Monday 7th of September 2026

ब्रेकिंग

जप्त गांजे की अनुमानित कीमत लगभग ₹1.10 लाख है। • आरोपी के विरूद्ध एनडीपीएस एक्ट के तहत किया गया प्रकरण पंजीवद्ध

सिवनी पुलिस की 24 घंटे में बड़ी सफलता - नेशनल हाईवे 44 पर हुई 1 करोड़ से अधिक की डकैती का खुलासा

इमारत गिरने से DU के छात्र मलबे में फंसे हुए NDRF की टीम मौके पर पहुंची रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी

परिस्थितियां नहीं, उनके सामने हमारी मानसिक स्थिति ही असली चुनौती

कार्यालय के बाहर पुलिस ने की नाकेबंदी

: माँ कामाख्या देवी मंदिर का इतिहास

Aditi News Team

Fri, May 26, 2023
माँ कामाख्या देवी मंदिर का इतिहास 51 शक्तिपीठों में से एक कामाख्या शक्तिपीठ बहुत ही प्रसिद्ध और चमत्कारी है। कामाख्या देवी का मंदिर अघोरियों और तांत्रिकों का गढ़ माना जाता है। असम की राजधानी दिसपुर से लगभग 7 किलोमीटर दूर स्थित यह शक्तिपीठ नीलांचल पर्वत से 10 किलोमीटर दूर है। कामाख्या मंदिर सभी शक्तिपीठों का महापीठ माना जाता है। इस मंदिर में देवी दुर्गा या मां अम्बे की कोई मूर्ति या चित्र आपको दिखाई नहीं देगा। वल्कि मंदिर में एक कुंड बना है जो की हमेशा फूलों से ढ़का रहता है। इस कुंड से हमेशा ही जल निकलता रहतै है। चमत्कारों से भरे इस मंदिर में देवी की योनि की पूजा की जाती है और योनी भाग के यहां होने से माता यहां रजस्वला भी होती हैं। मंदिर से कई अन्य रौचक बातें जुड़ी है, आइए जनते हैं - मंदिर धर्म पुराणों के अनुसार माना जाता है कि इस शक्तिपीठ का नाम कामाख्या इसलिए पड़ा क्योंकि इस जगह भगवान शिव का मां सती के प्रति मोह भंग करने के लिए विष्णु भगवान ने अपने चक्र से माता सती के 51 भाग किए थे जहां पर यह भाग गिरे वहां पर माता का एक शक्तिपीठ बन गया और इस जगह माता की योनी गिरी थी, जोकी आज बहुत ही शक्तिशाली पीठ है। यहां वैसे तो सालभर ही भक्तों का तांता लगा रहता है लेकिन दुर्गा पूजा, पोहान बिया, दुर्गादेऊल, वसंती पूजा, मदानदेऊल, अम्बुवासी और मनासा पूजा पर इस मंदिर का अलग ही महत्व है जिसके कारण इन दिनों में लाखों की संख्या में भक्त यहां पहुचतें है।

Tags :

जरूरी खबरें