपम अवसर है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से चार माह के इस पावन काल का सदुपयोग करते हुए धर्म साधना, सदाचार और आत्मकल्याण के मार्ग पर अग्रसर होने का संदेश दिया।
कार्यक्रम में जैन समाज के वरिष्ठजन, महिलाएं, युवा एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। पूरे आयोजन के दौरान भक्ति, श्रद्धा एवं उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। अंत में समाज के पदाधिकारियों ने सभी अतिथियों, सहयोगी परिवारों एवं श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।
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अदिति न्यूज,(सतीश लमानिया)
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