: हमारे कृष्ण (दोहे) एवं कृष्ण मुझे अपना लो,गीत
Sun, Aug 25, 2024
हमारे कृष्ण
दोहे
कृष्ण कन्हैया क्या लिखूं ,आप जगत आधार।योगेश्वर जग के गुरु ,आप अगम्य अपार।मन्वन्तर वैवस्वतः अट्ठाइस के पार।कृष्ण अष्टमी भाद्रपद ,कृष्ण लिया अवतार।अर्धरात्रि की रोहणी ,मात देवकी गर्भ।काल कोठरी जेल की ,कृष्ण जन्म संदर्भ।बहुयामी श्री कृष्ण का ,है विराट व्यक्तित्वसंघर्षों की धार पर ,बना ईश अस्तित्व।जन्म काल से ही रहा ,मृत्यु का संघर्ष।जीवन भर सहते रहे ,संकट पीर अमर्ष।हैं मनुष्य श्री कृष्ण या ,योगी संत सुजान।परिभाषा श्री कृष्ण की ,सबसे कठिन विधान।जीवन भर भटका किये ,बने सहारा दीन।कर्मयोग जीवन जिया ,योगी बने प्रवीण।सुख दुःख से आबद्ध है ,पूरा कृष्ण चरित्र।शठता के शत्रु रहे ,सदा सत्य के मित्र।कृष्ण आत्म के सार हैं ,चेतन सत्य स्वरुप।ज्ञान भक्ति सद् भाव के ,ईश्वर शक्ति अनूप।राधा प्रेम स्वरुप है ,कृष्ण प्रेम का अर्थअर्थ रूप दोनों मिलें ,बनता प्रेम समर्थ।संघर्षों की राह पर ,सदा सत्य परिवेश।कर्म करो फल त्याग कर ,यही कृष्ण सन्देश।यही सिखाता है हमें ,कृष्ण चरित आचार।मानव को संसार में ,क्या करना व्यवहार।
कृष्ण मुझे अपनालो
गीत
मोर मुकुट पीतम्बर धारीतुम ब्रज के हो रसिया।नन्द जसोदा के तुम लालातुम सबके मन बसिया।बिना तुम्हारे इस दुनिया मेंकोई नहीं सहारो।मूढ़मति सब तुमने तारेअब मुझको भी तारो।कोई नहीं मेरा इस जग मेंकृष्ण मुझे अपना लो। सब दीनों के तुम रखवालेसबके पालन हारी।मैं दीनों का दीन चरण मेंअब तो सुनो बिहारी।लाख बुराई मेरे अंदरपर तुमको है पूजा।मात्र एक ही तुम सच्चे होऔर नहीं है दूजा।इस भव सागर के भंवरों सेप्रभु जी मुझे निकालो। मद से भरा हृदय है मेराकटु वाणी मन कपटी।स्वार्थ सरोवर में मन डूबाअवगुण बुद्धि लिपटी।बीती उमर ज्ञान नहीं पायाभव चक्कर में उलझा।नहीं रास्ता है अब कोईतू ही अब सब सुलझा।दुःख भरे निर्मम काँटों सेमाधव मुझे बचा लो।
कृष्ण जन्माष्टमी पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ
सुशील शर्मा
: गाडरवारा,पति के दीर्घायु होने की कामना से रखा उपवास सातुड़ी तीज पर घर घर पूजा
Fri, Aug 23, 2024
पति के दीर्घायु होने की कामना से रखा उपवास
सातुड़ी तीज पर घर घर पूजा
गाडरवारा । राजस्थानी मारवाड़ी समाज की महिलाओं व्दारा सामुहिक रूप से विभिन्न स्थानों पर लोकपरम्पराओ के संवर्धन की दिशा में अनेक पावन पर्व मनाये जाते हैं इसी श्रृंखला में विगत रात्रि महिलाओं ने सातुड़ी तीज स्थापित परम्परा के अनुसार उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया /विशेष रूप से नवविवाहिता महिलाओं ने पहली सातुड़ी तीज पर बढ चढ कर सुहाग के मंगलमय श्रृंगार नये आभूषणों, से सजधर कर शामिल रही ।उल्लेखनीय है कि इस दिन अपने अपने जीवन साथी पतिदेव के साथ जन्म जन्मांतर तक रहने के साथ अपने परिवार व परिजनों की समृध्दि के लिए भगवान शिव पार्वतीजी के सम्मुख कामना प्रार्थना करती हैं /इस अवसर पर उपवास भी रखा जाता है / और निम्बोडी की पूजा अर्चना, कथा वाचन करने के उपरांत चन्द्रमा के दर्शन, पूजा अर्चना करने के बाद अपना उपवास पूर्ण करती हैं / इस पावन दिवस को सातुड़ी तीज के नाम से जाना जाता है /इस दिन गेहूं, चावल,, चना का सत्तू नामक मीठा व्यंजन बनाने की परम्परा है । वही दूसरी ओर महिलाओं व्दारा इस दिन मिलने के लिए एक दूसरे के घरों घर जाकर पांवाधोक करते हुए अपने बडो से आशीर्वाद प्राप्त करती है/ इस दिन बनने वाला मिष्ठान समाज के विभिन्न वर्गों में सर्वप्रिय है और आज भी कुछ परिवार अपने परिचित और निकटम लोगों को आंमत्रित कर सत्तू का रसास्वादन कराने की पुरानी परम्पराएं बनाये रखे हुए हैं - अनेक लोगों को इस दिन का इंतजार रहता है क्योंकि यह व्यंजन बाजारों या मारवाड़ी परिवार के अलावा चलन में नहीं /इसका स्वाद अपने आप में अलग ही रहता है और इसकी पहचान भी अलग है।
: राष्ट्रीय जीवदया पर्यावरण यात्रा व अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन 23, 24 और 25 अगस्त 2024 को
Tue, Aug 20, 2024
राष्ट्रीय जीवदया पर्यावरण यात्रा व अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन 23, 24 और 25 अगस्त 2024 को
नरसिंहपुर भागीरथ तिवारी समस्त महाजन द्वारा 23, 24 और 25 अगस्त 2024 को राष्ट्रीय जीव दया पर्यावरण यात्रा व अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया जा रहा है।गुजरात के धर्मज , अहमदाबाद, भाभर एवम राजस्थान के सिरोही पावापुरी में यह तीन दिवसीय आयोजन होगा।यह सेमिनार पर्यावरण संरक्षण और जीवों के प्रति दया भाव को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।इस सेमिनार में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ, पर्यावरणविद्, जीवदया प्रेमी, गोशाला संचालक और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल होंगे। इसमें पर्यावरण प्रदूषण के कारण और निवारण ,जीव विविधता, जीवों के संरक्षण और उनके आवासों की सुरक्षा,जलवायु परिवर्तन एवम इसके प्रभाव और इससे निपटने के उपाय, गौ संवर्धन, गौशाला को आत्मनिर्भर बनाने ,स्वदेशी अहिंसक कृषि पद्धति, जल संचयन, गोचर संवर्धन से गोपालन , पंचगव्य गौउत्पाद निर्माण, देसी पेड़ों व भारतीय प्राचीन जीवन शैली से स्वस्थ पर्यावरण जैसे विभिन्न के विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।यह सेमिनार पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने और उन्हें सक्रिय रूप से इसमें योगदान देने के लिए प्रेरित करेगा।समस्त महाजन संस्था के मैनेजिंग ट्रस्टी गिरीश भाई शाह से 9820020976, राजस्थान संपर्क प्रमुख रविंद्र कुमार जैन से 9414498270 संपर्क करके इस सेमिनार के लिए पंजीकरण करवाया जा सकता है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के गौ सेवा गतिविधि राष्ट्रीय प्रमुख एवं राष्ट्रीय पर्यावरण प्रमुख भी इसमें मार्गदर्शन देने के लिए उपस्थित रहेंगे। भारत सरकार के भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड के सदस्य तथा पशु कल्याण प्रतिनिधि के साथ साथ भागीरथ तिवारी भी इसमें भाग लेंगे। श्री तिवारी ने बताया कि पर्यावरण एवं गौसेवा के क्षेत्र में कार्य करने वाले देशभर के विभिन्न संत महात्माओं का भी इसमें सानिध्य मिलेगा।