: न्याय की गली में कुत्तों का दरबार
Sat, Aug 23, 2025
न्याय की गली में कुत्तों का दरबार
( एक सामयिक व्यंग्य - सुशील शर्मा)
अदालत का फैसला आया, तो जैसे गली-मोहल्लों में 'डॉग शो' शुरू हो गया। लोग कहते थे कि न्यायपालिका की आँखें बहुत तेज़ होती हैं, अब समझ में आया कि वे दूरबीन लगा कर देखती हैं। पहले तो आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर में रखने का हुक्म आया। कुत्ता-प्रेमियों ने कहा, "यह तो सीधे-सीधे मानवाधिकारों का हनन है!" और फिर आ गया संशोधन। अब हुक्म हुआ कि पकड़ो, नहलाओ-धुलाओ, टीका लगाओ, बधियाकरण कराओ, और फिर उसी गली में सम्मानपूर्वक छोड़ दो, जहाँ से पकड़े थे। बस इतना ध्यान रहे कि कुत्ता रैबीज वाला न हो। शहर के हर वार्ड में एक 'फीडिंग प्वाइंट' बनाने का आदेश आया, जैसे कोई पंचवर्षीय योजना हो। हमारे मोहल्ले में, 'नगर निगम' के बाबू आए, नाक पर रुमाल रखे। उन्होंने कहा, "यह आदेश सर्वोच्च न्यायालय का है, इसके पालन में कोई कमी नहीं होनी चाहिए।"बाबूजी की बात सुनकर सबने अपनी-अपनी दलीलों का पिटारा खोल दिया। रामू हलवाई ने कहा, "बाबूजी, मेरे पास तो बस एक छोटा सा ढाबा है। मैं तो यहीं रोटी देता था।" बाबूजी ने आँखें तरेरीं, "सुप्रीम कोर्ट ने कहा है, 'सड़क पर नहीं!' अब तुम्हारी गली के हर कुत्ते को तुम खिलाओगे, तो वो तुम्हारे घर का पता पूछेंगे। और फिर अगर किसी ने शिकायत की, तो कानूनी कार्रवाई होगी।" हमारे मोहल्ले के कर्ताधर्ता, श्रीमान चतुर्वेदी जी ने प्रस्ताव रखा कि 'फीडिंग प्वाइंट' श्मशान घाट के पास बनाया जाए। "वहाँ शांति भी रहती है, और कुत्तों को भी अपने भविष्य का पता चलता रहेगा।" लेकिन मोहल्ले की 'पशु अधिकार समिति' की अध्यक्ष, श्रीमती शर्मा जी, ने इसे 'अमानवीय और मानसिक क्रूरता' कहकर खारिज कर दिया। उनके मुताबिक, कुत्तों को शांतिपूर्ण और 'सुंदर' जगह पर खाना मिलना चाहिए, ताकि वे सकारात्मक ऊर्जा से भर सकें।आखिरकार, एक टूटी हुई सरकारी इमारत की जगह को 'फीडिंग प्वाइंट' घोषित किया गया। वहाँ एक बोर्ड लगा, जिस पर लिखा था, "यह क्षेत्र कुत्तों के भोजन के लिए आरक्षित है। सड़क पर खाना खिलाना दंडनीय अपराध है।" बोर्ड के नीचे ही एक कुत्ता आराम से सो रहा था, शायद वो भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पढ़ रहा था। अगले दिन, सुबह-सुबह एक दिलचस्प दृश्य देखने को मिला। गली में एक बूढ़ी महिला, जिसे 'चाची' कहकर पुकारते थे, अपने हाथ में रोटी लेकर जा रही थीं। हमेशा की तरह, एक कुत्ता उनका पीछा कर रहा था। अचानक, पुलिस की गाड़ी आई। पुलिस वाले ने चाची को रोका और पूछा, "मांजी, कहाँ जा रही हो?" चाची ने भोलेपन से कहा, "बेटे, इस बेचारे को रोटी देने जा रही हूँ।"पुलिस वाले ने बड़े ही दार्शनिक अंदाज में कहा, "मांजी, आपके प्यार को सलाम, लेकिन आपकी मोहब्बत ने देश के कानून को खतरे में डाल दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सड़क पर खाना नहीं खिलाना।" चाची ने रोटी फेंकते हुए कहा, "तो क्या इसे भूख से मर जाने दूँ?" पुलिस वाला बोला, "नहीं मांजी, इसे 'फीडिंग प्वाइंट' ले जाओ। वो भी आपकी रोटी का इंतज़ार कर रहा है, और आपका इंतज़ार भी।"*भक्त और विरोधी: कुत्तों का राजनैतिकरण*सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने कुत्तों को भी राजनीतिक बना दिया। एक पक्ष 'डॉग-भक्त' बन गया और दूसरा पक्ष 'डॉग-विरोधी'।डॉग-भक्त कहते थे, "देखो, कोर्ट ने हमारी बात मानी। ये बेचारे जानवर हैं, इन्हें जीने का हक है।" दूसरी ओर डॉग-विरोधियों का तर्क था, "सुप्रीम कोर्ट ने हमारी जान खतरे में डाल दी। 2024 में 37 लाख से ज्यादा लोगों को कुत्तों ने काटा है, क्या ये आकंड़े झूठ बोलते हैं?"एक टीवी डिबेट शो में, दोनों पक्ष भिड़ गए। एक पशु-अधिकार कार्यकर्ता ने कहा, "इंसान खुद आक्रामक हैं, कुत्ते तो सिर्फ अपनी सुरक्षा में काटते हैं।" जवाब में एक वकील ने कहा, "तो क्या हम अपने बच्चों को स्कूल भेजने से पहले उन्हें तलवार चलाना सिखाएँ, ताकि वे गली के कुत्ते से बच सकें?"डिबेट का नतीजा कुछ नहीं निकला, बस टीवी एंकर की आवाज बैठ गई।सरकार ने भी अपना तर्क दिया, "अगर इन कुत्तों को सड़क से हटा दिया गया, तो इनकी आबादी को नियंत्रित कौन करेगा? हम तो बस कोर्ट के आदेश का पालन कर रहे हैं।" लेकिन सच्चाई ये थी कि आदेश के बाद गली के कुत्ते और भी शक्तिशाली हो गए थे। अब वे जानते थे कि उन्हें 'कानूनी सुरक्षा' मिली है। वे सड़क पर चलते हुए लोगों को ऐसे देखते थे, जैसे कह रहे हों, "अब मारो लाठी, देखते हैं तुम्हारी हिम्मत।"*बधियाकरण और टीकाकरण: कुत्तों की नई पहचान*नगर निगम के बाबू अपनी टीम के साथ आए। उनके पास जाल, पिंजरे और कुत्ते पकड़ने वाली विशेष गाड़ी थी। उनके हाथ में एक लिस्ट थी, जिसमें लिखा था, "पकड़ो, बधियाकरण करो, और छोड़ दो।" एक कुत्ता जो अपनी आक्रामकता के लिए पूरे मोहल्ले में मशहूर था, उसे पकड़ते ही बाबू ने कहा, "इसे मत छोड़ना! यह रैबीज से संक्रमित है। इसका 'जीवन भर का कारावास' तय है।"लेकिन उसी कुत्ते का एक छोटा पिल्ला था, जो अक्सर मोहल्ले में घूमता रहता था। लोगों ने देखा कि उसे पकड़ने के बाद उसे टीका लगाया गया, फिर एक छोटे से बैग में बंद कर दिया गया और वापस उसी जगह पर लाकर छोड़ दिया गया। एक बुजुर्ग ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट का हुक्म है, ये अब 'कानूनी कुत्ते' हैं। इन्हें छेड़ना मत, वरना तुम्हें जेल जाना पड़ सकता है।"सबसे दिलचस्प आदेश था 'हेल्पलाइन नंबर'। नगर निगम ने एक नंबर जारी किया, जिस पर लोग कुत्तों के हमलों या 'फीडिंग प्वाइंट' के नियमों के उल्लंघन की शिकायत कर सकते थे। एक दिन हमारे पड़ोस के एक साहब ने फोन किया। उन्होंने शिकायत की, "मेरे घर के सामने एक कुत्ता सो रहा है। वह मुझे बाहर निकलने नहीं दे रहा है।" हेल्पलाइन से जवाब आया, "साहब, अगर वह आक्रामक नहीं है, तो हमें कोई दिक्कत नहीं। और अगर है, तो उसे छेड़िए मत, वरना आप पर ही 'उत्पीड़न' का आरोप लग सकता है।"दंडात्मक कार्रवाई और ‘डोनेशन’न्यायपालिका ने कुत्ता प्रेमियों और एनजीओ के लिए भी एक शर्त रखी। अगर किसी को अदालत में अर्जी दाखिल करनी है, तो उसे पहले सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में एक भारी भरकम राशि जमा करनी होगी। व्यक्ति के लिए 25,000 और एनजीओ के लिए 2 लाख रुपये। इस पैसे का उपयोग कुत्तों के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करने में होगा।एक कुत्ता-प्रेमी ने कहा, "यह तो हमारे अधिकारों पर हमला है।" दूसरे ने कहा, "यह हमला नहीं, बल्कि 'डोनेशन' है। न्याय के लिए भी अब डोनेशन देना पड़ रहा है।"इस आदेश के बाद कई एनजीओ ने अपने नाम बदलकर 'फंड रेजिंग' संस्थाएँ रख लीं। उन्होंने लोगों से अपील की, "अगर आप कुत्तों से प्यार करते हैं, तो हमारे संगठन को पैसे दान करें, ताकि हम कोर्ट में जाकर उनकी लड़ाई लड़ सकें।"कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर कोई व्यक्ति या संस्था इस आदेश के पालन में बाधा डालता है तो उस पर 'लोकसेवक के काम में बाधा' डालने का आरोप लगेगा। इससे तो गलियों में और भी मजेदार स्थिति बन गई। एक दिन एक मोहल्ले वाला कुत्ते से झगड़ रहा था। अचानक पुलिस आ गई। पुलिस ने उससे कहा, "भाई, तुम कानून के खिलाफ जा रहे हो। यह कुत्ता अपना काम कर रहा है। वह यहीं रहता है, और उसका यही 'फीडिंग प्वाइंट' है।"शहरों में अब एक नया पेशा शुरू हो गया है - 'डॉग काउंसलर'। ये लोग कुत्तों को समझाते हैं कि वे कहां रहें, कहाँ खाएँ और किसे काटें। एक काउंसलर ने तो अपनी फीस ही कुत्तों के काटने की संख्या के हिसाब से तय कर रखी थी। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश कोई सामान्य निर्णय नहीं था, बल्कि यह एक सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक क्रांति थी। इस आदेश ने साबित कर दिया कि भारत में अब हर समस्या का हल 'कोर्ट' और 'कानून' ही है। चाहे वह इंसान की हो या जानवर की।आज, हमारे मोहल्ले में सब कुछ बदल गया है। कुत्तों के लिए 'फीडिंग प्वाइंट' बन गए हैं, और हम इंसान अब सड़कों पर चलते हुए अपने कदमों को संभाल कर रखते हैं। कभी-कभी हमें लगता है कि हम अब 'आज़ाद' नहीं रहे, बल्कि एक ऐसे 'कानूनी' समाज में रहते हैं, जहाँ जानवरों को भी अपने अधिकार पता हैं।शायद सुप्रीम कोर्ट का असली मकसद यही था कि जब देश में इतनी महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार हो, तो लोगों का ध्यान किसी और चीज पर केंद्रित हो। और इस बार यह ध्यान 'कुत्तों पर' केंद्रित हो गया।अब तो बस एक ही सवाल है कि क्या सुप्रीम कोर्ट को अपने अगले आदेश में, कुत्तों के लिए एक 'आधार कार्ड' और 'वोटर आईडी' भी जारी करना चाहिए? ताकि उन्हें भी पता चले कि वे इस देश के 'कानूनी' नागरिक हैं, और उनके भी कुछ अधिकार हैं। सुशील शर्मा
: गांव की पगडंडियों पर जो सुकून है, वो शहर की गलियों में कहां” छिंदवाड़ा बना मध्यप्रदेश का नया टूरिज्म हॉट स्पॉट
Fri, Aug 22, 2025
गांव की पगडंडियों पर जो सुकून है, वो शहर की गलियों में कहां”
छिंदवाड़ा बना मध्यप्रदेश का नया टूरिज्म हॉट स्पॉट
सतपुड़ा की वादियों में बसे छिंदवाड़ा जिले के पर्यटन-ग्राम अब पर्यटकों के लिये विशेष आकर्षण बन गये हैं। ग्रामीण जीवन, जनजातीय संस्कृति, पहाड़ी ट्रैकिंग और लोक नृत्य सब कुछ एक ही जगह पर्यटकों को मिल रहा है। पिछले 2 वर्षों में यहां बनाये गये होम-स्टे को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की पहचान मिली है। मध्यप्रदेश में होम-स्टे के माध्यम से पर्यटकों को ग्रामीण संस्कृति तथा ग्रामीण जीवन के अनुभव कराने के उद्देश्य से ग्रामीण पर्यटन परियोजना का संचालन किया जा रहा है। इसके तहत प्रदेश के 100 गांवों को पर्यटन ग्राम के रूप में विकसित किया जा रहा है। होम-स्टे से रूका पलायन मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा विकसित किये गये छिंदवाड़ा जिले के पर्यटन ग्रामों के होम-स्टे देश-प्रदेश के पर्यटकों को खूब भा रहे हैं। हर सप्ताह यहां हजारों की संख्या में सैलानी पहुंच रहे हैं। जिले के 12 गांवों को पर्यटन ग्राम के रूप में चयनित किया गया है। इनमें से 7 गांव सावरवानी, देवगढ़, काजरा, गुमतरा, चोपना, चिमटीपुर और धूसावानी में 36 होम-स्टे पर्यटकों के लिये खोले जा चुके हैं। होम-स्टे खुलने से ग्रामीण रोजगार और उच्च शिक्षा का रूझान बढ़ा है। साथ ही जनजातीय परिवारों का पलायन भी रूक गया है। गांव के युवा गाइड के रूप, लोक नृत्य और भजन मंडली की प्रस्तुति और बैलगाड़ी संचालन से सैलानियों को ग्रामीण जन-जीवन से अवगत कराते हुए अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रहे हैं। हर पर्यटन ग्राम की अपनी पहचान छिंदवाड़ा जिले के हर पर्यटन ग्राम की अपनी विशेषता है। भोपाल मार्ग पर साल के जंगल के बीच बसे चोपना में देवना नदी का अद्भुत नजारा, पातालकोट के चिमटीपुर गांव की रहस्यमयी वादियां, पेंच नेशनल पार्क के करीब ऑफबीट डेस्टीनेशन गुमतारा, देवगढ़ में गोंड शासन का ऐतिहासिक किला, काजरा में बंधान डेम के बेकवॉटर्स का सौंदर्य और धूसावानी गांव के चौरागढ़ महादेव मंदिर का दृश्य और आम के बागान पर्यटकों को यहां बार-बार आने के लिये प्रेरित करते हैं। होम-स्टे में पर्यटक गाय का दूध दोहने, खेत के कामों में हाथ बटाने और पहाड़ियों पर ट्रैकिंग करने जैसे अनुभव जीते हैं। ढोलक-मंजीरे के साथ भजन और कर्मा नृत्य मंडलियों की प्रस्तुति भी पर्यटकों को आकर्षित कर रही है। अब छिंदवाड़ा सिर्फ पर्यटन नहीं बल्कि सतत ग्रामीण विकास का राष्ट्रीय मॉडल बन रहा है।
: मध्यप्रदेश को बना रहे हैं देश का नया फूड बॉस्केट : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
Fri, Aug 22, 2025
मध्यप्रदेश को बना रहे हैं देश का नया फूड बॉस्केट : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना का शुभारंभ मध्यप्रदेश से हुआ
धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन में हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, हैल्थ टूरिज्म पर भी हमारा फोकस
एयर कनेक्टिविटी बढ़ाने में नई एविएशन पॉलिसी से मिल रही मदद
भोपाल के बाद हम जबलपुर और ग्वालियर में भी मेट्रो रेल चलाने के लिए आगे बढ़ेंगे
प्रदेश में औद्योगिक विस्तार के लिए निवेशकों को दे रहे हैं इंसेंटिव्स
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि बीते 20 सालों में मध्यप्रदेश का परिदृश्य बड़ी तेजी से बदला है। हम मध्यप्रदेश को देश का 'मॉडल स्टेट' बनाने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं। हमारी सरकार मध्यप्रदेश को देश का 'न्यू फूड बॉस्केट' बनाने के लिए तेजी से प्रयत्नशील हैं। हमारे अन्नदाता किसानों की मेहनत से प्रदेश के अनाज भंडार अन्न से भरे पड़े हैं। मध्यप्रदेश वह प्रदेश है, जहां तेजी से जिलों में मैडिकल कॉलेज खुल रहे हैं। हमारी सरकार पीपीपी मॉडल पर मैडिकल कॉलेज खोलने के लिए निवेशकों को मात्र एक रूपए में 25 एकड़ जमीन और 10 साल के लिए अपना जिला-संभागीय अस्पताल भी देने को तैयार है। निवेशक मेडिकल कॉलेज के लिए जब अपना खुद का अस्पताल तैयार कर लेंगे, तब 10 साल बाद हम अपना जिला चिकित्सालय उनसे वापस ले लेंगे। यह निवेशकों को सरकार की ओर से दोहरी मदद है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को नई दिल्ली में एक निजी मीडिया समूह द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश में राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना का शुभारंभ मध्यप्रदेश से हुआ। करीब एक लाख करोड़ रूपए की केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना से बुंदेलखंड के सारे जिले और लगभग 70 हजार करोड़ रूपए लागत की पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजना से मालवा और चंबल के सभी जिलों में सिंचाई और पेयजल की स्थाई सुविधा उपलब्ध कराएंगे।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हम आगे बढ़ रहे हैं। सिंहस्थ-2028 की तैयारी पूरे जोर-शोर से जारी है। श्रीमहाकाल लोक बनने के बाद उज्जैन की तस्वीर ही बदल गई है। उज्जैन शहर की आबादी फिलहाल 7 लाख है, पर अब देश-विदेश से हर साल 7 करोड़ से भी अधिक श्रद्धालु श्रीमहाकाल बाबा और श्रीमहाकाल लोक के दर्शन के लिए उज्जैन आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि श्री महाकाल लोक बनने के बाद उज्जैन शहर में ही 200 से अधिक होटल खुल गये हैं, इससे शहर और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी गति मिली है। उज्जैन में मेडिकल डिवाइस पार्क के लिए एक हजार एकड़ जमीन भी पूरी उपयोग में आ गई, इसलिए अब हम एक हजार एकड़ जमीन का लैण्ड बैंक पुन: आरक्षित कर रहे हैं।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एयर कनेक्टिविटी पर हमारा पूरा फोकस है। हम मध्यप्रदेश में नई एविएशन पॉलिसी लेकर आए हैं। इस पॉलिसी के अंतर्गत हमारे खुद के प्लेन प्रदेश में शुरू करने के लिए इंसेंटिव भी दिए जा रहे हैं। गंभीर रोग के इलाज के लिए बड़े शहर जाने की आवश्यकता पड़ने पर हम समर्थ को सशुल्क और आयुष्मान कार्डधारियों को नि:शुल्क एयर एम्बुलेंस उपलब्ध करा रहे हैं। इनके लिए हमारी हेलीकॉप्टर सेवा भी जारी है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश को आदर्श राज्य के रूप में स्थापित करना चाहते हैं। मानवता के विकास के लिए सड़क हादसे के घायलों की सहायता के लिए राहवीर योजना के तहत मददगार व्यक्ति को 25 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार मध्यप्रदेश में शहरीकरण को बढ़ावा दे रही है। इंदौर मेट्रो की शुरूआत के बाद भोपाल मेट्रो पर काम तेजी से चल रहा है। इसके बाद हम जबलपुर और ग्वालियर शहर में भी मेट्रो ट्रेन चलाने के लिए आगे बढ़ेंगे। इंदौर और भोपाल में मेट्रोपोलिटन सिटी एरिया बनाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में निवेश करने के लिए हमारी सरकार निवेशकों को तरह-तरह के इंसेंटिव दे रही है। यही कारण है कि फरवरी 2025 में भोपाल में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में मध्यप्रदेश सरकार को 30.77 लाख करोड़ रूपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि हम हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं। उज्जैन में इलेक्ट्रानिक्स क्लस्टर भी तैयार किया जा रहा है। प्रदेश में नए उद्योगों की स्थापना पर हमारा पूरा फोकस है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की वित्तीय स्थिति मजबूत है। इसे और मजबूत करने के लिए बजट को डबल करने की योजना है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुसार महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। श्रम कानूनों में सुधार किया गया है। देश में सर्वाधिक तीव्र गति से खर्च करने में राज्य देश के तीन राज्यों में से एक है। देश को आत्मनिर्भर बनाने में मध्यप्रदेश अपना योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा कि मेरे कार्यकाल में देश में नई शिक्षा नीति लागू करने में मध्यप्रदेश प्रथम रहा है। हमने टूरिज्म में अवॉर्ड जीते और शासकीय संस्थाओं को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया है।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश में सबसे अधिक सस्ती बिजली म.प्र. द्वारा प्रदान की जा रही है। वर्ष 2003 से बाद राज्य ने अपनी विशेष पहचान स्थापित की है। देश में सर्वाधिक सिंचित भूमि राज्य में है। हम प्रदेश में उत्पादित अनाज की फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की ओर भी आगे बढ़ रहे है।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का हृदय प्रदेश है। मध्यप्रदेश नदियों का मायका भी है। यहां से 247 से अधिक नदियां निकलती हैं। प्रदेश में जंगल, पर्यटन, खनिज और धार्मिक पर्यटन की अपार क्षमताएं हैं। राज्य सरकार अब हैल्थ टूरिज्म पर भी कार्य कर रही है। राज्य ने 66 हजार करोड़ का निर्यात किया है, मध्यप्रदेश की ग्रोथ 6 प्रतिशत रही है। ये हमारी क्षमता का प्रमाण है।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भोपाल में पहली बार इसी साल फरवरी में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट आयोजित की गई। लेकिन सरकार बनने के बाद हमने प्रदेश के विभिन्न शहरों में क्षेत्र की क्षमताओं के अनुरूप रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित की। प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों से उद्योग घरानों को जोड़ा जा रहा है। राज्य में खनिज के भंडार हैं। उद्योग स्थापित करने के लिए पर्याप्त लैंड बैंक उपलब्ध है। प्रदेश में पानी पर्याप्त है। मध्यप्रदेश के पास बिजली क्षमता सरप्लस है। पहले उद्योग शुरू करने के लिए 29 प्रकार की अनुमतियां लेनी पड़ती थीं, अब उन्हें घटाकर 10 कर दिया गया है। निवेशकों को उद्योग प्रोस्साहन का लाभ दिया जा रहा है। प्रदेश में रोजगार आधारित उद्योग लगाने पर प्रति श्रमिक 5000 हजार की सहायता 10 साल के लिए दी जा रही है। भारी उद्योग और एमएसएमई को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने उद्योग केन्द्रित 18 नई नीतियां लागू की हैं। इसके अंतर्गत अलग-अलग कमेटी गठित की गई हैं। उद्योगपतियों के प्रस्तावों की गंभीरता को देखते हुए उन्हें बिजली, पानी और भूमि आवंटन में छूट देते हैं। प्रदेश सरकार ने एक साल में 285 उद्योगों को भूमि आवंटन की है। मैट्रो कोच निर्माण फैक्ट्री के लिए बीईएमएल को लैंड आवंटित करने के बाद उसका भूमिपूजन भी हो गया है। सभी सेक्टर्स में सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से सरलीकृत व्यवस्था लागू है। उद्योगपरक कार्यों को अमलीजामा पहनाने के लिए हमें सिर्फ 15 महीने मिले। इसमें से तीन महीने सरकार ने उद्योगों को बढ़ाने के लिए कार्य किया है।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने इस वर्ष 4 लाख करोड़ से अधिक का बजट पेश किया है और इसे 5 साल में दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है। हर साल बजट को लगभग 15 प्रतिशत की दर से बढ़ाएंगे। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विजन के आधार पर लाड़ली बहना योजना को राशि दी जा रही है। अगर लाड़ली बहन रोजगार परक उद्योग में कार्य करती है तो उसे 1500 रुपए की मासिक सहायता के साथ वेतन में 5000 रुपए प्रोत्साहन अलग से प्रदान किया जा रहा है। सरकार ने श्रम कानून में जरूरी बदलाव किए हैं। बहनें भी अब नाइट शिफ्ट में काम कर सकती हैं। काम के घंटे और छुट्टियों में संशोधन किए गए हैं। वित्तीय व्यवस्था के लिए राज्य को 3 प्रतिशत की लिमिट मिली है और इसी सीमा के अंदर सारे काम किए जा रहे हैं। यह हमारी स्वयं की पूंजीगत व्यय की क्षमता है। वर्तमान में देश में सिर्फ 3 राज्य- मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तरप्रदेश हैं, जिनकी ग्रोथ तेज गति से हुई है।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी की मंशा है कि हमारा देश स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग की राह पर चलते हुए आत्मनिर्भर बने। मध्यप्रदेश केन्द्र सरकार के साथ पूरी ताकत से सहयोगी बन रहा है। हम गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार करेंगे। मध्यप्रदेश में उच्च शिक्षा मंत्री रहते हुए देश में सबसे पहले नई शिक्षा नीति लागू की। पर्यटन कॉरपोरेशन और अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी का चेयरमैन रहते हुए विकास कार्यों को आगे बढ़ाया और न्यूनतम खर्च में अधिकतम कार्य करके दिखाया।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में बिजली सरप्लस है। दिल्ली की मैट्रो हमारी बिजली से भी चलती है। राज्य सरकार मेहनत कर रही है। सभी सैक्टर्स में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। मध्यप्रदेश की ग्रोथ पहले थोड़ी चुनौतीपूर्ण रही है पर अब हम तेजी से आग्र बढ़ रहे है। वित्त वर्ष 2002-03 के बाद मध्यप्रदेश ने अपनी नई पहचान बनाई है। अब हम सभी सैक्टर्स में कई गुना आगे बढ़ रहे हैं। देश के 10 अग्रणी राज्यों में मध्यप्रदेश शामिल हो चुका है। मध्यप्रदेश के पास सबसे अधिक सिंचित क्षेत्र है।