: नरसिंहपुर, कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष श्री हेमंत तिवारी ने की श्रमिकों के कल्याण संबंधी योजनाओं की समीक्षा
Tue, Dec 20, 2022
कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष श्री हेमंत तिवारी ने की श्रमिकों के कल्याण संबंधी योजनाओं की समीक्षानरसिंहपुर,।मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष श्री हेमंत तिवारी ने श्रमिकों के कल्याण से संबंधित 49 श्रेणियों की 20 विभिन्न योजनाओं की समीक्षा सोमवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में की। मुख्यमंत्री जन कल्याण (शिक्षा प्रोत्साहन) योजना के अंतर्गत इंजीनियरिंग एवं मेडिकल की पढ़ाई के लिए फीस शासन द्वारा वहन की जायेगी। श्री तिवारी ने कर्मकार कल्याण मंडल के अंतर्गत श्रमिकों की सुविधा के लिए रैन बसेरा एवं निर्माण पीठा श्रमिक आश्रय (शेड) निर्माण कराये जाने के लिए प्रस्ताव देने एवं अपंजीकृत श्रमिक की मृत्यु पर अंत्येष्टी एवं अनुग्रह सहायता योजना से संबंधित प्रकरण 15 दिवस के भीतर भेजने के निर्देश सभी नगरीय निकायों के सीएमओ एवं जनपदों के सीईओ को दिये। श्री तिवारी ने जिले के समस्त शासकीय कार्यालयों में श्रमिकों के उत्थान से संबंधित विभिन्न योजनाओं के फ्लैक्स/ बैनर/ होर्डिंग लगाने एवं श्रम सप्ताह का आयोजन करने के निर्देश बैठक में दिये। श्रमिकों के उत्थान के लिए श्रमिक संघ के अध्यक्ष द्वारा दिये गये सुझाव पर उन्होंने परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई के लिए आश्वस्त किया। बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत डॉ. सौरभ संजय सोनवणे, अपर कलेक्टर श्री दीपक कुमार वैद्य, सहायक श्रम पदाधिकारी, सभी जनपदों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं नगरीय निकायों के मुख्य नगर पालिका अधिकारी, श्रमिक संघ के अध्यक्ष व सदस्य और अन्य अधिकारी मौजूद थे। श्रम निरीक्षक श्री नीरज कुमार पटैल ने श्रम विभाग द्वारा मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अंतर्गत संचालित शासन की योजनाओं की जिले में प्रगति की जानकारी दी गई।
: स्त्री होने का अर्थ{आलेख} पं.सुशील शर्मा की कलम से
Tue, Dec 20, 2022
स्त्री होने का अर्थ{आलेख}मैं स्त्री के ऊपर कई साल से कविता लिखने की कोशिश कर रहा हूं मैं अक्सर पुरुष होने के नाते यह समझने की कोशिश में लगा हूँ कि एक महिला होने का क्या मतलब है। लेकिन हर बार जब मैं अपनी कलम उठाता हूं, मुझे डर लगता है कि मैं उन भावों को परिभाषित करने में सक्षम भी हूँ या नहीं या शब्दों में एक ऐसी तस्वीर पेंट कर दूँगा, जो मेरे पुरुष अहंकार को संतुष्ट करती हो ,एक ऐसी तस्वीर जो नरम स्वर ध्वनियों और कमजोर शारीरिक बल सहनशीलता की मिशाल त्याग की प्रतिमूर्ति या जो पुरुष करने में सक्षम नहीं है या जो पुरुष के बूते से बाहर है उन भावों को शब्दों में पिरोकर एक स्त्री का चित्र खींच दूंगा ,सब लोगों की वाहवाही तो मिलेगी किन्तु लेखन के साथ न्याय नहीं होगा। ।एक स्त्री होने के बारे में लिखना मुश्किल है।" मेरा मानना है कि "स्त्री " शब्द का वास्तव में कोई मतलब नहीं है, क्योंकि यह हमेशा पुरुष के विरोध में परिभाषित होता है।हमने कभी स्त्री को देह से अलग कर परिभाषित करने की कोशिश नहीं की उसमे हमने कभी मनुष्य नहीं देखा सिर्फ लिंग देखा है और शायद इसी कारण कोई भी स्त्री को सही परिभाषित नहीं कर सका क्योंकि उसकी परिभाषा हमेशा पुरुष के सापेक्ष रही है। एक पुरुष होने का मतलब है कि आप अपनी स्थिति पर नियंत्रण रखना चाहते हैं, तो एक महिला होने से दूसरे लोगों की उम्मीदों पर निर्भर रहना पड़ता है।हजारों वर्ष पहले, जब वेदों का बोलबाला था, भारतीय समाज में स्त्री-पुरुष के बीच भेदभाव नहीं बरता जाता था। इसके फलवरूप समाज के सभी कार्यकलापों में दोनों की समान भागीदारी होती थी। पुराणों के अनुसार जनक की राजसभा में महापंडित याज्ञवल्क्य और मैत्रेयी नामक विदुषी के बीच अध्यात्म-विषय पर कई दिनों तक चले शास्त्रार्थ का उल्लेख है। याज्ञवल्क्य द्वारा उठाए गए दार्शनिक प्रश्नों का उत्तर देने में विदुषी मैत्रेयी समर्थ हुईं।मेरे अनुसार एक पुरुष की पहुँच के बाहर की बारीक संवेदनाओं का अनुभव एक स्त्री कर सकती है। पुरुष अपनी बुद्धि से संचालित है जबकि नारी अपनी आंतरिक संवेदनाओं से संचालित होती है।स्त्री रूपी रचना अद्भुत है । यही हर पुरुष की ताकत है , जो उसे प्रोत्साहित करती है। वह सभी को खुश देखकर खुश रहतीँ है। हर परिस्थिति में हंसती रहती है । उसे जो चाहिए वह लड़ कर भी ले सकती है। उसके प्यार में कोइ शर्त नहीं है। उसका दिल टूट जाता है जब अपने ही उसे धोखा दे देते हैं ।स्त्री होने का अर्थ है अपने सुन्दर दिल के अनुसार व्यवहार करना क्योंकि स्त्री का दिल कभी हार नहीं मानता उसमे हर सपने ,हर रिश्ते को अपनाने और संतुष्ट करने की क्षमता होती है। स्त्रियों के सपने उनकी महत्वाकांक्षाएं और सम्बन्ध वास्तविक धरातल से जुड़े होते हैं। इस संसार में स्त्रियों ने वो कठिन काम किये हैं जो पुरुषों के लिए शारीरक और मानसिक तौर पर लगभग असंभव हैं। मगर हर परिस्थिति से समझौता करना भी ये जानती है।विश्व के कई विषयों का वैज्ञानिक विश्लेषण करके समझने में पुरुष समर्थ था। लेकिन उसके लिए पास में ही रहने वाली नारी की बारीक संवेदनाओं को समझना संभव नहीं हुआ। जो चीज अबूझ होती है, उसके प्रति डर पैदा होना स्वाभाविक है। इसी भय के कारण पुरुष ने नारी को अपनी नजर ऊंची करने का भी अधिकार नहीं दिया, उसे दूसरे दर्जे का बनाए रखा। इसमें पुरुष का शारीरिक बल काम आया। फिर अपने बुद्धि-बल से उसने ऐसा कुचक्र रचा जिसके प्रभाव में पडक़र नारी को सदा पुरुष की छत्रछाया में रहना पड़ा। सामाजिक प्रक्रिया हमेशा जरूरत पर आधारित होती है। अलग-अलग लोगों की अलग-अलग जरूरतें होती हैं। इसी आधार पर लोग एक साथ आते हैं और एक समाज बनाते हैं, उसी आधार पर हम समाज के नियम बनाते हैं कि कैसे हम दूसरों के अधिकार क्षेत्र में घुसे बिना अपनी जरूरतों को पूरा कर सकते हैं।तो महिलाओं को अपनी स्त्री-प्रकृति की विशिष्टता को खोने नहीं देना चाहिए। सफल होने की कोशिश में आप पुरुष मत बनिए, क्योंकि पुरुष बुरी तरह से अपने जीवन का अर्थ तलाश रहे हैं। आगे चलकर हो सकता है औरतों का मोहभंग हो जाए, लेकिन कम से कम जीवन के शुरुआती दौर में तो एक महिला कई तरीके से पुरुष के जीवन को एक मायने देती है। यह पुरुष के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है।आज के समाज में महिलाओं पर दबाव बहुत बड़ा है और स्त्रियां पुरुषों की दृष्टि में अपने को साबित करने के लिए उच्च आकांक्षाओं और प्रतिमान लक्ष्यों तथा पुरुष के समान दिखने या उनसे ज्यादा श्रेष्ठ मानकों पर खरा उतरने के लिए उनके साथ प्रतिस्पर्धा के लिए तत्पर हैं उनका यह कार्य प्रसंशनीय है किन्तु इसमें वह स्वयं के अस्तित्व को छोड़ कर पुरुष जैसा बनने या दिखने या काम करने की मानसिकता उन्हें पीछे धकेल रही है ,उन्हें ये सोच अपूर्णता की और लेजा रही है। अनादि काल से लेकर अभी तक की महिलाओं का इतिहास अगर हम देखें तो सिर्फ वही महिलाएं अपने अस्तित्व को समग्रता पर ले जा पाई हैं, जिन्होंने कभी भी पुरुष जैसा बनने की कोशिश नहीं कि बल्कि स्त्री के अस्तित्व के साथ वो अनूठे काम किये हैं जो पुरुष के लिए लगभग असंभव हैं। हम हमेशा स्त्रियों से "सिद्ध करो कि तुम बेटे से बेहतर हो "या पति से बेहतर हो या पुरुष से बेहतर हो "कि अपेक्षा करते है और स्त्रियाँ इस अपेक्षा पर खरी उतरने की कोशिश में स्वयं के अस्तित्व को भूल जाती हैं। स्त्री या पुरुष का अलग अलग अस्तित्व ही इस जगत का आधार है और कोई भी व्यक्तित्व अपने आप में पूर्ण नहीं होता है। सभी का अपूर्ण होना ज्यादा दिलचस्प है क्योंकि "परिपूर्ण" व्यक्ति होने के बजाय के स्वयं के अस्तित्व का होना ही सौंदर्य का प्रतीक है। और स्त्री का सौंदर्य उसके अपने अस्तित्व को पहचानने में हैं न कि पुरुष जैसा बनने में।मैं इस मिथक में विश्वास करने से इंकार करता हूँ कि सभी महिलाएं एक सामान्य बंधन साझा करती हैं। सच्चाई यह है कि हम सभी एक दूसरे से बहुत अलग हैं। हम प्रत्येक विशेषाधिकार और अलग जीवन अनुभवों के साथ रहते हैं।सभी महिलाओं को एक ही प्रकार की चीज समझ कर साझा करने के बजाय,हम अगर उसके मादा जननांग को अलग करके देखें तो शायद महिला या स्त्री या औरत को समझने में आसानी होगी ।हरेक समाज के पुरुष और स्त्रियों के रहन सहन और जीवन स्तर के कई शोधों से यह निष्कर्ष निकालता है कि महिला को कभी भी लैंगिक आज़ादी नहीं मिली है वह हमेशा से लिंग भेद का शिकार रही है और इसका दोष हम ईश्वर के ऊपर मढ़ने से नहीं चूकते कि स्त्री को तो उसने ही कमजोर बनाया है "दूसरे शब्दों में, अगर हम बात करें तो सामाजिक संदर्भ में आप कौन हैं, आप कैसे सोचते हैं और आप क्या करते हैं। और इन विचारों, व्यवहारों और संबंधों के साथ में, हम सभी सामाजिक संदर्भ का हिस्सा बन जाते हैं।इन सब व्यवहारों में हम लिंग भेद करते है। " क्या एक ऐसा समाज हो सकता है जहां पुरुष और महिलाओं के समान स्थान हैं? विडंबना यह है कि हर स्थान पर जैविक शरीर के लिंग के अनुसार से स्त्री और पुरुष के स्थान और व्यवहारों का निर्णय किया जाता है उसमे ईश्वर की समानता के स्त्रियां अपने व्यक्तित्व से इतर इतने सम्बन्ध ओढ़े रहती है कि उनका वास्तविक अस्तित्व स्वयं उनके लिए ही एक अबूझ पहेली बन जाता है वो एक माँ ,बेटी ,पत्नी ,चाची ,भाभी और न जाने कितने संबंधों को इतनी शिद्दत से निभाती हैं कि उसका जो वास्तविक स्वरुप ईश्वर ने उसे दिया है वो कहीं खो जाता है। और इन व्यवहारों के इर्दगिर्द अपनी सारी जिंदगी झोंक कर एक पतिव्रता ,अच्छी मां ,अच्छी पत्नी और न जाने क्या क्या उपमाएं लेकर और इस संसार से विदा हो जाती हैं। वह कभी अपने को पहचान ही नहीं पाती कि वो कौन है।स्त्रियों द्वारा अपने अस्तित्व को क्यों नकार दिया जाता है ये मनोविज्ञानियों के लिए शोध का विषय होना चाहिए।स्त्रियाँ जीवन में अपने नैतिकता और मूल्यों से जीतीं हैं और ये नैतिक मूल्य ही उनको महानता की और प्रेरित करते हैं यही मूल्य आपको दुनिया में महत्वपूर्ण कुछ करने के लिए उत्साहित करते हैं। बच्चों के रूप में, हमें हमेशा नैतिक व्यक्ति होने के लिए कहा गया था और हमारे मूल्यों को समझने के लिए शिक्षित किया गया है । मुझे लगता है, जब हम बड़े होते हैं हम उन महत्वपूर्ण गुणों को भूलते जाते है उन मूल्यों को जो हमें यह सिखाते हैं कि ईश्वर की बनाई सृष्टि में सब जीवित और अजीवित कृतियों को समानता का अधिकार है। दुनिया की आधी आबादी महिलाओं की है ।उन्हें पूरा सम्मान दिए जाने की जरूरत है ।समाज को बार बार इस बात को समझाने की जरूरत है कि महिलाओं की कितनी हिस्सेदारी होनी चाहिए।
: नरसिंहपुर जिले के प्रमुख समाचार
Mon, Dec 19, 2022
सैटेलाईट इमेज/ एआई आधारित गिरदावरी निर्धारित समयावधि में पूर्ण करने के निर्देश
नरसिंहपुर।
आयुक्त भू- अभिलेख मध्यप्रदेश ने रबी मौसम 2022- 23 के लिए सैटेलाईट इमेज/ एआई आधारित गिरदावरी के संबंध में पटवारियों को प्रशिक्षण देकर निर्धारित समय में गिरदावरी का कार्य किये जाने के लिए निर्देशित किया है। इस संबंध में कलेक्टर सुश्री ऋजु बाफना ने जिले के सभी तहसीलदारों को निर्धारित समयावधि में गिरदावरी का कार्य पूर्ण करना सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया है।
इस सिलसिले में निर्धारित समयावधि के अनुसार ग्राम की सीमा के भीतर गिरदावरी 21 दिसम्बर 2022 से 20 जनवरी 2023 तक होगी। सैटेलाइज इमेज/ एआई सहित किसान/ पटवारी फसल की तुलना 22 जनवरी 2023, तुलनात्मक जानकारी की उपलब्धता 23 जनवरी 2023, विसंगतियों का निराकरण 23 जनवरी से 26 जनवरी 2023, दावा- आपत्ति/ त्रुटि सुधार 28 जनवरी तक और तहसीलदार द्वारा सभी दावा/ आपत्ति का सारा पोर्टल के माध्यम से निराकरण 31 जनवरी 2023 तक किया जाना है।
उपरोक्तानुसार गिरदावरी कार्य में सैटेलाइट इमेज/ एआई आधारित नवीन तकनीक का उपयोग किया जायेगा, जिससे संबंधित पटवारी ग्राम की सीमा में अथवा खेत पर जाकर सारा एप के माध्यम से फसल गिरदावरी संबंधी जानकारी, फोटो एवं लोकेशन सुरक्षित कर गिरदावरी कर सकेंगे। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी के लिए पंजीयन गिरदावरी डाटा के आधार पर किया जाता है। फसल बीमा योजना अधिसूचना आदि कार्य भी गिरदावरी डाटा पर आधारित होते हैं।
इस संबंध में कलेक्टर ने उच्चतम गुणवत्ता के साथ गिरदावरी का कार्य उपरोक्तानुसार निर्धारित समय सीमा में पूर्ण कराया जाना सुनिश्चित करने के निर्देश सभी तहसीलदारों को दिये हैं।
किसान स्वयं गिरदावरी का कार्य एमपी किसान एप के माध्यम से कर सकेंगे
गिरदावरी का कार्य स्वयं किसान द्वारा प्ले स्टोर पर उपलब्ध एमपी किसान एप के माध्यम से किया जा सकेगा। इस एप पर रजिस्ट्रेशन कर किसान उपरोक्तानुसार निर्धारित समय- सीमा में यह कार्य कर सकते हैं।
युवाओं को उद्योग, व्यवसाय स्थापित करने के लिए प्रशिक्षण हेतु अब 22 दिसम्बर तक आवेदन आमंत्रित
नरसिंहपुर।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से उद्यमिता विकास केन्द्र सेडमैप भोपाल द्वारा जिले के शिक्षित बेरोजगार युवक- युवतियों को स्वयं का उद्योग/ व्यवसाय स्थापित करने के लिए तीन ट्रेडों फैशन डिजायनिंग व गारमेंट मैकिंग, फूड प्रोसेसिंग तथा टेली एकाउंटिंग में 6 सप्ताह का उद्यमिता सह कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया जायेगा। प्रशिक्षण में शामिल होने के लिए जिले के मूल निवासी इच्छुक आवेदक अब 22 दिसम्बर तक जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र नरसिंहपुर में जिला कार्यक्रम समन्वयक से कार्यालयीन समय में सम्पर्क कर अपना आवेदन दे सकते हैं। पूर्व में आवेदन की अंतिम तिथि 19 दिसम्बर थी, जिसे उपरोक्तानुसार बढ़ाया गया है। इस संबंध में उनके मोबाइल नम्बर 9977149453 पर भी सम्पर्क किया जा सकता है।
फैशन डिजायनिंग एवं गारमेंट मैकिंग और फूड प्रोसेसिंग ट्रेड में आवेदक को कम से कम 8 वीं उत्तीर्ण और टेली एकाउंटिंग ट्रेड में कम से कम 12 उत्तीर्ण होना जरूरी है। प्रत्येक ट्रेड में 30 आवेदकों का चयन साक्षात्कार के माध्यम से किया जायेगा। प्रशिक्षण में आरक्षित वर्ग और बीपीएल श्रेणी के आवेदकों को प्राथमिकता दी जायेगी। आवेदक की उम्र 18 से 45 वर्ष तक होनी चाहिये। आवेदन के साथ अंकसूची, आधार कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, समग्र आईडी व 2 पासपोर्ट साईज फोटो संलग्न करना होंगी। प्रशिक्षुओं को व्यावहारिक एवं प्रायोगिक प्रशिक्षण नि:शुल्क दिया जायेगा।
जिला पंचायत की साधारण सभा की बैठक 22 दिसम्बर को
नरसिंहपुर।
जिला पंचायत की साधारण सभा की बैठक 22 दिसम्बर को अपरान्ह 3 बजे से जिला पंचायत कार्यालय के सरदार वल्लभ भाई पटैल सभाकक्ष में आयोजित की जायेगी। बैठक में 15 वां वित्त 2023- 24 की कार्य योजना पर चर्चा होगी और विद्युत एवं कृषि विभाग की समीक्षा की जायेगी।
जिला पंचायत की सामान्य प्रशासन समिति की बैठक 22 दिसम्बर को
नरसिंहपुर।
जिला पंचायत की सामान्य प्रशासन समिति की बैठक 22 दिसम्बर को दोपहर 2.30 बजे से जिला पंचायत कार्यालय के सरदार वल्लभ भाई पटैल सभाकक्ष में आयोजित की जायेगी। बैठक में जिला पंचायत के आय- व्यय पर चर्चा होगी और पिछली बैठक का पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जायेगा।