"चातुर्मास कलश स्थापना श्रद्धालुओं की आस्था का महापर्व बनी" : निर्यापक श्रमण मुनि श्री समता सागर महाराज
Aditi News Team
Mon, Aug 10, 2026
"चातुर्मास कलश स्थापना श्रद्धालुओं की आस्था का महापर्व बनी"
निर्यापक श्रमण मुनि श्री समता सागर महाराज

कुंडलपुर (दमोह)। सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए निर्यापक श्रमण मुनि श्री समता सागर महाराज ने कहा कि चातुर्मास कलश स्थापना का यह भव्य समारोह किसी व्यक्तिगत प्रयास का परिणाम नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की जागृत भक्ति, आस्था और बड़े बाबा के अतिशय का प्रत्यक्ष प्रमाण है। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं ने केवल संपर्क और प्रेरणा का कार्य किया, लेकिन इतनी विशाल संख्या में श्रद्धालुओं का स्वतः उमड़ पड़ना उनकी अंतःकरण से जागी धर्मभावना का परिणाम है।मुनिश्री ने कहा कि किसी व्यक्ति ने व्यक्तिगत रूप से लोगों को आमंत्रित नहीं किया, फिर भी देशभर से हजारों श्रद्धालु कुंडलपुर पहुंच गए। यह बड़े बाबा आदिनाथ भगवान की दिव्य प्रभावना और गुरुवर आचार्य श्री विद्यासागर महाराज की तप-साधना का प्रताप है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की जागृत भावनाओं का पहला अद्भुत दृश्य उस समय देखने को मिला जब मंगल आगमन के अवसर पर संपूर्ण कुंडलपुर एक विशाल धर्मनगरी के रूप में दिखाई दे रहा था। इसके बाद महा-महा मंगल कलश स्थापना समारोह में उमड़ा जनसैलाब इस दिव्य प्रभाव का दूसरा ऐतिहासिक प्रमाण बन गया।उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता ने चातुर्मास कलश स्थापना को केवल धार्मिक आयोजन नहीं रहने दिया, बल्कि इसे आस्था, श्रद्धा और समर्पण के राष्ट्रीय महापर्व का स्वरूप प्रदान कर दिया। प्रत्येक श्रद्धालु के मन में धर्म, गुरु और बड़े बाबा के प्रति जो भाव जागृत हुए, वही इस समारोह की वास्तविक सफलता है। मुनिश्री ने कहा कि मुनियों का उद्देश्य केवल साधना, स्वाध्याय और आत्मकल्याण है। समाज जब ऐसे आयोजनों में सहभागी बनता है तो उसे धर्म से जुड़ने, प्रेरणा लेने और अपने जीवन में आध्यात्मिक परिवर्तन लाने का अवसर प्राप्त होता है। यही कारण है कि कुंडलपुर में आयोजित यह चातुर्मास कलश स्थापना समारोह पूरे देश में चर्चा और प्रेरणा का विषय बन गया। राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन 'विद्यावाणी' एवं कुंडलपुर तीर्थ क्षेत्र कमेटी के प्रचार मंत्री जयकुमार जैन 'जलज' ने बताया कि चातुर्मास कलश स्थापना समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से हजारों श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर धर्म, गुरु और तीर्थ के प्रति अपनी अटूट आस्था का परिचय दिया। इस अवसर पर नन्हे मंदिर की महिला मंडल दमोह दिव्य घोष निर्यापक मुनि संघ को ज्ञान साधना केंद्र से समारोह स्थल लेकर आया। मंगलाचरण की खूबसूरत प्रस्तुति सेजल जैन दमोह, जिनशरणं महिला मंडल ,कांच मंदिर, श्रीमती सुरभि शुभम मोदी, श्रीमती शिखा रचना कुण्डलपुर, पटेरा पाठशाला के बच्चों द्वारा की गई। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में सिंघई महिला मंडल दमोह, हटा महिला मंडल,कटनी पाठशाला, पथरिया, पटेरा महिला मंडल की मनमोहक प्रस्तुति सराही गई। आचार्य श्री की पूजन में अष्ट द्रव्य अर्घ समर्पित करने में नवकार आदर्श महिला मंडल, नन्हे मंदिर बालिका मंडल,सेठ मंदिर ,जिन शरणं मंदिर ,सदगुवां मंदिर, जबलपुर नाका मंदिर ,वैशाली नगर मंदिर, नेमी नगर मंदिर ,विजयनगर मंदिर, सिंघई मंदिर दमोह, बड़े बाबा महिला मंडल कुण्डलपुर, सुधा कलश मंडल, कांच मंदिर ,भाई जी मंदिर, बड़ा मंदिर ,नसिया मंदिर ,प्रतिभा मंडल पलंदी मंदिर ,चौधरी मंदिर, टंडन बगीचा महिला मंडल, नवयुवक मंडल कुण्डलपुर आदि मंडलों के द्वारा आदीश जैन संगीत मंडल गढ़ाकोटा के संगीत की स्वर लहरियों के बीच अर्घ समर्पित किए गए।कुण्डलपुर तीर्थ क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष चंद्रकुमार जैन सराफ ने कलश स्थापना में पधारे भारतवर्ष की संपूर्ण जैन समाज का आभार प्रकट करते हुये कहा कि आयोजन की सफलता में सभी कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवकों, दानदाताओं और श्रद्धालुओं का समर्पण सराहनीय रहा, जिनके सहयोग से यह समारोह ऐतिहासिक और अविस्मरणीय बन सका।
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अदिति न्यूज,(सतीश लमानिया)
सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर, दमोह