: गाडरवारा,रोटरी क्लब द्वारा प्रतिभा सम्मान समारोह कार्यक्रम संपन्न
Sun, Jun 30, 2024
रोटरी क्लब ऑफ,गाडरवारा द्वारा प्रतिभा सम्मान समारोह कार्यक्रम संपन्न!
गाडरवारा! रोटरी क्लब का गाडरवारा द्वारा नगर के तत्वाधान में क्षेत्र की उभरती प्रतिभाओं के प्रोत्साहन के भावों को सजाकर प्रतिभा सम्मान कार्यक्रम किया गया एवं रोटरी क्लब का एक वर्षीय कार्यकाल की पूर्णता व नवगठित इकाई का सम्मान समारोह कार्यक्रम नगर के सुखदेव भवन परिसर में संपन्न हुआ!कार्यक्रम में सर्वप्रथम मां सरस्वती जी के छायाचित्र पर मुख्य अतिथियों द्वारा माल्यार्पण कर दीप प्रचलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई! मुख्य अतिथि का सम्मान क्लब के वरिष्ठ सदस्य व रोटेरियन साथियों द्वारा किया गया! एवं आमंत्रित प्रतिभाओं का सम्मान मुख्य अतिथि के माध्यम से किया गया! मुख्य अतिथियों का सम्मान शाल,श्रीफल,माला एवं पुष्प कुच्छ के द्वारा किया गया! व नगर की प्रतिभाओं का सम्मान प्रशस्ति पत्र,शाल,श्रीफल,पुष्प कुछ,माल्यार्पण व मोमेंटो से किया गया!क्लब के द्वारा लगभग नगर की 12 प्रतिभाओं का सम्मान उनके उच्चतम कार्य के लिए किया गया! जिसमें श्री गनेश जी ठाकुर (ए.आई.जी भोपाल) डॉ.श्री परिमल स्वामी(जबलपुर)श्री विशाल ठाकुर(राम रोटी) व उनकी टीम,कु.प्रियंका दुबे (गायिका) कु. रिचा वर्मा( मलखम) श्री शिवांश सोनी (तबला वादक इंदौर) श्री शिरीष खमरिया (कला मुंबई) श्री सुशील (शर्मा साहित्य),श्री अरुण तिवारी(कलामुंबई),श्री राजारामजी दुबे (लोक गायक) श्री के. एल.धानक(पर्यावरण),एवं पांच सदस्यों का रोटरी के सहयोगी के रूप में भी सम्मान किया गया! जिसमें डॉ.श्री महेश रघुवंशी,श्री राजेश शर्मा(गुट्टी) श्री रमाकांत जी गुप्ता,श्री वीरेंद्र खत्री,श्री राजेश तिवारी,श्रीअजय घारू,जैन महिला मंडल,श्री विजय नामदेव,आदि लोगों का सम्मान किया गया! मुख्य अतिथि आदरणीय श्री रोटे. विवेक कृष्ण तंखा, श्री बलदीप सिंग मैनी, नगर पालिका अध्यक्ष श्री शिवाकांत मिश्रा, श्री कौशलेंद्र श्रीवास्तव,श्री मिनेंद्र डागा, रोटरी क्लब अध्यक्ष श्री सुनील श्रीवास्तव व सचिव सुरेंद्र साहू जी की अध्यक्षता में कार्यक्रम किया गया!मुख्य अतिथि रोटे.श्री विवेक कृष्ण ताखा जी ने में बताया कि रोटरी हमेशा से समाज सेवा का भाव रखती है व रोटरी की प्रत्येक सदस्य के अंदर समाज सेवा का भाव होता है!और अनेको उदारण उन्होने समाज सेवा के कार्यक्रम के दौरान बतलाएं व गाडरवारा शासकीय अस्पताल में एक जनरेटर एक रेफ्रिजरेटर व एक!डायलिसिस मशीन की सौगात दी! श्री बलदीप सिंह मैनी जी द्वारा बतलाया गया! की रोटरी क्लब गाडरवारा हमेशा से मानव सेवा के लिए तत्पर रहता है और हर संभव मदद पीड़ित व्यक्ति तक पहुंचने में सक्षम है! नगर पालिका अध्यक्ष शिवाकांत मिश्रा जी ने भी बताया कि गाडरवारा नगर में रोटरी क्लब द्वारा अनेकों कार्य किए गए हैं जिसकी वातावरण नगर में भूरी भूरी प्रशंसा होती रहती है! रोटरी क्लब असिस्टेंट गवर्नर श्री मिनेंद्र डागा जी द्वारा बताया गया कि लाखों रुपए की सौगात के कार्य क्लब द्वारा नगर के लिए किए गए हैं! क्लब अध्यक्ष श्री सुनील श्रीवास्तव जी द्वारा सभी रोटेरियन साथियों को धन्यवाद देते हुए क्लब के कार्यों की विवेचना की गई!सचिव श्री सुरेंद्र साहू जी द्वारा सभी का आभार व्यक्त करते हुए,सफल कार्यक्रम के लिए सभी को बधाई दी गई! रोटरी क्लब के सेवा कार्यों से प्रभावित होकर से नगर के सदस्यों ने रोटरी की सदस्यता प्राप्त की जिसमें श्री राव उदय प्रताप सिंह (मंत्री मध्य प्रदेश शासन)श्री कांत राठी(सी.ए),डॉ.श्रीराकेश बोहरे(सी.एम.ओ),श्री अखलेश दुबे(वरिष्ठ शिक्षक)कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए पवन स्टूडियो का विशेष सहयोग रहा एवं क्लब द्वारा उन्हें व उनकी टीम को सम्मानित किया गया!कार्यक्रम का संचालन प्रियंक सोनी व सह संचालन श्री विजय बेशर्म,नीलेश साहू,शुभम राजपूत,अमित पटेल,प्रतिक साहू हो द्वारा किया गया! कार्यक्रम में रोटरी क्लब के वरिष्ठ सदस्य रोटे.डॉ. उमाशंकर जी दुबे,श्री राजीव जैन, डॉ. रामकुमार चौकसे,श्री आशोक राजपुत,श्री अरुण तिवारी,श्री अनिल वालिया,श्री मनोजराय,श्री राजेश गुप्ता,श्री रामाकांत गुप्ता,श्री मनोज वसा,श्री मनीष जयसवाल,श्री संजय गुप्ता,श्री रतनदीप जयसवाल,श्री बी.पी. त्रिपाठी,श्री जवाहर शर्मा,श्री डी.के.उपाध्यक्ष,श्रीअरविन्द राधुवंशी,श्री विवेक त्रिपाठी,श्री अभिषेक बड़कुर,श्री मनोजकोचर,श्री उत्सव गुप्ता,श्री यागेश तिवारी,श्री अमित पटेल,श्री नीलेश साहू,श्री प्रतिक साहू,श्री प्रियंक सोनी,श्री शुभम् ठाकुर,श्री अक्षय जैन,गाडरवारा नगर के सभी गणमान्य नागरिक, समाजसेवी संस्थाएं,रोटरी क्लब सदस्य आदि लोग उपस्थित रहे! उपरोक्त जानकारी रोटरी क्लब मीडिया प्रभारी नीलेश साहू द्वारा दी गई!
: Kalki 2898 AD फ़िल्म समीक्षा
Sun, Jun 30, 2024
हर्षित शर्मा
Kalki 2898 AD फ़िल्म समीक्षा
डायरेक्टर नाग अश्विन द्वारा निर्देशित 600 करोड़ की यह फ़िल्म किसी भी मायने में हॉलीवुड की फ़िल्म से कम नहीं है । पुराणों के तथ्यों को गहन अध्ययन के बाद भविष्य के काल खंड से जोड़कर जिस तरह से दिखाया जा रहा है यह अपने आप मे अनोख है ।900 साल बाद प्रथ्वी पर जब गंगा में एक बूंद पानी नहीं बचेगा तब के हालातों को दर्शाया गया है ।।बिना जल के भविष्य की काशी ,और अदृश्य चमत्कारों से भरे शहर संभाला जहाँ होगा कल्कि अवतार का जन्म उसे भी काफी हद तक बेहतरीन बारीकी से दिखाया गया ।अश्वत्थामा के किरदार को शायद जी अमिताभ बच्चन से बेहतर इस दुनिया मे निभा सकता था ।उनके पर्दे पर आते ही पूरा हॉल जोरदार तालियों और सीटियों से गूंज उठता है। जिस तरह रामानंद सागर की रामायण में हनुमान के किरदार में दारा सिंह अमर हो गए यह कहना गलत नहीं होगा कि यह पीढ़ी अश्वत्थामा का नाम जब भी सुनेगी अमिताभ बच्चन का 8 फुट का किरदार उनकी आंखों के सामने होगा ।।फ़िल्म के मुख्य पात्र भैरव जिसमें सुपरस्टार प्रभास ने शानदार अभिनय किया है शुरुआत में उनका किरदार मार्वल की गार्डियन ऑफ था गैलेक्सी के स्टार लार्ड की तरह मस्त मौला समझ आता है पर इंटरवल के बाद असली जान आती है उनके किरदार में।। सुप्रीम यसकिन के चंद मिनट के अपने पात्र में ही कमल हसन ने बता दिया क्यों वह मेगा स्टार है ।। बंगाली अभिनेता शाश्वत चटर्जी "मानस" के किरदार के साथ बखूभी इंसाफ करते नज़र आए । वही दीपिका पादुकोण ने सुमती का किरदार में उम्दा काम किया।डायरेक्टर नाग अश्विन की रिसर्च को पर्दे पर देखा जा सकता है । Kalki सिनेमेटिव यूनिवर्स की शुरूआत इस फ़िल्म के साथ हो चुकी है आने वाले समय मे इस कहानी को और आगे बढ़ाया जाएगा ।। मल्टी स्टार से भरी इस फ़िल्म में कई और कलाकरों की छोटी छोटी झलक बीच बीच मे आपको दिखेगी । माइथोलॉजी , फिक्शन, एक्शन, ड्रामा, इमोशन सब कुछ का निचोड़ है यह 600 करोड़ की फ़िल्म ।अंत मे यही कहूंगा आदिपुरुष वाले ओम राउत को इस फ़िल्म से सीखने के लिए बहुत कुछ है ।।अगर आपने नही देखी तो जरूर जाइये क्योंकि यह फ़िल्म भारतीय सिनेमा को अगले स्तर पर पहुँचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।।
: कर्मों का आश्रव निरंतर होता रहता है,आचार्य श्री समयसागर जी महाराज
Sat, Jun 29, 2024
कर्मों का आश्रव निरंतर होता रहता है,आचार्य श्री समयसागर जी महाराज
कुंडलपुर दमोह ।सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा शरीर में कर्म के उदय से व्याधि आ जाती है और उस रोग व्याधि का निष्कासन भी औषधि उपचार के माध्यम से हो जाता है। निष्कासन महत्वपूर्ण नहीं है बहुत जल्दी रोग से मुक्त हो सकता है किंतु रोग जो आया है वह किस द्वार से आया है उसका परीक्षण हमें करना है ।नहीं तो बार-बार व्याधि होती है और औषधि लेते हैं। क्योंकि औषधी दान का प्रावधान तो है ही आगम में हम दवाई लेते चले जाएंगे किंतु रोग का निष्कासन इसलिए नहीं होगा। जिस द्वार से रोग का प्रवेश हो रहा है उस द्वार को बंद नहीं कर पा रहे हैं ।दवाई बिल्कुल अच्छी क्वालिटी की है डॉक्टर भी अच्छा है दवाई भी राम बाण है किंतु पथ्य का पालन होना भी उसके साथ होना आवश्यक है। परहेज नहीं रखेंगे तो रोग बढ़ेगा ।औषधि के द्वारा रोग बढ़ रहा है ऐसा नहीं है वह आहार के द्वारा ही रोग आया है आहार के अलावा और बहुत सारे निमित्त हो सकते हैं। निमित्तों की ओर ध्यान देने की आवश्यकता है ।उसी प्रकार मोक्ष मार्ग में भी कर्मों का आश्रव निरंतर होता रहता है।किंतु वह आश्रव अपने आप नहीं होता अपने आप आश्रव नहीं होता अपने आप बंध नहीं होता है ।यदि अपने आप आश्रव हो जाता तो अपने आप ही आश्रव का रोकना भी हो जाएगा ।आश्रव निर्जरा संवरा ऐसा सूत्र बनाने की क्या आवश्यकता ।आश्रव होता बुद्धि पूर्वक भी होता है अबुद्धि पूर्वक भी आश्रव होता है। अबुद्धि पूर्वक जो आश्रव है उसको रोकने का प्रावधान अलग है उसको पुरुषार्थ के माध्यम से नहीं रोका जाता वह ऑटोमेटिक रुकता है कब रुकता है कहां रुकता है इसकी चर्चा हम बाद में करेंगे ।अभी बुद्धि पूर्वक जो आश्रव हो रहा है या बंध हो रहा है उस बंध की परंपरा को रोकना है ।तो बंध जो हो रहा है वह बिना हेतु के संभव नहीं है। बिना हेतु के बंध हो जाए तो आचार्य उमा स्वामी महाराज अष्टम अध्याय में प्रथम सूत्र दे रहे हैं उसकी कोई आवश्यकता नहीं। बिना कारण के बंध होता नहीं तो पहले कारण की ओर ध्यान देने की आवश्यकता है। तो शुभ और अशुभ आश्रव होता है अथवा पुण्य और पाप का आश्रव होता है तो उसके लिए मन वचन काय की कुछ ऐसी चेष्टाएं हैं जिनसे पाप का आश्रव होता है ।और ठीक इसके विपरीत आत्मगत कुछ उज्ज्वल कुछ आत्मगत परिणाम होते हैं पवित्र परिणाम होते हैं जिनके फलस्वरूप पुण्य का भी आश्रव होता है तो क्रम है। गुरुदेव का यह कहना है कि कर्म का जो आश्रव होता है उसकी निर्जरा हमें करनी है। किंतु क्रम से निर्जरा होगी पाप कर्म की निर्जरा ओर पुण्य कर्म की निर्जरा इसमें क्रम है। पाप पहले मिटता है ।पाप प्रथम मिटता प्रथम तजो पुण्य फल भोग। पुनः पुण्य मिटता धरो आत्म निर्मल योग ।यह दोहा गुरुदेव ने सामने रखा है पाप प्रथम मिटता पाप का बंध हुआ है तो पाप पहले क्षय होगा पुण्य बाद में क्षय होगा ।मोक्ष मार्ग में पुण्य बाधक नहीं है ।कुछ लोगों की धारणा हो सकती है। स्वाध्याय शील होते हुए भी इस विषय में वह अनभिज्ञ रहे हैं उन्हें ज्ञात कर लेना चाहिए कि पाप का क्षय और पुण्य का क्षय करना है पाप और पुण्य यह दोनों इक्वल हैं दोनों समान है ।कहा भी है आगम में कुंदकुंद देव ने कहा चाहे लोहे की बेड़ी हो चाहे स्वर्ण की बेड़ी हो बेड़ी तो बेड़ी है ।बंधन तो बंधन है बंधन किसको ईस्ट है संसार से मुक्त होना चाहता है प्रत्येक संसारी प्राणी हम बंधन से मुक्त होना चाहते महाराज इसलिए चाहे पाप हो चाहे पुण्य हो दोनों को एक तराजू में तोल लेते हैं वह ठीक नहीं माना जाता ।पुण्य और पाप दोनों बेड़ी तो हैं जो संसार में प्रवेश करता है वह सुशील कैसे हो सकता है ।यह कहा कुंद कुंद स्वामी ने उस गाथा को आप लेकर बैठ गए।