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वृक्षारोपण कार्य को अवैध उत्खनन माफिया द्वारा बर्बाद किया जा रहा है : कटनी: राजस्व और खनिज विभाग की मिलीभगत से फलफूल रहा अवैध उत्खनन, वन विभाग की जमीन भी नहीं रही सुरक्षित

Aditi News Team

Tue, Sep 23, 2025

कटनी: राजस्व और खनिज विभाग की मिलीभगत से फलफूल रहा अवैध उत्खनन, वन विभाग की जमीन भी नहीं रही सुरक्षित

रिपोर्टर कविता पांडे

कटनी। जिले के खड़ौला ग्राम पंचायत अंतर्गत आलोनी नदी के समीप वर्षों पहले किए गए वृक्षारोपण कार्य को अवैध उत्खनन माफिया द्वारा बर्बाद किया जा रहा है। आरोप है कि खनिज और राजस्व विभाग की मिलीभगत से यह अवैध कार्य खुलेआम संचालित हो रहा है, जबकि शासन-प्रशासन मूकदर्शक बना बैठा है।

*रात होते ही चलने लगती हैं जेसीबी और डंपर*

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, हर शाम ढलते ही क्षेत्र में जेसीबी और डंपरों की आवाजाही शुरू हो जाती है। यह गतिविधियां अधिकतर रात के अंधेरे में संचालित की जाती हैं ताकि प्रशासन की नजरों से बचा जा सके। खुदाई के दौरान न केवल बेशकीमती पौधे और वृक्ष नष्ट किए जा रहे हैं, बल्कि पंचायत द्वारा की गई वर्षों की मेहनत पर भी पानी फिर रहा है।

राजस्व और वन भूमि की सीमाओं पर हो रहा अतिक्रमण

सूत्रों की मानें तो अवैध उत्खननकर्ता अब राजस्व एवं वन विभाग की सीमाओं पर भी अतिक्रमण कर रहे हैं। खड़ौला पंचायत की राजस्व भूमि और समीपस्थ वन क्षेत्र में लगातार खुदाई का कार्य जारी है। सीमांकन की अनदेखी करते हुए उत्खननकर्ताओं ने कई स्थानों पर पेड़ों की कटाई कर मार्ग बना लिए हैं।

*प्रशासनिक चुप्पी पर उठे सवाल*

प्रश्न यह उठता है कि यदि यह अवैध उत्खनन शासन की जानकारी के बिना हो रहा है, तो फिर कार्यवाही क्यों नहीं हो रही? क्या यह दर्शाता नहीं कि संबंधित विभागों की मौन सहमति इस अवैध कार्य में शामिल है? ग्रामीणों का आरोप है कि खनिज और राजस्व विभाग की ‘आंतरिक सहमति’ के बिना इस स्तर का अवैध उत्खनन संभव नहीं है।

*भ्रष्टाचार की बू, कार्रवाई कब*

यह मामला न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण के लिए खतरा बनता जा रहा है, बल्कि सरकारी योजनाओं और खर्च किए गए बजट की खुली धज्जियां भी उड़ा रहा है। अगर शीघ्र ही इस पर कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाले समय में यह न केवल प्राकृतिक संसाधनों की बर्बादी का कारण बनेगा, बल्कि प्रशासन की साख पर भी बड़ा सवाल बन जाएगा।

*निष्कर्ष*

कटनी जिले में चल रहे इस खुलेआम अवैध उत्खनन पर अगर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो यह मामला केवल भ्रष्टाचार नहीं बल्कि पर्यावरणीय संकट का रूप भी ले सकता है। प्रशासन को तत्काल हस्तक्षेप कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

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