: गाडरवारा में किशोर दा की जयंती पर हुआ संगीत मय कार्यक्रम,एक शाम किशोर दा के नाम
Wed, Aug 6, 2025
गाडरवारा में किशोर दा की जयंती पर हुआ संगीत मय कार्यक्रम,एक शाम किशोर दा के नाम
खंडवा मध्यप्रदेश में जन्मे भारतीय सिनेमा के मशहूर हरफनमौला पार्श्वगायक फिल्म फेयर पुरस्कार प्राप्त प्रसिद्ध अभिनेता किशोर दा का अवतरण दिवस उनके दिलकश नगमें गुन-गुनाकर यादगार बनाते हुए गायक राघवेन्द्र सिंह चौधरी के निज निवास पर मनाया। कार्यक्रम की शुरुआत राज्य शिक्षक संघ के प्रांतीय कोषाध्यक्ष नगेंद्र कुमार त्रिपाठी ,अजाक्स जिला अध्यक्ष बंशीलाल अहिरवार , जनशिक्षक अवधेश सिंह पटैल,ब्लाक अध्यक्ष लक्ष्मीकांत कौरव के कर कमलों से मां वीणा वादिनी के पूजन से की गई।जिसमें नगर के प्रसिद्ध गायक कलाकारों जिनमें - नागेन्द्र त्रिपाठी द्वारा पल पल दिल के पास तुम रहती हो...सरगम म्यूजिकल ग्रुप से राघवेन्द्र सिंह चौधरी,आरती चौधरी ने मेरा जीवन कोरा कागज ....दिल क्या करे जब किसी से... नटराज म्यूजिकल ग्रुप से छोटू पंड्या ने भोले ओ भोले छूकर मेरे मन को..रामकिशोर प्रजापति ने नीले नीले अंबर पर चांद .. नंदकिशोर प्रजापति जिंदगी प्यार का गीत है आने वाला पल जाने वाला है...दुर्गेश सिंह, ने भीगी भीगी रातों में.... मेरे नैना सावन भादो फिर भी मेरा मन....आदि सभी गायक कलाकारों ने मधुर मनमोहक संगीत प्रस्तुतियां देकर समां बांधा, उक्त कार्यक्रम में हरिसिंह चौधरी,पवन कुमार बिजोरिया,हरिओम जाटव, रानी पटैल,गनेश चौधरी, देवीसिंह चौधरी,राजकुमार, यादव,सचिन कुमार,कलीराम चौधरी,तथा परिवार जन विशेष रूप से उपस्थित रहें।
: गाडरवारा,माहेश्वरी महिला मंडल द्वारा ऑर्थोपेडिक्स स्वास्थ्य शिविर का आयोजन
Wed, Aug 6, 2025
माहेश्वरी महिला मंडल द्वारा ऑर्थोपेडिक्स स्वास्थ्य शिविर का आयोजन
गाडरवारा ।स्थानीय महिला मंडल गाडरवारा द्वारा ऑर्थोपेडिक्स स्वास्थ्य शिविर का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम के प्रथम चरण में डाक्टर हर्षल हुरकट, संगीत जैन व सजातीय महिलाओं व. पुरुषों ने शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर भगवान महेश की वंदना से किया गया। इंदौर के युवा ऑर्थो एवं घुटना विशेषज्ञ डॉक्टर हर्षल हुरकट ने अपनी सेवाएं देते हुए रोगियों को उचित चिकित्सीय परामर्श और मार्गदर्शन से लाभान्वित किया । सभी रोगी चिकित्सीय परामर्श से प्रभावित हुए ।डॉक्टर संगीत जैन द्वारा चरक पॉलीक्लिनिक में स्वास्थ्य शिविर के लिए समस्त सुविधाएं एवं सेवाएं उपलब्ध कराई गई जिसके लिए माहेश्वरी महिला मंडल आभार व्यक्त किया ।उल्लेखनीय है कि माहेश्वरी महिला मंडल समय समय पर सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और मानवीय मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध कार्यक्रम समय समय पर आयोजित करती रहती है उसी श्रृंखला में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था ।इस अवसर पर महिला मंडल के अलावा माहेश्वरी पुरुष और युवा मंडल के महेश मालपानी अध्यक्ष, नवनीत पलोड, ओम काबरा, अजय काबरा, अशोक मोलासरिया, गिरिराज मालपानी, सुदर्शन पलोड, मधुर मोलासरिया, अनिल मोहता, देवदास, गोकुल काबरा आदि उपस्थित रहे।
: धराली की पुकार
Wed, Aug 6, 2025
धराली की पुकार
( धराली विनाश पर एक कविता - सुशील शर्मा)
चौतीस सेकंडबस इतना सा समय,खीरगंगा का प्रचंड अट्टहासऔर धराली का एक हिस्साधरती पर से मिट गया।बादल,जो बरसने के लिए आते हैं,इस बार टूटकर गिरे,मानो आकाश नेअपना पूरा भारधरती पर फेंक दिया हो। सड़कें चीख उठीं,घर तिनकों की तरहधार में बह गए,हँसते आँगन,बच्चों की किलकारियाँ,एक ही पल मेंमौन हो गईं। कितने लोगबाजार देखने निकले थे,कितनों नेचाय की भाप मेंअपने सपनों को गरम किया होगा।किसी ने बेटी की शादी सोची होगी,किसी ने बेटे की पढ़ाई,किसी ने खेतों मेंअगली फसल का अनुमान लगाया होगा।और फिरबस चौतीस सेकंड,सब मलबे में दब गया। यह मौत का तांडव था,जो अपने रास्ते में आएहर जीवन को निगलता चला गया।किसी की चीखेंपत्थरों में दब गईं,किसी की सांसेंपानी की धार में खो गईं।बचे हुए लोगअब ढूँढ रहे हैंकंधों पर उठाने को अपने प्रियजन,पर हाथ खाली लौट आते हैं। धराली आज रो रही हैन केवल उन मृतकों के लिएजो हमारे बीच नहीं रहे,बल्कि इस निर्मम सवाल के लिए भीकि आखिर क्यों?क्यों बार-बारपहाड़ की छाती चीर दी जाती है?क्यों जंगल काटे जाते हैं,नदियों को बाँधा जाता है,और पहाड़ों परकंक्रीट के बोझ डाले जाते हैं? यह हादसासिर्फ बादल फटने का नहीं,यह हमारी लापरवाहियों का परिणाम है।हम भूल गएकि प्रकृतिसिर्फ संसाधन नहीं,माँ है।और जब उसकी छाती परइतना बोझ डालते हैं,तो वह कभी न कभीआक्रोश बनकर टूट पड़ती है। धराली की आत्माएँहमसे यही कह रही हैंहमारे जाने का शोक मनाओ,पर साथ ही प्रण लो,कि अब प्रकृति कोऔर न सताओगे। हमें चाहिएन सिर्फ राहत दल,बल्कि संवेदनशील नीतियाँ।हमें चाहिएजंगलों की रक्षा,नदियों की स्वच्छता,और पहाड़ों परकंक्रीट नहीं,हरियाली का सहारा।हमें चाहिएसतर्कता की घंटियाँ,मौसम की सटीक चेतावनियाँ,और सबसे बढ़करप्रकृति को माँ मानने कासंस्कार। धराली के मृत आत्माओंहम तुम्हें श्रद्धांजलि देते हैं।तुम्हारा दर्दहमारे कंधों पर रहेगा।तुम्हारी यादहमें बार-बार चेताएगीकि प्रकृति सेखिलवाड़ का मूल्यकितना भारी होता है। तुम्हारी आत्माएँशांति पाएँ,और हमतुम्हारे अधूरे सपनों की कसम खाकरयह वचन देंकि धरती को फिर सेउसकी लय में जीने देंगे। धराली,तेरी चीखेंहमारी आत्मा में गूँजेंगीजब तक हमसचमुच नहीं सीखतेकि प्रकृति सेसंधि किए बिनामानव का भविष्यसंभव नहीं। सुशील शर्मा