: इस कलिकाल में भगवत प्राप्ति का मूल साधन गोसेवा ही है साध्वी श्रद्धा गोपाल सरस्वती
Tue, Jul 29, 2025
इस कलिकाल में भगवत प्राप्ति का मूल साधन गोसेवा ही है साध्वी श्रद्धा गोपाल सरस्वती
सुसनेर। जनपद में मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्थापित एवं विश्व के लोक प्रसिद्ध गो सेवा संस्थान श्रीगोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के संस्थापक एवं संरक्षक परम श्रद्धेय गो ऋषि पूज्य स्वामी दत्तशरणानन्द जी महाराज के पावन सानिध्य में संचालित विश्व के प्रथम गो अभयारण्य श्री कामधेनु गो अभयारण्य साल रिया में हरियाली अमावस्या के पुण्य पर्व पर 31 वर्षीय गो पर्यावरण एवं अध्यात्म चेतना पदयात्रा के प्रणेता ग्वाल सन्त पूज्य स्वामी गोपालानंद सरस्वती जी महाराज की कृपापात्र साध्वी श्रद्धा गोपाल सरस्वती जी ने गो कृपा कथा में संबोधित करते हुए बताया कि भगवती गोमाता जहां विराजती है अगर वहां सत्संग किया जाएं तो उसका कई लाख गुना फल है और जिस व्यक्ति की परमात्मा पर कृपा हो उसे ही गोशाला में सत्संग का लाभ मिलता है और आज हम सभी को परमात्मा की कृपा से ही श्रीलाल सिंह जी पूर्व गोशाला अध्यक्ष एवं न्यासी श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के माध्यम से आज हमें यह सुअवसर मिला हैं।साध्वी जी ने आगे बताया कि आज हरियाली अमावस्या है और आज का दिन प्रकृति एवं भगवान शंकर का दिन है और श्रावण मास में भारत के सभी 12 ज्योतिर्लिंग सहित सम्पूर्ण शिवालयों में भगवान शंकर एवं उनके पाषाण के नन्दी की पूजा करके उनसे अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की मांग कर रहें है लेकिन भगवान शंकर ने जिनकी पूजा की है जिनके बिना वे एक भी फल नहीं रह सकते और उनके दर्शन में बाधा बने स्वयं काल को भी अपने तीसरे नेत्र से भस्म कर दिया है हो ऐसे सजीव नन्दी बाबा आज दर दर की टोकरे खा रहें है और मानव उस पत्थर के नन्दी को पूजने के लिए घंटों घंटों तक कतार में खड़ा रहकर उनकी पूजा के लिए दौड़धुप कर रहा है ।साध्वीजी ने बताया कि 84 लाख में सबसे श्रेष्ठ योनि मनुष्य योनि है और मनुष्य बनने का मुख्य उद्देश्य भगवत प्राप्ति है और भगवान को पाने के लिए सहनशीलता,,धैर्य एवं समर्पण ये तीन चीजें मनुष्य में न हो तब तक परमात्मा नही मिल सकते और ये सब भगवती गोमाता के सानिध्य में ही मिल सकता है अर्थात इस कलिकाल में भगवत प्राप्ति का एक ही मूल साधन है वह है गो सेवा। यानि इस कलिकाल में अगर भगवान को ढूंढना है तो गोशाला में ढूंढिए अर्थात बिना गौसेवा के जो भक्ति करता है वह भक्ति मृतप्राय: हैं। लेकिन आजकल लोग गायमाता को केवल पशु समझकर उसे दर दर की ठोकरें खाने को छोड़ दिया है,जबकि गोमाता कभी दुःखी नहीं होती बल्कि वह तो मनुष्य को भवसागर से तारने के लिए लीला करती है ताकि मनुष्य उसकी करुणा देखकर उसकी सेवा में जुट जाएं ।मासिक सत्संग के अन्त में श्री लाल सिंह जी सालरिया के परिवार के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उज्जैन विभाग के विभाग प्रचारक हीरेंद्र सिंह जी,आगर जिला प्रचारक राकेश जी मराठा सहित संघ के जिला पदाधिकारियों ने भगवती गोमाता जी का पूजन एवं आरती की एवं श्री कामधेनु गो अभयारण्य के प्रबंध न्यासी डॉक्टर विक्रम सिंह जी ने विभाग प्रचारक हीरेंद्र सिंह जी एवं जिला प्रचारक राकेश जी मराठा का उपरना पहनाकर एवं भगवती गोमाता की छवि देकर बहुमान किया और आज के यजमान लाल सिंह जी भादवा अमावस्या के यजमान भगवान सिंह जी मोखमपुरा ने पूज्य साध्वी दीदी से आशीर्वाद लिया और अन्त में हजारों गो भक्तों ने गोव्रती महाप्रसादी ग्रहण की ।
: नाग धरती के प्रहरी (नागपंचमी पर कविता)
Tue, Jul 29, 2025
नाग धरती के प्रहरी
(नागपंचमी पर कविता)
धरती के गहरे गर्भ में,जड़ों की उलझी भूलभुलैया में,शिला की दरारों औरझाड़ियों की नमी भरी छाँव मेंबसते हैं नागअनगिनत आकारों, रंगों, और स्वभावों वाले। वे न तो केवल भय हैंन ही केवल पूजा का प्रतीक,वे हैं पृथ्वी की उसपुरानी कथा के पात्रजो सृष्टि के संतुलन कोचुपचाप थामे हुए हैं। उनकी आँखों में चमकता हैसमय का अनंत प्रवाह,पलकों के बिना भीवे देख लेते हैंवह सबजो हम अपनी खुली आँखोंसे नहीं देख पाते। वे रेंगते हैं मौन,पर हर कदमधरती को नई धुन देता है।उनकी जीभ,दो फाँकों में बंटीमानो दो दिशाओं का मार्गदर्शन,सूँघने और परखने की अद्भुत शक्ति। नागधरती के चिकित्सक भी हैंचूहों की अंधाधुंध बढ़ती भीड़उनके बिना खेतों को उजाड़ देती।मेंढकों और छिपकलियों का संतुलन,कीड़ों का रहस्य,सब उनकी उपस्थिति सेसुरक्षित है। वे कभी-कभीमानव की बस्तियों के किनारेआ जाते हैं,न भय फैलाने,न हिंसा करने,बस क्योंकिधरती पर उनका घरहमने छीन लिया है। उनकी देह पर खिंची हुईतराशी हुई काष्ठ जैसी शल्कें,धूप में चमकती हैंमानो किसी प्राचीन योद्धा का कवच।उनके रंगहरीतिमा, धूसर, नीली आभा,कभी ज़हरीली चेतावनी,कभी छिप जाने का छलावरण। विष उनकी रक्षा है,न आक्रमण की प्रवृत्ति।वो काटते नहीं,जब तक उन्हेंमृत्यु का भय न छू ले।फिर भी,हम उन्हेंडर और अंधविश्वास कीपरिधि में बाँध देते हैं। नागपंचमी का यह पर्वकेवल दूध चढ़ाने काअनुष्ठान नहीं,यह स्मृति हैकि यह धरतीसिर्फ हमारी नहीं,उनकी भी हैजिन्होंने लाखों वर्षों सेसृष्टि के संतुलन को संभाला है। हम भूल जाते हैंकि जिन नागों की पूजा करते हैं,उन्हें मारते भी हैंउनकी खाल के लिए,उनके भयावह नाम के लिए।हम यह नहीं देखतेकि उनके बिनाखेत उजड़ेंगे,जंगल सूखेंगे,और जैव विविधताअपना स्वर खो देगी। धरती का हर नागएक कहानी हैप्रकृति की,जीवन की रक्षा की,संतुलन की।उसकी जीभ का कंपनहवा में लिखता हैएक अदृश्य श्लोक"हम भी तुम्हारे साथइस संसार में हैं।" आज नागपंचमी परसिर्फ दूध नहीं,बल्कि एक संकल्प लेना हैकि उनके घर नहीं उजाड़ेंगेउनकी देह का सौदा नहीं करेंगे,और उनके रहस्यमय जीवनको डर नहीं,सम्मान देंगे। क्योंकि नागसिर्फ लोककथाओं के पात्र नहीं,वे इस धरती केअनसुने प्रहरी हैंजो मौन रहकर भीजीवन की रक्षा करते हैं।
सुशील शर्मा
: नागपंचमी को सर्पों के प्रदर्शन को रोक को लगाने पर भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड का पत्र
Mon, Jul 28, 2025
नागपंचमी को सर्पों के प्रदर्शन को रोक को लगाने पर भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड का पत्र
भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड ने नागपंचमी के अवसर पर सांपों के प्रदर्शन और उनसे क्रूरतापूर्ण व्यवहार को रोकने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। बोर्ड ने सभी संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि नागपंचमी के दौरान सांपों को पकड़ा न जाए, उनका प्रदर्शन न किया जाए, और न ही उनके साथ किसी भी प्रकार की क्रूरता की जाए.lनागपंचमी, जो सांपों के प्रति श्रद्धा और सम्मान का त्योहार है, कुछ क्षेत्रों में सांपों के प्रदर्शन और उनके साथ क्रूरतापूर्ण व्यवहार का कारण भी बन जाता है. भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड ने इस प्रवृत्ति को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। बोर्ड ने सभी संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि सांपों को पकड़ा न जाए, उनका प्रदर्शन न किया जाए, और न ही उनके साथ किसी भी प्रकार की क्रूरता की जाए. मानद पशु कल्याण प्रतिनिधि ,प्रदेश प्रेस संयोजक मीडिया प्रभारी जी सी सी आई भागीरथ तिवारी ने कहा कि सांपों को पकड़ना और प्रदर्शन करना गैरकानूनी है:भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत, सांपों को पकड़ना और उनका प्रदर्शन करना अपराध है।क्रूरतापूर्ण व्यवहार को रोकना:बोर्ड ने यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि नागपंचमी के दौरान सांपों के साथ किसी भी प्रकार की क्रूरता न हो।जागरूकता अभियान:वन विभाग और अन्य पशु कल्याण संगठन सांपों के संरक्षण के लिए जागरूकता अभियान भी चला रहे हैं, ताकि लोगों को सांपों के महत्व और उनके साथ उचित व्यवहार के बारे में शिक्षित किया जा सके.शिकायत दर्ज करने की व्यवस्था:यदि कोई सांपों के साथ क्रूरता या प्रदर्शन करते हुए पाया जाता है, तो शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था भी की गई है।यह कदम न केवल सांपों के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह त्योहार की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को भी बनाए रखने में मदद करता है। सांपों के साथ क्रूरतापूर्ण व्यवहार से न केवल सांपों को नुकसान होता है, बल्कि यह त्योहार की भावना को भी ठेस पहुंचाता है. रिपोर्ट के अनुसार, नागपंचमी के दौरान सांपों को दूध पिलाने से उनकी मौत हो जाती है। इसलिए, लोगों को सांपों को दूध पिलाने से बचना चाहिए।ने भी बताया है कि सांपों को दूध पिलाना उनके लिए हानिकारक है।यह सुनिश्चित करना हम सभी की जिम्मेदारी है कि नागपंचमी का त्योहार सांपों के प्रति सम्मान और श्रद्धा के साथ मनाया जाए, न कि उनके साथ क्रूरतापूर्ण व्यवहार करके. श्री तिवारी के साथ साथ पशु प्रेमियों ने नागपंचमी पर सांपों का प्रदर्शन पड़ेगा महंगा, सपेरों पर रखी जा रही नजरइसकी धाराओं एवं उप धाराओं का उल्लंघन करने पर सख्त सजा का प्रावधान है। सपेरों द्वारा सर्पों को पकड़ने के दौरान सर्प घायल हो जाते हैं उनका विषदंत तोड़ने से वे अपनी रक्षा नहीं कर पाते जिसके कारण कई सांपों की मृत्यु ... पुराण से पर्यावरण तक नाग पंचमी का खास महत्व ...पुराण से पर्यावरण तक नाग पंचमी का खास महत्व, इसमें छिपा सर्पों से जुड़ा रहस्य · घर में सर्पों का भय नहीं. नाग पंचमी का त्योहार न केवल नागों के प्रति श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक है, .. ने जनता से नाग पंचमी पर सांपों की रक्षा करने और क्रूरता से बचने का ने जनता से नाग पंचमी पर सांपों की रक्षा करने और क्रूरता से बचने का आग्रह किया ... इस प्रक्रिया में, अब तक पशु कल्याण संगठन ने त्योहार के दौरान 5,276 साँपों को बचाया है। नाग पंचमी पर सांपों की रक्षा करने और क्रूरता से बचने का आग्रहइस प्रक्रिया में, अब तक, पशु कल्याण संगठन ने त्योहार के दौरान 5,276 सांपों को बचाया है। ... कई साँप मर जाते हैं और बचे हुए साँपों को नाग पंचमी ...मध्य प्रदेश वनविभाग की चेतावनी, नागपंचमी पर सपेरे सांपों का खेल-तमाशा ...नागपंचमी और दूसरे त्योहारों के दौरान अक्सर सपेरे लोगों की आस्था और विश्वास का सहारा लेकर सांपों को पकड़कर उनका प्रदर्शन करते हैं। इससे सांप घायल हो जाते हैं। सपेरे खेल-तमाशे दिखाने के लिए उनके विषदंत तोड़ देते हैं ...मध्यप्रदेश में भी नागपंचमी पर सांपों के प्रदर्शन पर सख्ती,वन विभाग ने दिए ...मध्यप्रदेश में नागपंचमी पर सांपों के प्रदर्शन पर सख्ती,वन विभाग ने दिए कड़े निर्देश ... भोपाल : नागपंचमी के अवसर पर सांपों के प्रदर्शन और उनके साथ दुर्व्यवहार को रोकने के लिए मध्यप्रदेश के वन विभाग ने सख्त कदम उठाए हैं।