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करेली- आमगांव रोड पर हरे-भरे फलदार पेड़ों को जिंदा जलाया जा रहा है : बन विभाग की उदासीनता का मामला सामने आया,शासन,प्रशासन की कार्य प्रणाली पर उठे सवाल,कब लगेगी लगाम

Aditi News Team

Thu, Apr 16, 2026

रिपोर्टर भागीरथ तिवारी

करेली- आमगांव रोड पर हरे-भरे फलदार पेड़ों को जिंदा जलाया जा रहा है , बन विभाग उदासीन

शासन,प्रशासन की कार्य प्रणाली पर उठे सवाल,कब लगेगी लगाम

करेली। करेली–आमगांव मार्ग पर करेली वस्ती चौराहे से मोहद के बीच एक चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां सुनियोजित तरीके से हरे-भरे फलदार वृक्षों को आग लगाकर नष्ट किया जा रहा है। इस घटना ने क्षेत्र के पर्यावरण प्रेमियों के साथ साथ भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड से नियुक्त मानद पशु कल्याण प्रतिनिधि ,जी सी सी आई प्रदेश प्रेस मीडिया प्रभारी भागीरथ तिवारी और स्थानीय नागरिकों में गहरी नाराजगी पैदा कर दी है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, सड़क किनारे वर्षों पुराने छायादार पेड़ों को जानबूझकर जलाया जा रहा है, जिससे न केवल हरियाली खत्म हो रही है, बल्कि पर्यावरण संतुलन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह कार्य बिना किसी ठोस कारण के और व्यवस्थित ढंग से किया जा रहा है, जिससे इसकी मंशा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

नागरिकों ने आरोप लगाया कि एक ओर जहां बरसात के मौसम में प्रशासन द्वारा बड़े स्तर पर पौधारोपण अभियान चलाकर हरियाली बढ़ाने का दावा किया जाता है, वहीं दूसरी ओर पहले से मौजूद पेड़ों को बचाने की दिशा में गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। लोगों का कहना है कि “पौधारोपण करो या न करो, कम से कम मौजूदा हरे-भरे वृक्षों को तो सुरक्षित रखा जाए।”

पर्यावरण जानकारों के अनुसार, बड़े पेड़ों को नष्ट करना केवल हरियाली खत्म करना नहीं, बल्कि स्थानीय जलवायु, जैव विविधता और भूजल स्तर पर भी नकारात्मक असर डालता है। ऐसे पेड़ कई वर्षों में तैयार होते हैं और इन्हें बचाना नए पौधे लगाने से कहीं अधिक महत्वपूर्ण होता है।

इस पूरे मामले में प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है, जिससे लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की तत्काल जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और क्षेत्र में बचे हुए पेड़ों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

स्थानीय समाजसेवियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो वे जनआंदोलन करने को मजबूर होंगे। साथ ही, उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि केवल दिखावटी पौधारोपण अभियानों की बजाय वास्तविक संरक्षण पर ध्यान दिया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण सुरक्षित रह सके।

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अदिति न्यूज,(सतीश लमानिया)

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