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श्री अरविंद घोष जी की 154वीं जयंती पर व्याख्यानमाला का आयोजन

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भारत के स्वाधीनता संग्राम के आध्यात्मिक प्रणेता महर्षि : श्री अरविंद घोष जी की 154वीं जयंती पर व्याख्यानमाला का आयोजन

Aditi News Team

Thu, Aug 27, 2026

भारत के स्वाधीनता संग्राम के आध्यात्मिक प्रणेता महर्षि श्री अरविंद घोष जी की 154वीं जयंती पर व्याख्यानमाला का आयोजन

नरसिंहपुर। मध्यप्रदेश जनअभियान परिषद, जिला नरसिंहपुर के तत्वावधान में भारत के स्वाधीनता संग्राम के आध्यात्मिक प्रणेता, महान राष्ट्रवादी चिंतक एवं योगी महर्षि श्री अरविंद घोष जी की 154वीं जन्म-जयंती के अवसर पर व्याख्यानमाला का आयोजन प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय स्वामी विवेकानंद महाविद्यालय, नरसिंहपुर के सभागार में किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता भारतीय रेडक्रॉस सोसाइटी के चेयरमैन डॉ. अनंत कुमार दुबे ने की। मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय संत समाज के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं श्री देवराम जानकी मंदिर, खिरका गाडरवारा के महंत पूज्य महंत श्री बालकदास जी महाराज उपस्थित रहे। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. नमिता साहू, प्राध्यापिका हिंदी, डॉ. गणेश कुमार सोनी, विभागाध्यक्ष गणित, शासकीय स्वामी विवेकानंद महाविद्यालय नरसिंहपुर तथा स्वामी निरंजन गंगाधर पालिमंकर जी महाराज मंचासीन रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती एवं महर्षि श्री अरविंद जी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं संगठन गीत के साथ किया गया। कार्यक्रम की प्रस्तावना एवं अतिथियों का स्वागत उद्बोधन मध्यप्रदेश जनअभियान परिषद, नरसिंहपुर के जिला समन्वयक श्री जयनारायण शर्मा द्वारा किया गया।

*महर्षि अरविंद का जीवन राष्ट्रवाद और अध्यात्म का अद्भुत समन्वय*

मुख्य वक्ता डॉ. नमिता साहू ने अपने उद्बोधन में कहा कि महर्षि श्री अरविंद का संपूर्ण जीवन आध्यात्मिकता और राष्ट्रवाद से ओत-प्रोत रहा। उन्होंने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को केवल राजनीतिक संघर्ष के रूप में नहीं देखा, बल्कि इसे राष्ट्र की आत्मा के जागरण का अभियान माना। उन्होंने महर्षि अरविंद के बचपन से ऋषित्व तक की यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका जीवन साधारण से असाधारण और व्यक्ति से विश्वमानव बनने की प्रेरक यात्रा है।

उन्होंने कहा कि महर्षि अरविंद ने मनुष्य की चेतना के विकास की बात करते हुए उसे और अधिक ऊंचाई तक ले जाने का मार्ग बताया। उनके विचारों में मनुष्य केवल अंतिम अवस्था नहीं है, बल्कि उसे अपनी चेतना का निरंतर विकास करते हुए उच्चतर जीवन की ओर अग्रसर होना है।

अपने वक्तव्य में उन्होंने महर्षि अरविंद के जीवन से प्रेरणा लेते हुए तीन प्रमुख संदेशों पर विशेष रूप से प्रकाश डाला—

स्वाभिमान का मंत्र — अपने राष्ट्र के प्रति प्रेम, श्रद्धा और समर्पण केवल राजनीति नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा के प्रति उपासना का भाव है।

साधना का मंत्र — जीवन की कठिनाइयों से पलायन नहीं करना चाहिए, बल्कि उन्हें अपनी शक्ति के विकास और आत्म-परिवर्तन के अवसर के रूप में स्वीकार करना चाहिए।

अतिमानव का मंत्र — मानव जीवन का लक्ष्य केवल स्वार्थ तक सीमित नहीं है। मनुष्य को नफरत से प्रेम की ओर, स्वार्थ से समर्पण की ओर और सीमित चेतना से उच्चतर चेतना की ओर बढ़ना चाहिए।

डॉ. साहू ने कहा कि अलीपुर जेल की काल-कोठरी में जिस आध्यात्मिक ज्योति का अनुभव महर्षि अरविंद ने किया, वह आज भी विश्व मानवता के लिए मार्गदर्शन का प्रकाश है।

*15 अगस्त : दो जन्मदिन, एक राष्ट्रीय उत्सव*

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूज्य महंत श्री बालकदास जी महाराज ने अपने सारस्वत उद्बोधन में कहा कि 15 अगस्त भारत के इतिहास की अत्यंत महत्वपूर्ण तिथि है। इसी दिन भारत ने स्वतंत्रता प्राप्त की और इसी दिन महर्षि अरविंद घोष का जन्म हुआ। यह केवल एक संयोग नहीं, बल्कि भारत की राष्ट्रीय चेतना और आध्यात्मिक यात्रा का अद्भुत संगम प्रतीत होता है।

उन्होंने कहा कि महर्षि अरविंद की जयंती मनाना केवल उनके जीवन को स्मरण करना नहीं है, बल्कि उनके विचारों को अपने जीवन में आत्मसात करने का अवसर है। आज आवश्यकता है कि युवा पीढ़ी उनके राष्ट्रप्रेम, स्वाभिमान, आत्मशक्ति और आध्यात्मिक चेतना के संदेश को समझे और राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाए।

*क्रांति से अतिमानस तक की प्रेरक यात्रा*

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे भारतीय रेडक्रॉस सोसाइटी के चेयरमैन डॉ. अनंत कुमार दुबे ने कहा कि महर्षि अरविंद घोष का व्यक्तित्व भारतीय इतिहास में अद्वितीय है, जिसमें एक ओर क्रांतिकारी राष्ट्रवादी का तेज है तो दूसरी ओर वेदों और योग की गहन शांति है। उन्होंने विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त की, परंतु अपने जीवन का लक्ष्य ब्रिटिश साम्राज्य की सेवा नहीं, बल्कि भारत माता की सेवा को बनाया।

उन्होंने कहा कि महर्षि अरविंद ने युवाओं के हृदय में स्वतंत्रता की चेतना जागृत की और अपने लेखन तथा विचारों के माध्यम से राष्ट्रवाद को नई दिशा दी। उनका जीवन क्रांति से योग और योग से विश्वमानव के भविष्य की यात्रा है।

*पांच महापुरुषों की जयंती पर आयोजित होती हैं व्याख्यानमालाएं*

कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए जिला समन्वयक श्री जयनारायण शर्मा ने बताया कि मध्यप्रदेश जनअभियान परिषद द्वारा वर्षभर में विभिन्न महापुरुषों की जयंती के अवसर पर जिला एवं विकासखंड स्तर पर व्याख्यानमालाओं का आयोजन किया जाता है। इनमें—

- 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर स्वामी विवेकानंद जी की जयंती,

- 14 अप्रैल को भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की जयंती,

- प्रकटोत्सव पंचमी पर आदिशंकराचार्य जी की जयंती,

- महर्षि श्री अरविंद घोष जी की जयंती तथा

- 25 सितंबर को एकात्म मानव दर्शन के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती

पर उनके व्यक्तित्व, कृतित्व एवं विचारों पर आधारित व्याख्यानमालाओं का आयोजन किया जाता है।

उन्होंने बताया कि इन कार्यक्रमों में परिषद के मैदानी अमले, नवांकुर संस्थाएं, प्रस्फुटन समितियां, सामाजिक, धार्मिक एवं स्वैच्छिक संगठन, मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास कार्यक्रम के छात्र-छात्राएं एवं परामर्शदाता सहभागिता करते हैं। इसी श्रृंखला में महर्षि श्री अरविंद घोष जी की 154वीं जयंती पर यह व्याख्यानमाला आयोजित की गई।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रतिभागियों एवं कार्यकर्ताओं को मंच से सम्मानित भी किया गया।

कार्यक्रम का सफल संचालन मध्यप्रदेश जनअभियान परिषद, विकासखंड गोटेगांव के विकासखंड समन्वयक श्री प्रतीक कुमार दुबे द्वारा किया गया तथा आभार प्रदर्शन विकासखंड समन्वयक चीचली सुश्री स्मिता दांडे द्वारा किया गया।

व्याख्यानमाला में जिले भर की नवांकुर संस्थाओं, ग्राम विकास एवं वार्ड विकास प्रस्फुटन समितियों के सदस्यों, सीएमसीएलडीपी पाठ्यक्रम के छात्र-छात्राओं एवं परामर्शदाताओं सहित सामाजिक, धार्मिक, आध्यात्मिक एवं स्वैच्छिक संगठनों के प्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों तथा अनुसूचित जनजाति क्षेत्र के छात्र-छात्राओं सहित बड़ी संख्या में मातृशक्ति की सहभागिता रही।

महर्षि अरविंद का जीवन हमें यह संदेश देता है कि सच्ची स्वतंत्रता केवल बाहरी बंधनों से मुक्ति नहीं, बल्कि मनुष्य की चेतना, विचार और आत्मा की उन्नति है। राष्ट्र के प्रति प्रेम, जीवन में साधना और मानवता के प्रति समर्पण ही उनके विचारों की सच्ची श्रद्धांजलि है।

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अदिति न्यूज,(सतीश लमानिया)

मध्यप्रदेश जनअभियान परिषद, जिला नरसिंहपुर

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