: गाडरवारा नगर में जैन संप्रदाय के दो यमल मुनियों का हुआ आगमन
Fri, Feb 21, 2025
गाडरवारा नगर में जैन संप्रदाय के दो यमल मुनियों का हुआ आगमन
गाडरवारा |बड़ी-बड़ी डिग्रियां लेकर केवल नौकरी ही की जाती है या विदेश जाकर पैसा कमाया जाता है ऐसा नहीं है, गाडरवारा नगर में जैन संप्रदाय के दो यमल मुनियों का आगमन हुआ है जो की जुड़वा भाई हैं और उनके बीच मात्र 30 मिनट का अंतर है एक ने तो बी. फार्मेसी व एमबीए किया है, और दूसरे ने एम. काम. एम बी ए व सी ए किया हुआ है इतनी बड़ी-बड़ी डिग्रियां लेने के बाद व विदेश से बड़े पैकेज की नौकरी छोड़कर वापस अपने घर संसार को त्याग कर मात्र 25 वर्ष व 28 वर्ष की उम्र में वैराग्य के पथ पर चलने का संकल्प लेने वाले यमल मुनि का कल नगरागमन हुआ आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज के परम प्रभावी शिष्य मुनि श्री 108 आस्तिक सागर जी महाराज वह मुनि श्री 108 प्रणीत सागर जी महाराज ने नगर के सभी जिनालयो का दर्शन करते हुए वीर विद्यानिलय में पहुंचकर प्रथम मंजिल में नवनिर्मित सात कमरों का लोकार्पण अपनी उपस्थिति में धर्मशाला की सभी दानदाताओं के समक्ष सकल दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष जिनेश जैन से फीता कटवाकर करवाया |अध्यक्ष जिनेश जैन ने बताया कि मुनिदॄय का आगमन समाज के सभी लोगों के लगातार प्रयास का नतीजा है कि एक लंबे अंतराल के बाद किसी जैन संत का नगर आगमन हुआ है इससे पूरी जैन समाज में अत्यंत प्रसन्नता व्याप्त है जैन सभा को संबोधित करते हुए मुनि दृय संतभवन की प्रथम मंजिल पर 7 कमरों के निर्माण में आर्थिक सहयोग देने वाले श्री जिनेश जैन हीरा ज्वेलर्स , राजेश जैन शिक्षक, संजीव जैन मेडिकल , अजय जैन डोभी वाले, मनोज बसा (आदिशक्ति) डॉ. आे पी नायक एवं एडवोकेट राजकुमार जैन के दान की एवं निर्माण कार्य के दौरान आर्थिक सहयोग करने वाले हेमंत शाह व मुकेश जैन थाला वालों की भी प्रशंसा करते हुए कहा की वर्तमान काल में तो मानव अपने लिए तो एक से बढ़कर एक सर्वश्रेष्ठ भवनों का निर्माण कर लेता है परंतु बिराले ही लोग होते हैं जो समाज के हित में संतो के प्रवासकाल में रुकने के लिए धर्मशालाओं का निर्माण कार्य में अपना धन का उपयोग करते हैं कार्यक्रम में मंगलाचरण श्रीमती रुचि जैन ने किया संचालन अमन जैन ने किया एवं जैन समाज के सचिव राजेश जैन एवं समाज के वरिष्ठ जन ने मुनीदॄय की समक्ष श्रीफल अर्पित करते हुए समाज के हित में लंबे समय तक प्रवास करने का अनुरोध किया||
: जय हो राधा रानी सरकार की कितनी दयालु है राधा रानी पढ़िए बरसाना की एक सच्ची घटना ,जय श्री राधे
Fri, Feb 21, 2025
जय हो राधा रानी सरकार की कितनी दयालु है राधा रानी पढ़िए बरसाना की एक सच्ची घटना
जय श्री राधे
रमा नाम की एक स्त्री थी जो किसी गांव में रहती थी..5-6 बरस उसकी शादी को हो गए थे लेकिन अभी तक कोई संतान नहीं थी।एक बार श्री राधा अष्टमी का उत्सव आया.. गांव की औरतें बरसाना जा रही थी..औरतों ने कहा तुम भी बरसाना चलो.. राधा रानी बड़ी दयालु है.. तुम्हारी गोद जरूर भरेगी।वह कभी सात आठ दिन अपने घर से बाहर नहीं रही थी.. उसके पति और सास ने भी उसे जाने की आज्ञा दे दी।बस उसने मन में ठान लिया कि राधा रानी मेरी गोद जरूर भरेंगी।जिस दिन उसे जाना था उसी दिन पैर में चोट लग गई.. चला भी नहीं जा रहा था.. फिर भी वह स्त्रियों के संग यात्रा पर चल पड़ी।सारे रास्ते ट्रेन में राधा कृष्ण का जाप कीर्तन चलता रहा.. इस प्रकार सभी स्त्रियों के साथ वह बरसाना पहुंच गई।सभी नहा धोकर राधा जी के मंदिर में जाने के लिए तैयार हुए..राधा जी के महल में जब जाते हैं तो ऊपर बहुत से सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं..जैसे सीढ़ियां चढ़ने लगे वह स्त्रियों को बोली तुम लोग आगे आगे चलो मैं धीरे धीरे सीड़ियों से आ रही हूं..पैर में चोट लगने की वजह से चला भी नहीं जा रहा था.. दो चार सीढ़ियां चढ़ने के बाद उसका पैर मुड़ गया और वह नीचे गिरने लगी..तभी एक सात आठ साल की कन्या ने उसका हाथ पकड़ लिया.. रमा बोली बेटी आज अगर तुम ना होती तो मैं नीचे गिर गई होती।वह कन्या बोली मैया ऐसे कैसे गिर जाने देती मैं तुम्हें..रमा ने पूछा बेटी तुम्हारा क्या नाम है..वह बोली, लाडो नाम है मेरा, यही पास में रहती हूंवे दोनों सीढ़ियों पर बैठ गए.. लाडो कहने लगी मैया मेरे लिए क्या लाई हो..ना कोई जान पहचान और लाडो ऐसी बात कर रही है रमा ने सोचा, फिर रमा ने कहा लाडो मैं कल तुम्हारे लिए लेकर आऊंगी तुम्हें क्या पसंद है।लाडो बोलती है मुझे नथनी, गले का हार, कान के कुंडल, चूड़ियां, मेहंदी, घाघरा चोली यह सब चीजें पसंद है कुछ भी ले आना.. इतना कहकर वह बालिका भाग गई।जैसे तैसे रमा भी मंदिर में दर्शन करके लौट आई।आकर सोचने लगी उस बालिका के बारे में.. और बाजार से उसने गले का हार और चूड़ियां उसके लिए लाई।अगले दिन वहीं जहां मिले थे, वह लाडो उसका इंतजार करते मिली..चूड़ियां और गले का हार जैसे उसे दिया वह बोली बस इतनी सी ही और चीजें नहीं लाई और वह मुंह फुला कर बैठ गई।तब रमा बोली अभी मैं 8 दिन यहीं पर हूं रोज तुम्हारे लिए कुछ ना कुछ लाया करूंगी।यह सुनकर लाडो उसकी गोदी में बैठ गई और गले से लग गई।रमा तो रोने लगी उसे जैसे एक संतान मिल गई.. खूब प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरा.. ऐसे ही वह फिर चली गई।रमा ने मंदिर से आकर घाघरा और चोली उसके लिए बनवाए.. ऐसे ही रोज कुछ ना कुछ वह उसे देती।एक दिन रमा कहती है अब यह सारी चीजें मुझे पहनकर भी तो दिखा कैसी लगती है..लाडो बोली कल राधा अष्टमी है कल पहनूंगी.. इस बार लाडो के साथ एक लड़का भी था..उसे देखकर रमा ने कहा आज पता नहीं मेरे मन में क्या आया मैंने एक धोती और मुकुट मोर वाला लिया है.. क्या मैं इसे दे दूं..लाडो बोली यह कनुआ है.. मेरे साथ ही रहता है.. हां तुम इसे दे दो.. ऐसा कहकर वे दोनों सामान लेकर चले गए।अगले दिन राधाष्टमी थी.. जब रामा सीढ़ियों पर आई वहां उसे आज कोई ना मिला..बहुत इंतजार के बाद जब वह मंदिर में पहुंची तो वहां बहुत भीड़ थी.. कीर्तन और नृत्य हो रहा था..इसी तरह भीड़ को चीरती हुई वह आगे पहुंची.. और वहां देख कर राधा जी को देखा और ठाकुर जी को देखा..वही सामान सब जो वह लाई थी उन्होंने धारण किया हुआ था..वह पत्थर सी हो गई.. आंखों से आंसू बहने लगे.. बात समझते देर न लगी कि वह लाडो राधा जी और कनुआ कृष्ण जी हैं..स्वयं जगत के पालनहार उसके पास आते हैं.. राधा जी उसकी गोदी में बैठती हैं... और उसे मातृ सुख प्रदान करती है।वह तो जैसे बावरी हो गई.. दिन-रात लाडो लाडो कहती रहती.. पुकारती रहती..वह स्त्रियों से बोली तुम लोग घर जाओ मैं नहीं जाऊंगी.. उसकी सास और पति भी उसे लेने आए.. पर वह साथ नहीं गई।अब तो प्रतिदिन वह सीढ़ियों पर बैठे-बैठे आंसुओं से सीढ़ियां धोती.. पलकों से बुहारती..ऐसा करते करते उसे 30 बरस हो गए..एक दिन एक बालिका उसका हाथ पकड़ कर ऊपर अटालिका में ले गई.. वहां जाकर बोलती है.. लो आ गई तेरी लाडो..ऐसा कहकर बाहे फैलाकर रमा को बुलाने लगी और अपने गले लगा लिया..दिन रमा ऐसे गले लगी कि इस पार्थिव शरीर को छोड़कर सदा के लिए अपनी लाडो के पास चली गई..इस घटना से हम सबको यह सीख मिलती है कि जो भी आशा रखें चाहे वह सकाम हो या निष्काम केवल भगवान से ही रखें।
बरसाने वाली सरकार की जय हो..
जय श्री राधे 🙏
: अतिथि शिक्षकों की सेवाएं 30 अप्रैल तक बढ़ाई गई
Fri, Feb 21, 2025
अतिथि शिक्षकों की सेवाएं 30 अप्रैल तक बढ़ाई गई
प्रदेश के शासकीय विद्यालयों में शैक्षणिक व्यवस्था में रिक्त पदों के विरूद्ध सत्र 2024-25 में अतिथि शिक्षकों की सेवाएं ली गई हैं। लोक शिक्षण संचालनालय ने इस शैक्षणिक वर्ष में विद्यालय में व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित करने के लिये अतिथि शिक्षकों की सेवाएं 30 अप्रैल 2025 तक बढ़ा दी हैं। इस संबंध में संचालनालय ने समस्त जिला शिक्षा अधिकारी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी, संकूल प्राचार्य और शाला प्रभारियों को निर्देश जारी किये गये हैं।