निर्माण रत बस स्टैंड की गुणवत्ता पर उठ रहे कई सवाल : सांईखेड़ा नगर में 2 करोड़ की लागत से निर्माणाधीन बस स्टैंड के कार्य में कथित तौर पर गुणवत्ता मानकों की हो रही अनदेखी
Aditi News Team
Sat, Sep 12, 2026
साईंखेड़ा नगर परिषद फिर सुर्खियों में, करीब ₹2 करोड़ के बस स्टैंड निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल
साईंखेड़ा। साईंखेड़ा नगर परिषद एक बार फिर निर्माण कार्य को लेकर सवालों के घेरे में है। नगर में करीब ₹2 करोड़ की लागत से निर्माणाधीन बस स्टैंड के कार्य में कथित तौर पर गुणवत्ता मानकों की अनदेखी किए जाने के आरोप सामने आए हैं। मौके पर निर्माण सामग्री और सरिया की स्थिति को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि निर्माण कार्य में कहीं 16 एमएम तो कहीं 12 एमएम सरिया इस्तेमाल किया जा रहा है। आरोप है कि कॉलम पिलर में निर्धारित मानक के अनुसार 16 एमएम सरिया का उपयोग होना था, लेकिन मौके पर अलग-अलग साइज के सरिए दिखाई दे रहे हैं।
वहीं कॉलम पिलर में लगाए जाने वाले रिंग सरिया की दूरी को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि जहां रिंग लगभग 6 सेंटीमीटर की दूरी पर होना बताया जा रहा है, वहां कई स्थानों पर यह दूरी 10 से 12 सेंटीमीटर तक दिखाई दे रही है।

पूर्व में भी कॉलम पिलर को लेकर काफी विवादित रहा था मामला ।।
ग्राउंड बेस की मोटाई पर भी सवाल
निर्माण के ग्राउंड बेस को लेकर भी गंभीर सवाल सामने आए हैं। आरोप है कि जहां करीब 4 सेंटीमीटर का कंक्रीट बेस होना चाहिए, वहां कुछ हिस्सों में केवल 1 से 2 सेंटीमीटर तक कंक्रीट डाले जाने की बात सामने आई है। यदि यह स्थिति तकनीकी जांच में सही पाई जाती है तो निर्माण की मजबूती और टिकाऊपन को लेकर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।
इंजीनियर के निरीक्षण के बावजूद सवाल बरकरार

मौके पर कार्य कर रहे कर्मचारियों के अनुसार निर्माण कार्य का इंजीनियर द्वारा निरीक्षण किया जा चुका है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि निर्माण कार्य वास्तव में निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप है तो मौके पर दिखाई दे रही इन कथित विसंगतियों का कारण क्या है?
क्या निर्माण कार्य की नियमित तकनीकी निगरानी हो रही है? क्या ठेकेदार को निर्धारित डिजाइन और तकनीकी मापदंडों के अनुसार ही निर्माण कराने के निर्देश दिए गए हैं? या फिर जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी के बावजूद निर्माण में गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है?

₹2 करोड़ के प्रोजेक्ट की गुणवत्ता की हो जांच
करीब ₹2 करोड़ की लागत से तैयार हो रहे बस स्टैंड में यदि अभी से गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं तो नगर परिषद को पूरे निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच करानी चाहिए। सरिया की मोटाई, रिंग की दूरी, कंक्रीट बेस, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और मौके पर हुए कार्य का माप एवं तकनीकी स्वीकृति के अनुसार मिलान कराया जाना जरूरी है।
सवाल सीधा है—जनता के पैसे से बन रहा करीब ₹2 करोड़ का बस स्टैंड यदि निर्माण के दौरान ही गुणवत्ता के सवालों में घिर गया है, तो निर्माण पूरा होने के बाद यह कितने समय तक टिकेगा?
वहीं उक्त विषय पर जब सांईखेड़ा सीएमओ रजक का कहना है कि बस स्टेंड का कार्य एक नंबर हो रहा है, यह बात समझ मे नहीं आई कि यदि एक नंबर कार्य हुआ होता तो कार्य के प्रारंभिक दौर मे ही 7 फिट के पिलर के गड्ढे क्यों किए गए थे,जब इसका विरोध हुआ, लोगों ने धरने क्यों दिए थे।
दूसरी बात अब जो कार्य हो रहे हैं पिलर खड़े करने के एवं बेसमेट के जब इन विषयों के संबंध में सीएओ साहब से पूछा तो उनका कहना था कि ये इंजिनियर ही बता पाएंगे। लेकिन जब जाकर ग्राउंड जीरो पर जाकर देखा तो वहां पर कोई भी इंजिनियर एवं नगरपालिका कर्मचारी नहीं पाया गया और न ही ठेकेदार मिला। जहां तन्हा लाखों रु.का लोहा का सरिया बारिश में भींग रहा था क्या जंग लगे इन सरियों का उपयोग बस स्टेंड के निर्माण कार्य में किया जाएगा।

बहरहाल आगे देखना यह है कि उक्त बस स्टेंड निर्माण कार्य की गुणवत्ता जांच जिम्मेदार सही तरीके से कर दोषियों पर कार्यवाही करेंगे की नहीं।
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अदिति न्यूज,(सतीश लमानिया)
नरसिंहपुर कलेक्टर श्रीमती रजनी सिंह
अदिति
जय प्रकाश रजक(सीएमओ) सांईखेड़ा