: एम.आई.एम.टी. विधि विभाग मे शिक्षण विमर्श सम्पन्न
Mon, Jun 2, 2025
एम.आई.एम.टी. विधि विभाग मे शिक्षण विमर्श सम्पन्न
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत प्रवेश प्रक्रिया, विषय चयन और छात्र-छात्राओं के समग्र व्यक्तित्व विकास की दिशा में शासन की महत्वपूर्ण योजना ’कॉलेज चलो अभियान ’ के उद्देश्य से एम आई एम टी कॉलेज नरसिंहपुर मे शैक्षणिक विमर्श 2025 की श्रंख्ला लगातार छात्र-छात्राओं को लाभान्वित कर रही है। इसी क्रम में विधि संकाय के छात्र-छात्राओं एवं अभिभावकों ने जिले के अधिवक्ताओं से मार्गदर्शन प्राप्त किया। विमर्श कार्यक्रम मे विषय विशेषज्ञ एड. भानू प्रकाश श्रीवास्तव, एड. प्रमोद दुबे, एड. सुलभ जैन, एड.विष्णु श्रीवास्तव,एवं एड. जया शर्मा ने विधि क्षेत्र में रोजगार हेतु सिविल, क्रिमिनल, रेवेन्यू, कम्पनी , कार्पोरेट, तथा विभिन्न फोरम अंतर्गत वकालत के अलावा कानूनी सलाहकार पत्रकारिता, पीएससी , यूपीएससी, सरकारी वकील ,विधि विश्लेषक, विधि शिक्षक, न्यायिक सेवाऐं , विधि आर्मी कोर, लीगल सर्विसेस, विधि शोधकर्ता एवं विधिक सेवा प्राधिकरण में छात्र-छात्राओं को भविष्य निर्माण हेतु प्रेरित किया । आमंत्रित अधिवक्ता उमेश नेमा, प्रदीप पुरोहित, मनीष टुटेजा , सुधीर दुबे, राजेन्द्र शर्मा सहित जेल प्रशासन से अजय डेहरिया ने छात्र-छात्राओं के मार्गदर्शन एवं काउंसलिंग हेतु महाविद्यालय द्वारा स्थापित विभागवार हेल्पडेस्क का भ्रमण किया । प्राचार्य डॉ. अशोक कुमार गर्ग ने महाविद्यालय की विकास यात्रा के 26 सफलतम् वर्ष पूर्ण होने पर अभिभावकों विभिन्न विद्यालयों एवं छात्र-छात्राओं को उनके सहयोग के प्रति आभार प्रगट करते हुए उनके सुझावों को आमंत्रित किया। उल्लेखनीय है कि महाविद्यालय द्वारा उक्त आयोजन म.प्र. शासन उच्च शिक्षा विभाग के कालेज चलो अभियान के अंतर्गत छात्र-छात्राओं को जागरूक करने के उद्देश्य से किया जा रहा है जिससे कोई भी छात्र-छात्रा प्रवेश से वंचित न रह जाए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. पराग नेमा एवं आभार श्रीमती आराधना दुबे द्वारा किया गया। इस अवसर पर डॉ. एसएन राव, श्रीमती अनीता रघुवंशी, डॉ. दीपिका शर्मा, जी डी उमरे एवं सुश्री विजेता सिधना सहित स्टाफ मेम्बर्स एवं छात्र-छात्राओं की उपस्थिति रही।
: श्रम की रोटी पर दोहे,"दो जून की रोटी – किस्तों में बिकती ज़िंदगी”
Mon, Jun 2, 2025
श्रम की रोटी पर दोहे,
( सुशील शर्मा)
श्रम की रोटी श्रेष्ठ है, रहता मन संतोष।ईश्वर का वरदान है ,सच्चा जीवन कोष।। धूप-पसीना एक कर, माटी उपजा अन्न।तब जाकर मिलती हमें,श्रम की रोटी धन्य।। भूखे पेट न हो भजन, रोटी से सब काम।रोटी से जीवन चले, रोटी ही है राम।। भूखे बच्चे देखते, डस्टबीन की ओर।आँखों में आँसू भरे, मुँह में जूठा कौर। आपा-धापी रात दिन, हर पल है संग्राम।श्रम की रोटी श्रेष्ठ है, जीवन का पैगाम।। सूखी रोटी भी लगे, जैसे छप्पन भोग।रोटी के पीछे भगें,जग के सारे लोग। रोटी जब तक पास है, देते तब सब मान।रोटी गर रूठे अगर,सब रिश्ते सुनसान।। संघर्षों की राह पर, गर चलता इंसान।श्रम की रोटी से बढ़े, जीवन में सम्मान। रोटी के भीतर छुपी, टूटे मन की आस।रोटी में ही है निहित , रिश्तों का विश्वास।। श्रम की रोटी में छुपा,ईश्वर का वरदान।भूखे को रोटी खिला, यही है उत्तम दान।।
दो जून की रोटी – किस्तों में बिकती ज़िंदगी”
(एक तीखा सामाजिक-आर्थिक व्यंग्य - सुशील शर्मा)
साहब! दो जून की रोटी मिल जाए, यही क्या कम है!कहने को तो यह एक मासूम-सी तमन्ना लगती है, लेकिन असल में यह वह राष्ट्रीय आपातकाल है जिसे हम ‘सामान्य जीवन’ समझ बैठे हैं। अब देखिए ना...एक तरफ कॉर्पोरेट टॉवर की चमचमाती खिड़कियों के भीतर “वर्क फ्रॉम होम” करते हुए लोग सुबह नाश्ते में एवोकाडो टोस्ट खा रहे हैं, और दूसरी तरफ नाले की पटरी पर बैठा रिक्शेवाला अपनी बीवी से पूछ रहा है –“आज चूल्हा जलेगा कि फिर ख्वाबों की रोटियां सेंकें?”सदियों से इस देश के गरीब की सबसे बड़ी ख्वाहिश यही रही है।कभी इसे संतोष का प्रतीक कहा गया,कभी इसे नियति मानकर टाल दिया गया,और आज के समय में यह एक ऐसा ‘जुमला’ बन चुका है,जो भूख से ज्यादा बेचैनी, और रोटी से ज्यादा राजनीति की गंध देता है।अब सवाल ये है क्या सच में आज भी आम आदमी को दो वक्त की रोटी मिल रही है?या अब वह रोटी नियमों, नीतियों, नाटक और न्याय की प्रतीक्षा में झुलस रही है?
रोटी का रंग अब वर्ग बताता है
भूख सबको लगती है,मगर रोटी का आकार, उसका रंग, उसका स्वाद अब इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस तबके से हैं।अमीर आदमी की थाली में ‘मल्टीग्रेन’, ‘लो कार्ब डाइट’, ‘ग्लूटन फ्री रोटियाँ’ सजी हैं साथ में सूप, सलाद और एक्सक्यूज़ मी वेटर!गरीब की थाली?वो थाली नहीं, एक लोहे की तश्तरी है जिसमें आधा पेट भरने लायक चावल,नमक के साथ उबली कोई सब्जी (जिसका नाम न वो जानता है न स्वाद),और एक बासी रोटी जो शायद कल भी वहीं थी।
श्रमिक और रोटी – रोज की दौड़
हर सुबह जब अखबारों में स्टॉक मार्केट के ग्राफ ऊपर जाते हैं,तो देश के करोड़ों श्रमिकों की कमर झुकती जाती है उन्हें शेयर मार्केट की नहीं, रोटी मार्केट की चिंता होती है।बिहार का मजदूर, राजस्थान में भवन निर्माण कर रहा है,तमिलनाडु का युवक, पंजाब की मंडियों में मजदूरी कर रहा हैऔर सबका मकसद एक ही “घर भेजने लायक पैसे इकट्ठा कर लूं, ताकि वहां रोटी जलती रहे।”जिन्हें हम “अनस्किल्ड लेबर” कहते हैं,असल में वही इस देश की “अनदेखी रीढ़” हैं।इनकी मेहनत, इनका पसीना, इनके फटे कपड़े ये सब रोटी की ईएमआई हैं।देश की जीडीपी बढ़ रही है, लेकिन अम्मा के चूल्हे पर अब भी धुआं नहीं उठता।मूल्यवृद्धि इतनी ‘बुद्धिजीवी’ हो गई है कि दाल भी अब थाली में नहीं, टीवी डिबेट में मिलती है।सरकारी घोषणाएं कहती हैं “हर गरीब को अनाज मिलेगा।”और गोदामों में चूहे, लोकतंत्र की तरह, गोदाम फाड़कर खा जाते हैं।
शिक्षा और भूख का गठबंधन
गांव के स्कूलों में मध्यान्ह भोजन योजना आती है,बच्चे स्कूल नहीं आते पढ़ने वे आते हैं रोटी खाने।अभिभावक कहते हैं “पढ़ाई तो बाद में देख लेंगे, पर बच्चा दोपहर में कुछ खा तो लेगा।”इस देश में ‘भूख’ अभी भी शिक्षा से बड़ी जरूरत है।ऑनलाइन शिक्षा का सपना तब सपना ही रह जाता हैजब घर में बिजली नहीं, इंटरनेट नहीं, और पेट खाली हो।
राजनीति – भूख का सबसे पुराना व्यापारी
हर चुनाव में “गरीब की रोटी” सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा होती है चुनाव खत्म होते ही, वही रोटी सत्ताधीशों की थाली में परोसी जाती है।पिछली सरकार कहती है“हमने गरीबों को अनाज दिया।”वर्तमान सरकार कहती है –“हमने मुफ्त राशन बढ़ाया।”और अगली सरकार कहेगी –“हमने थाली में दाल भी दी!”मगर गरीब पूछता है“मुझे रोटी क्यों नहीं मिलती बिना लाइन में लगे, बिना आधार-लिंक, बिना फ़ॉर्म भरे?”अब तो सरकारें गरीबों को राशन देती हैं,पर यह नहीं बताती कि कब तक?और क्यों वो इतना गरीब है कि उसे हर बार “मुफ्त” चाहिए? कोविड काल में मास्क से चेहरा छिपा था,अब पेट की भूख छिपी है।सरकारें कहते हैं – "भविष्य डिजिटल होगा!"पर सवाल ये है – भूख भी ऐप से मिटेगी क्या?एक ऐप आया था "फ्री रोटी योजना"लेकिन नेटवर्क वहीं था जहां रोटी पहले से मुफ्त मिलती थी भाषणों में।
महंगाई – रसोई की सबसे बड़ी साजिश
अब प्याज रोते नहीं, रुलाते हैं।टमाटर अब सब्जी नहीं, निवेश बन गया है।गैस सिलिंडर की कीमतें सुनकर रोटियाँ खुद जल जाती हैं,क्योंकि अब उसे सेंकने के लिए "सब्सिडी" नहीं,बल्कि 'राजनीतिक समीकरण' चाहिए।घर की गृहणी अब "रोटियाँ नहीं गिनती",बल्कि "दिन गिनती है कब यह महीने की कमाई खत्म होगी।"डिजिटल इंडिया में Analog भूखआपके पास UPI है, गूगल पे है, डिजिटल राशन कार्ड है,लेकिन आपके पास अगर भूख है, तो वह ऐप में लॉगिन नहीं होती।सरकारी पोर्टल कहता है “भोजन की गारंटी” ग्रामीण कहता है “नेटवर्क नहीं आ रहा।”अब गरीब को रोटी चाहिए,पर पहले उसे चाहिए बायोमेट्रिक, आधार, OTP, और कभी-कभी स्थानीय प्रतिनिधि की सिफारिश।
वित्त मंत्रालय की नजर में भूख एक आँकड़ा है
जब बजट बनता है,तो किसान और मज़दूर सिर्फ “वर्ग” बन जाते हैं “बीपीएल”, “ईडब्ल्यूएस”, “रूरल पुअर”...लेकिन ये वर्ग किस दिन दो जून की रोटी से ऊपर उठेंगे?किस दिन उनकी थाली में 'सम्मान' परोसा जाएगा?
सोशल मीडिया पर भूख – एक प्रदर्शन
अब गरीब की भूख भी ‘वायरल कंटेंट’ है।किसी बच्चे की वीडियो वायरल हो जाए कि वो मिट्टी खा रहा है,या कोई बुज़ुर्ग सड़क किनारे पड़ा है तो कुछ दिन ‘हाशिये पर आई मानवता’ की बातें होती हैं।फिर अगला मुद्दा आ जाता है और गरीब वहीं रह जाता है अपनी भूख के साथ, अपने गुमनाम अंधेरे में।
मानवीय पहलू अब रोटी भी इज्ज़त मांगती है
भूखा होना अब अपमान नहीं,रोटी मांगना अपमान है।क्योंकि अब लोग दान करते हैं पर दृष्टि से, आवाज़ से, और व्यवहार से एहसास करा देते हैं कि “हम ऊपर हैं, तुम नीचे हो।”अब भीख नहीं मिलती “रोटी की शर्तों” पर सम्मान मिलता है।क्या रोटी अब भी दो जून की है?अब रोटी एक सामाजिक प्रश्न नहीं राष्ट्रीय चुनौती बन चुकी है। जहाँ एक वर्ग फूड वेस्टिंग कर रहा है,वहीं दूसरा वर्ग फूड हंटिंग में है।सवाल अब सिर्फ रोटी का नहीं,सवाल है इंसान के पेट की गरिमा का। रोटी अगर मेहनत से न मिले,तो वह ज़हर हो जाती है।अगर रोटी को दया बनाकर परोसा जाए,तो वह अपमान हो जाती है।अब दो जून की रोटी मिलना कोई जीवन नहीं, एक युद्ध है।यह लड़ाई है गरीबी बनाम महंगाई की,भूख बनाम व्यवस्था की,और इंसानियत बनाम उदासीनता की।सवाल यह नहीं कि रोटी कहाँ है।सवाल यह है कि रोटी के पीछे भागता आदमी अब इंसान बचा भी है या सिर्फ उपभोक्ता?और अगर रोटी के लिए लोकतंत्र चुप हो जाए तो वह लोकतंत्र नहीं, भूख का तंत्र है। ✒️सुशील शर्मा✒️
: योगी आदित्यनाथ जी द्वारा अपने आवास पर महाकुम्भ-2025 की उत्तर प्रदेश पुलिस कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया गया
Sun, Jun 1, 2025
योगी आदित्यनाथ जी द्वारा अपने आवास पर महाकुम्भ-2025 की उत्तर प्रदेश पुलिस कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया गया
उपरोक्त कॉफी टेबल बुक को कुल 11 भागों में विभाजित किया गया है जिसके प्रथम भाग मे कुम्भ की आस्था के इतिहास, द्वितीय भाग में विभिन्न अखाड़ों के बारे मे संक्षिप्त जानकारी एवं उनकी पेशवाई, तृतीय भाग में विभिन्न पवित्र स्नान, चतुर्थ भाग में महाकुंभ की डिजिटल निगरानी हेतु बनाए गए इंटिग्रेटेड कमांड एण्ड कंट्रोल सिस्टम (IIIC), पांचवें भाग में सात स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था, छठे भाग में पुलिस की विशेष इकाई जैसे ATS कमांडो, जल पुलिस, स्निफर डॉग, एनएसजी कमांडो आदि के व्यवस्थापन, सातवें भाग में डिजास्टर मैनेजमेंट, आठवें भाग में खोया पाया केन्द्र, नवें भाग में डिजिटल मैनेजमेंट (सोशल मीडिया अन्य समस्त डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म) पर प्रसारित जागरूकता व महाकुम्भ में आए प्रमुख अतिथियों के पॉडकास्ट का विवरण, दसवें भाग में प्रयागराज सहित उत्तर प्रदेश के अन्य तीर्थ स्थानों जैसे काशी, मथुरा, अयोध्या आदि का विवरण तथा ग्यारहवें भाग में महाकुम्भ में आए एवं अति विशिष्ट महानुभावों का विवरण है।स्वच्छ, सुरक्षित, सुव्यवस्थित महाकुम्भ-2025, प्रयागराज की भव्य-दिव्य और अनुपम स्मृतियों को संजोए यह 'कॉफी टेबल बुक' महाकुम्भ के सफल आयोजन में उत्तर प्रदेश पुलिस समेत विभिन्न सुरक्षा इकाइयों के समर्पण, कर्तव्यनिष्ठा तथा योगदान से साक्षात्कार का एक अवसर प्रदान करेगी।