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यहां बच्चे ढलकर परिवार और समाज का भविष्य बनते हैं:-निर्यापक मुनि श्री समता सागर

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पाठशाला ज्ञान की टकसाल,संस्कार और शिक्षा पर हुआ मंथन : यहां बच्चे ढलकर परिवार और समाज का भविष्य बनते हैं:-निर्यापक मुनि श्री समता सागर

Aditi News Team

Sat, Oct 3, 2026

पाठशाला ज्ञान की टकसाल, यहां बच्चे ढलकर परिवार और समाज का भविष्य बनते हैं:-निर्यापक मुनि श्री समता सागर

कुण्डलपुर में दो दिवसीय 170 पाठशालाओं के प्रतिनिधियों का अधिवेशन शुरू,संस्कार और शिक्षा पर हुआ मंथन

कुण्डलपुर (मप्र.), 3अक्टूबर। बड़े बाबा भगवान आदिनाथ की पावन नगरी कुण्डलपुर में शनिवार को दो दिवसीय जैन पाठशाला अधिवेशन-2026 का शुभारंभ हुआ। देशभर की करीब 170 पाठशालाओं के शिक्षक, शिक्षिकाएं, कार्यकर्ता और प्रतिनिधि अधिवेशन में शामिल हुए। उद्घाटन सत्र में निर्यापक श्रमण मुनि श्री समता सागर महाराज ने कहा कि पाठशाला समाज निर्माण की आधारशिला है। “पाठशाला एक टकसाल है। जैसे टकसाल में सिक्के ढलते हैं,उसी तरह पाठशाला में बच्चे ढलकर परिवार, समाज, धर्म और राष्ट्र के लिए अच्छे इंसान बनते हैं।”मुनि श्री ने कहा कि बड़े लक्ष्य के लिए कठिन परिश्रम और दृढ़ संकल्प जरूरी है। बच्चों के निर्माण में माता-पिता,विद्यालय और पाठशाला के शिक्षक समान रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।यदि सभी का संकल्प बच्चों को संस्कारित बनाने का हो तो समाज में बड़ा परिवर्तन संभव है। उन्होंने कहा कि आचार्य गुरुदेव श्री विद्यासागर महाराज ने संस्कारित समाज का सपना देखा था और देशभर में चल रही जैन पाठशालाएं उसी संकल्प को आगे बढ़ा रही हैं।उन्होंने कहा कि पाठशाला की सफलता केवल धार्मिक पाठ याद कराने में नहीं, बल्कि बच्चों के जीवन में नैतिकता,जिम्मेदारी और आत्मविश्वास विकसित करने में है। अनेक बच्चों ने पाठशालाओं से संस्कार लेकर आगे शिक्षक की भूमिका निभाई, जबकि कई युवाओं ने संयम का मार्ग अपनाया। हर बच्चे का साधु-साध्वी बननाआवश्यक नहीं है। वह संस्कारी, जिम्मेदार और अच्छा इंसान बनकर परिवार व समाज के प्रति अपने दायित्व निभाए, तो यह भी पाठशाला की बड़ी उपलब्धि है।मुनि श्री ने कहा कि एक बच्चे में आया परिवर्तन परिवार और समाज तक पहुंचता है। पाठशालाएं बच्चों को धार्मिक ज्ञान के साथ मंच पर बोलने, प्रस्तुति देने और अपनी प्रतिभा विकसित करने का अवसर भी दे रही हैं। उन्होंने समाज से बच्चों की प्रतिभा पहचानकर उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देने का आह्वान किया। उन्होंने पाठशाला कार्यकर्ताओं के लंबे समय से किए जा रहे योगदान की सराहना करते हुए ब्रह्मचारी भरत भैया सागर, ब्रह्मचारी वीरेंद्र भैया हीरापुर, ब्रह्मचारी संजय भैया मुरैना और ब्रह्मचारी मनोज भैया ललितपुर सहित पूरी टीम के कार्यों का उल्लेख किया। मुनि श्री ने राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ के योगदान की भी सराहना की।मुनि श्री ने पाठशाला और विद्यालय को ज्ञान के मंदिर बताते हुए कहा कि मंदिर में भगवान के दर्शन होते हैं, जबकि ज्ञान के इन मंदिरों में भविष्य की दिव्यता लिए बच्चे बैठते हैं। जिनवाणी का अध्ययन तभी सार्थक है, जब व्यक्ति अपने स्वरूप को पहचानने लगे और गुरु के चरणों का स्पर्श तभी सार्थक है, जब गुरु के आचरण का प्रभाव जीवन में दिखाई दे।बच्चों के पालन-पोषण पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि माता-पिता करियर और शिक्षा के साथ संस्कारों पर भी ध्यान दें। बच्चों को प्रतिभा विकसित करने के लिए खुला आकाश दें, लेकिन संस्कारों की डोर मजबूत रखें। बचपन के शुरुआती वर्ष संस्कार निर्माण के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। उन्होंने कुम्हार और मिट्टी का उदाहरण देते हुए कहा कि आचार्य गुरुदेव विद्यासागर महाराज ने असंख्य जीवनों की दिशा बदलकर उन्हें मुक्ति पथ की ओर अग्रसर किया।

उद्घाटन अवसर पर बड़े बाबा भगवान आदिनाथ और आचार्य गुरुदेव विद्यासागर महाराज के चित्रों का अनावरण एवं दीप प्रज्ज्वलन किया गया।बाल ब्रह्मचारी अनूप भैया विदिशा और ब्रह्मचारी मनोज भैया ललितपुर के निर्देशन में आचार्य गुरुदेव की पूजा हुई। ब्रह्मचारी भरत भैया सागर और ब्रह्मचारी वीरेंद्र भैया हीरापुर ने पाठशाला संचालन एवं व्यवस्था पर मार्गदर्शन दिया। इस अवसर पर

मुनि श्री पवित्र सागर महाराज ने कहा कि अनेक साधु-साध्वी, आर्यिका और ब्रह्मचारी किसी न किसी रूप में पाठशाला से जुड़े रहे हैं। उन्होंने माता-पिता से बच्चों को पाठशाला से जोड़ने का आग्रह किया और शिक्षकों को निरंतर सीखते रहने की प्रेरणा दी।

कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि श्रीमती सुधा मलैया ने कहा कि बच्चों को धर्म का ज्ञान भय से नहीं, बल्कि तर्क, समझ और प्रेम के साथ दिया जाना चाहिए। इस अवसर पर कुण्डलपुर प्रबंधकारिणी समिति के महामंत्री आर के जैन एवं अन्य पदाधिकारियों ने श्रीमती सुधा मलैया को शिक्षा, साहित्य, कला, संस्कृति, पुरातत्व एवं जैन विरासत के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया।

राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी एवं प्रचार मंत्री जयकुमार जैन जलज’ ने बताया दौपहर में आयोजित सभा में पाठशालाओं के प्रतिनिधिओं ने अपने विचार रखे एवं नन्हीदेवरी की पाठशाला के बच्चों ने सुंदर नाट्य प्रस्तुति की जिसमें दादा राजाराम जी एवं बबीता दीदी का सम्मान किया गया संध्या में समता समाधान कार्यक्रम संपन्न हुआ अधिवेशन के दूसरे दिन रविवार को पाठशाला संचालन तथा शिक्षकों के प्रशिक्षण, व्यवस्थापन तथा बच्चों में संस्कार और धर्मबोध विकसित करने जैसे विषयों पर पुनः मंथन होगा।

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अदिति न्यूज,(सतीश लमानिया)

निर्यापक मुनि श्री समता सागर

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