: बाल सभा कार्यक्रम का आयोजन
Sat, Jun 22, 2024
बाल सभा कार्यक्रम का आयोजन
शासकीय माध्यमिक शाला स्टेशन गंज गाडरवारा में प्रति शनिवार की भांति इस शनिवार को भी शैक्षिक सत्र 2024 25 की प्रथम बाल सभा का आयोजन किया गया जिसमें सभी छात्र छात्राओं एवं शिक्षकों ने हिस्सा लिया बालसभा में विषय मौसम परिवर्तन एवं सावधानियां वर्ष पूर्व तैयारी एवं बचाव पर छात्र छात्राओं एवं शिक्षकों ने अपने विचार व्यक्त किया अधिकांश बच्चों ने कहा अत्यधिक वर्षा और तेज हवा में हमें सुरक्षित स्थान पर रुक जाना चाहिए और पेड़ों के नीचे खड़े नहीं होना चाहिए शाला के प्रधान पाठक विनोद कुमार सोनी एवं श्रीमती चंद्रिका कौरव अनीता सोनी रीता अग्रवाल श्रीमती ज्योति द्विवेदी मनोरमा ढीमोले कुसुम भार्गव राजेश ठाकुर श्री राजेश ठाकुर ने भी मौसम परिवर्तन और सुरक्षा स्वच्छता पर अपनी विचार व्यक्त किया ।
: जो छोड़ने की इच्छा रखता है उसका नाम मुमुक्षु है,आचार्य श्री समयसागर जी महाराज
Sat, Jun 22, 2024
जो छोड़ने की इच्छा रखता है उसका नाम मुमुक्षु है,आचार्य श्री समयसागर जी महाराज
कुंडलपुर दमोह ।सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य विद्या शिरोमणि पूज्य आचार्य श्री समयसागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा एक चुंबकीय तत्व है जो कि वह लोह तत्व को अपनी ओर आकर्षित करता है दोनों का संबंध हो जाता है इसी प्रकार आत्मगत कुछ ऐसे परिणाम है जिन परिणाम के माध्यम से कर्मों का भी संबंध हुआ करता है। कर्म दिखाई नहीं देते पर विश्वास का विषय बनता है ।आत्मगत परिणाम भी देखने में नहीं आते और वह कर्म भी देखने में नहीं आता किंतु उन दोनों का संबंध हो जाता है ।और यह संबंध हुआ नहीं अनादि काल से इसका संबंध है ।शरीर अंग का और जीव इन दोनों का अपने आप में संबंध अनादिकालीन है ।उस संबंध को तोड़ने के लिए यह मोक्ष पुरुषार्थ किया जा रहा है ।और जो छोड़ने की इच्छा रखता है उसका नाम मुमुक्षु ऐसा कहा है जो छोड़ने की इच्छा रखता है उसका नाम मुमुक्षु है और जो जोड़ने की इच्छा रखता उसका नाम भुभुक्षु है। भोगने की इच्छा रखता है पर वस्तु के साथ संबंध रखने की इच्छा रखता उसका नाम भुभुक्षु है। आपको क्या बनना है मुमुक्षु या भुभुक्षु जहां से आए हैं नहीं लौटेंगे तो भुभुक्षु कहलाएंगे। लौटना तो है क्लियर कट है आप रहली पटनागंज से आए कोई कोलकाता से बड़ी दूर-दूर से आए कोई सतना से ।गुरुदेव सतना गए पहली बार प्रवेश किया प्रवचन में कहा सत ना सत नहीं है नश्वर है क्षेत्र की अपेक्षा है संबंध जोड़ने द्रव्य की अपेक्षा से संबंध जोड़ दे रहा काल की अपेक्षा से संबंध जोड़ देता है। काल के साथ कैसा संबंध जोड़ता महाराज आज मेरा जन्मदिन है अवतरण दिवस है शब्द बदल गए बात वही है महाराज जन्मदिवस का निषेध करते हैं जन्म शब्द को हटाकर अवतरण दिवस काल के साथ भी संबंध जोड़ देता है और क्षेत्र के साथ भी संबंध जोड़ देता है। जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीश्यते कहा जननी अर्थात मां जन्मभूमि जहां जन्म हुआ यह दोनों स्वर्ग से भी श्रेष्ठ हैं ऐसा बोलते हैं। क्षेत्र के प्रति भी अटैचमेंट है काल के प्रति भी है द्रव्य के प्रति तो है ही। यह जो संबंध है भयानक है इसी को राग बोलते हैं किसी एक वस्तु के प्रति राग है तो निश्चित रूप से उसके प्रतिपक्ष जो तत्व हैं उसके प्रति द्वेष अपने आप सिद्ध हो जाता है। आप छाया में बैठे हैं तो छाया के प्रति राग है धूप के प्रति द्वेष है यदि धूप के प्रति द्वेष नहीं है तो छाया में क्यों बैठे हैं ।छाया के प्रति राग क्यों हैं राग है तो वहां किसी वस्तु के प्रति द्वेष है। आपको मीठा पसंद है हलवा पसंद है कड़वी चीज आपको पसंद नहीं है। कभी-कभी कड़वी चीज भी पसंद आती करेला वगैरा है प्रायः करके देख लो एक गिलास जूस पिया है लेकिन कौन सा है नीम का ।नीम इसके सेवन से रक्त शुद्ध होता है वैद्यों का कहना ।जिस प्रकार गन्ने का रस पीते हैं उसी प्रकार नीम का रस पीते पीना पड़ रहा है पीना अलग है और पीना पड़ रहा है यह अलग है ।पीने की इच्छा नहीं है बिना मन के जल्दी-जल्दी पी लेता है। लेकिन गन्ने का रस ,रस लेते हुए पीता है उसमें रस आ रहा है इसलिए जल्दी नहीं पीता है समय लगाता है। स्वाद लेता है इसी को बोलते हैं राग और द्वेष ।अपने लिए अभीष्ट वस्तु है उसके प्रति राग बिना नहीं नहीं रहता और जो अपने लिए अभीष्ट नहीं है उसके प्रति ऑटोमेटिक द्वेष हो जाता। कभी-कभी एक ही वस्तु राग का कारण है वही वस्तु द्वेष का कारण। एक ही वस्तु है कई ईष्ट के रूप में कभी अनिष्ट के रूप में काल का परिवर्तन हुआ है।
: श्रवण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर में विविध प्रतियोगिता परीक्षा के परिणाम घोषित किए गए
Sat, Jun 22, 2024
श्रवण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर में विविध प्रतियोगिता परीक्षा के परिणाम घोषित किए गए
हटा ।गुरु उपकार महोत्सव के अवसर पर मुनि पुंगव निर्यापक श्रमण मुनि श्री सुधासागर जी महाराज के आशीर्वाद से श्री दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर राजस्थान के तत्वाधान में आयोजित आठ दिवसीय शिविर में जो कि श्री पारसनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में लगाया गया इस श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर में विविध प्रतियोगिता परीक्षाएं आयोजित की गई ।इष्टोपदेश परीक्षा में प्रथम स्थान श्रीमती प्रीति राहुल जैन ,द्वितीय स्थान श्रीमती नेहा नीरज जैन, तृतीय स्थान श्रीमती कविता दीपक जैन को प्राप्त हुआ ।छहडाला परीक्षा में प्रथम स्थान मीना जैन, द्वितीय श्रीमती सविता जैन, तृतीय श्रीमती निधि जैन को प्राप्त हुआ। प्रथम भाग परीक्षा में निहाल जैन प्रथम, परिधि जैन द्वितीय ,प्रिया जैन तृतीय स्थान प्राप्त किया। द्वितीय भाग परीक्षा में प्रथम मुस्कान जैन, द्वितीय आभास जैन अभाना, तृतीय आदित्य जैन। चित्रकला प्रतियोगिता सीनियर वर्ग में प्रथम आभास जैन अभाना, द्वितीय स्नेहा जैन, तृतीय अंशिता /यशिका। चित्रकला प्रतियोगिता जूनियर वर्ग प्रथम ख्याति, द्वितीय राशि /अर्शिका, तृतीय स्थान मिष्ठी जैन ने प्राप्त किया। इस अवसर पर सांगानेर से आई विदुषी बहन मयूरी दीदी एवं विभा दीदी का सम्मान महिला मंडल द्वारा किया गया। शिवरार्थियों को प्रमाण पत्र एवं पुरस्कार वितरित किए गए ।विवेक जैन द्वारा बहनों एवं संगीतकारों का आभार व्यक्त किया गया।