: नरवाई जला रहे किसान, अपने ही खेतों को पहुंचा रहे नुकसान,नरवाई में आग लगाने वालों पर नही होती कार्यवाही
रिपोर्टर अनिल जैन
नरवाई जला रहे किसान, अपने ही खेतों को पहुंचा रहे नुकसान,नरवाई में आग लगाने वालों पर नही होती कार्यवाही
गांधीग्राम, बुढ़ागर-वर्तमान में गांधीग्राम सहित आसपास के अनेक ग्रामों में किसानों ने खेत में गेहूं की खड़ी फसल को हार्वेस्टिंग से कटवाने के बाद नरवाई जलाना शुरू कर दिया है। इस नरवाई से न केवल खेत के पोषक तत्व जलकर नष्ट हो रहे हैं बल्कि कीट, पतंगों, पशु पक्षियों को भी नुकसान पहुंचने का खतरा बना हुआ है। खास बात यह है कि कृषि विभाग और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने पर्यावरण सुरक्षा को देखते हुए नरवाई जलाने पर रोक लगाई है।लेकिन ऐसी रोक का भी क्या फायदा जिसका पालन ही नहीं हो रहा है। विभाग व अधिकारी आदेश तो जारी करते हैं लेकिन जिन पर कार्रवाई करने की जिम्मेदारी होती है वे अपने कार्यालय से बाहर ही नहीं निकलते हैं। नतीजा यह है कि नरवाई जलाने का क्रम पिछले एक महीने से अनवरत जारी है।
*नियम कायदों की अनदेखी-खेतों में हुई हार्वेस्टिंग के उपरांत शेष बची नरवाई में किसान नियम एवं कायदों की अनदेखी कर रोज ही आग लगा रहे हैं। शाम ढलते ही गांव गांव में नरवाई में आग सुलगने से तापमान में बढ़ोतरी होने के साथ ही भूमि की उर्वरता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसके अलावा खेतों के आसपास बनी मेढ़ों पर खड़े हरे भरे पेड़ भी आग में झुलसने के कारण असामयिक रूप से कालकलवित हो रहे हैं। यही नहीं खेत की नमी और पोषक तत्व नष्ट हो रहे हैं जिससे उर्वरा शक्ति भी नष्ट होती है। इस साल अंचल में रबी की फसल में बड़ी मात्रा गेहूं की बंपर पैदावार हुई है। मार्च एवं अप्रैल माह में गेहूं की कटाई के दौरान किसानों ने अपनी फसल की कटाई हार्वेस्टर द्वारा कराई थी। खेत में हार्वेस्टिंग के बाद व्यर्थ नरवाई में आग लगा दी। खेतों में चारा भूसा न रहने के कारण मवेशियों के सामने भी भूखों मरने का संकट खड़ा हो रहा है।
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