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5 लाख के CCTV घोटाले ने खोली पंचायत की पोल : डिजिटल ग्राम पंचायत के नाम पर खुली लूट, कैमरे बने लटकते कबाड़

Aditi News Team

Thu, Apr 23, 2026

5 लाख के CCTV घोटाले ने खोली पंचायत की पोल: डिजिटल ग्राम पंचायत के नाम पर खुली लूट, कैमरे बने लटकते कबाड़

पंचायत सचिव की घोर उदासीनता, लापरवाही और कथित वित्तीय अनियमितताओं ने चोरों के हौसले किए बुलंद, तिरंगे का भी हुआ अपमान

गाडरवारा। ग्राम पंचायत कौड़िया में “डिजिटल ग्राम पंचायत” और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के नाम पर लगभग 5 लाख रुपये की राशि से लगाए गए CCTV कैमरे अब भ्रष्टाचार, लापरवाही और प्रशासनिक मिलीभगत की जीवित मिसाल बन चुके हैं। पंचायत भवन, मुख्य चौक, गली-मोहल्लों और प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर लगाए गए ये कैमरे आज केवल दीवारों और खंभों पर लटकते डमी शोपीस बनकर रह गए हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत सचिव उत्तम कौरव की घोर उदासीनता, लापरवाही और कथित वित्तीय अनियमितताओं ने इस पूरी योजना को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया। जिन कैमरों के माध्यम से गांव की सुरक्षा, विकास कार्यों की निगरानी, सार्वजनिक पारदर्शिता और असामाजिक गतिविधियों पर रोक लगनी थी, वे आज न तो किसी केबल से जुड़े हैं, न ही किसी टीवी, मॉनिटर, DVR मशीन या रिकॉर्डिंग सिस्टम से संचालित हो रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब लाखों रुपये खर्च कर CCTV लगाए गए, तो उनका संचालन आखिर हुआ कब? क्या यह पूरा मामला केवल कागजों में भुगतान दिखाकर सरकारी राशि के बंदरबांट का सुनियोजित खेल था? पंचायत प्रशासन ने ग्रामीणों को डिजिटल निगरानी और सुरक्षा के बड़े-बड़े सपने दिखाए, लेकिन हकीकत में कैमरे केवल दिखावे के लिए टांग दिए गए।

आज स्थिति यह है कि गांव की सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे है और सरकारी धन का हिसाब जवाबदेही से कोसों दूर। यदि कैमरे वास्तव में चालू होते, तो चोरी, अवैध गतिविधियों, निर्माण कार्यों में गड़बड़ी, शासकीय संपत्तियों की सुरक्षा और पंचायत स्तर पर हो रहे भ्रष्टाचार पर प्रभावी निगरानी रखी जा सकती थी। लेकिन जिम्मेदारों की नीयत ही सवालों के घेरे में है।

मामला यहीं नहीं रुका। पंचायत सचिव की उदासीनता इतनी गंभीर है कि ग्राम पंचायत भवन के सामने स्थित जय स्तंभ पर 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के अवसर पर फहराया गया राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा आज भी फटा, मुड़ा-कुचला और गंदगी से भरा लटकता दिखाई दे रहा है। यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि राष्ट्रध्वज के सम्मान और राष्ट्रीय गौरव का खुला अपमान माना जा रहा है।

जिस तिरंगे के सम्मान के लिए देश के वीर जवान अपने प्राण न्यौछावर कर देते हैं, उसी ध्वज को इस अपमानजनक स्थिति में छोड़ देना प्रशासनिक संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि पंचायत सचिव न तो CCTV व्यवस्था संभाल सके, न ही राष्ट्रध्वज का सम्मान बचा सके।

यह मामला केवल CCTV बंद होने का नहीं, बल्कि सरकारी धन की संभावित बंदरबांट, पंचायत स्तर पर जवाबदेही की हत्या, प्रशासनिक संरक्षण और राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान का गंभीर उदाहरण बन चुका है। लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी यदि कैमरे “मूक गवाह” बनकर लटक रहे हैं और तिरंगा अपमानित अवस्था में पड़ा है, तो यह सीधे-सीधे जनता के विश्वास, सरकारी तंत्र और राष्ट्रसम्मान—तीनों पर चोट है।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, जनपद पंचायत, पंचायत राज संचालनालय और संबंधित जांच एजेंसियों से मांग की है कि इस पूरे CCTV घोटाले, वित्तीय अनियमितताओं और राष्ट्रीय ध्वज के अपमान की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए। यह स्पष्ट किया जाए कि उपकरण खरीदे कब गए, चालू कब हुए, रखरखाव किसने किया और भुगतान किन आधारों पर हुआ।

अब सवाल सिर्फ कैमरों का नहीं, बल्कि पूरे पंचायत तंत्र की नीयत का है—क्या “डिजिटल ग्राम पंचायत” के नाम पर यह सिर्फ एक और सरकारी लूट थी?

ग्रामीणों का सीधा कहना है—

“कैमरे नहीं, भ्रष्टाचार लटक रहा है… और तिरंगे का अपमान इसकी सबसे शर्मनाक तस्वीर है।”

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अदिति न्यूज,(सतीश लमानिया)

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