: डॉ. साहब का 'संतुलित' संसार ( सामयिक व्यंग्य - सुशील शर्मा)
Fri, May 23, 2025
डॉ. साहब का 'संतुलित' संसार
( सामयिक व्यंग्य - सुशील शर्मा)
डॉ. साहब, अपने नाम के आगे आयुर्वेद भूषण लगाए घूमते थे, मगर उनकी देहयष्टि देखकर कोई भी अनभिज्ञ व्यक्ति उन्हें तंदुरुस्ती के दुश्मन का तमगा दे सकता था। पेट उनका ऐसे बाहर निकला रहता था, जैसे उन्होंने अपने भीतर ब्रह्मांड का समस्त गुरुत्वाकर्षण केंद्र बना लिया हो, और चेहरे पर हमेशा एक तैलीय चमक, मानो कोई विज्ञापन ब्रेक चल रहा हो। आजकल डॉ. साहब ने एक नया मिशन पकड़ा हुआ था संतुलित भोजन। उनके क्लीनिक में घुसते ही अब दवाइयों की गंध से ज़्यादा, लेक्चर की गंध आती थी। दीवारों पर लगे चार्ट, जिनमें पत्ता गोभी का परिवारिक चित्र, और गाजर का वंशवृक्ष बना होता था, आने वाले मरीजों को पहले ही डरा देते थे। "तो, शर्मा जी," डॉ. साहब अपने विशाल डेस्क के पीछे से दहाड़े, "क्या बताया था मैंने आपको? मल्टीग्रेन की रोटी! हाँ! आपके पेट में जो गैसीय ब्रह्मांड घूम रहा है न, उसे सिर्फ यही शांत कर सकती है।" शर्मा जी बेचारे डगमग कुर्सी पर ऐसे बैठे थे, जैसे किसी स्कूल के प्रिंसिपल की क्लास में आ गए हों। "जी डॉ. साहब, पर वो...""पर क्या? परवल की सब्जी! परवल की सब्जी क्यों नहीं खा रहे आप? दाल तो घर में बनती ही होगी, पर कौन सी? अरहर, मूंग, मसूर – नाम गिनाएँ? नहीं, नहीं, नहीं! मैं बताता हूँ कौन सी दाल खानी है! और हाँ, सुबह-सुबह उठकर भीगे बादाम और अखरोट खाते हैं?" डॉ. साहब की आवाज़ में एक अजीबोगरीब 'पौष्टिकता' थी, जैसे वे खुद इन सारी चीज़ों को खाकर नहीं, बल्कि सिर्फ इनका नाम लेकर ही ऊर्जावान हो गए हों। मजा तो तब आता था, जब डॉ. साहब खुद अपने संतुलित भोजन का बखान करते-करते अचानक अपने सहायक को इशारा करते। सहायक तुरंत एक बड़े से थर्मस और एक स्टील के टिफिन के साथ प्रकट होता। डॉ. साहब बड़े ठाठ से थर्मस से अपनी हर्बल टी निकालते, जिसमें से घी की तेज़ गंध आती थी, और टिफिन खोलते, जिसमें एक मोटी-सी पराठे नुमा चीज़ और साथ में बेसन के लड्डू होते थे।"यह देखिए शर्मा जी," वे पराठे का एक निवाला तोड़ते हुए कहते, "यह है मेरा मल्टीग्रेन स्पेशल पराठा, इसमें मैंने खुद अपने हाथों से... खैर, आप नहीं समझ पाएँगे। और ये लड्डू... ये ऊर्जा के लिए हैं। आप भी खाइएगा।" वे इतना कहकर एक और लड्डू अपने विशाल मुँह में डालते, और उनके गालों पर संतुलित तेल की चमक और बढ़ जाती। उनकी सबसे बड़ी विडंबना यह थी कि वे दूसरों को जो खाने की सलाह देते थे, खुद उसका पालन शायद ही करते हों। उनकी अपनी सुबह की मल्टीग्रेन रोटी अक्सर मैदे की कचौरी और छोले में बदल जाती थी, और परवल की सब्जी की जगह किसी तेज़ मिर्च वाले आलू-पनीर की सब्जी ले लेती थी। दाल का तो खैर क्या कहना, वह अक्सर किसी रेस्टोरेंट के बटर चिकन में बदल चुकी होती थी। और भीगे बादाम-अखरोट? वे शायद ही कभी उनकी जीभ तक पहुँच पाते थे, क्योंकि रात के खाने के बाद आइसक्रीम और गुलाब जामुन का सत्र शुरू हो जाता था। एक बार एक मरीज ने हिम्मत करके पूछ ही लिया, "डॉ. साहब, आप इतनी 'संतुलित' बातें करते हैं, तो आपकी सेहत..."डॉक्टर साहब ने तुरंत बात काटी, हाथ हिलाते हुए बोले, "अरे, मेरी बात छोड़िए! मैं तो शोध कर रहा हूँ। ये सब प्रयोग मैं अपनी देह पर कर रहा हूँ, ताकि आप लोगों को सही ज्ञान दे सकूँ। मैं जो सलाह देता हूँ, वह मेरे व्यक्तिगत जीवन के लिए नहीं, बल्कि मानव समाज के व्यापक कल्याण के लिए है!"और इतना कहकर, डॉक्टर साहब एक गहरी साँस लेते, जिसका उद्देश्य शायद अपने विशाल पेट को अंदर खींचना था, मगर वह प्रयास हमेशा की तरह असफल रहता। और फिर वे एक नई ऊर्जा के साथ अगले मरीज को संतुलित आहार का ज्ञान देने को तैयार हो जाते, जबकि उनका अपना शरीर चीख-चीखकर कहता "मुझे बचाओ, इस संतुलन से!" ✒️सुशील शर्मा✒️
: मंत्री प्रहलाद पटेल सींगरी नदी पथ एवं पाट को साफ़- सफ़ाई अभियान में हुए शामिल
Fri, May 23, 2025
मंत्री प्रहलाद पटेल सींगरी नदी पथ एवं पाट को साफ़- सफ़ाई अभियान में हुए शामिल
मप्र केबिनेट मंत्री पंचायत एवं ग्रामीण विकास व श्रम विभाग प्रहलाद पटेल की विशेष मौजूदगी में जल गंगा संवर्धन अभियान से प्रेरित मणिनागेंद्र सिंह फाउंडेशन द्वारा स्वयं के व्यय से प्राचीन धरोहर "सींगरी नदी" पथ एवं पाट की साफ़- सफ़ाई हुई। मंत्री श्री पटेल ने सिंगरी नदी के उद्गम स्थल से 5 किमी तक नदी का पथ एवं पाट अतिक्रमण मुक्त कर नदी के पुनर्जीवन के लिए पद यात्रा का शुभारंभ किया। साथ ही नदी पुनर्जीवन के लिए स्थानीय लोगों से संवाद भी किया।प्रहलाद पटेल ने प्रेरक कहानी के माध्यम से कहा कि जो समाज से लेता है उसे याद नहीं किया जाता लेकिन जो समाज को देता है वो हमेशा याद रखा जाता है। व्यक्ति हमेशा स्वयं के लाभ के लिए लिए पूरी जिंदगी भर मेहनत करता है, जो दूसरों के लिए करें यह बड़ी बात होती है। सींगरी नदी के पुनर्रूद्धार करने का यह प्रयास शुरू हुआ। जब नदी की एक जल धारा को ठीक करेंगे, तब नदी में शुद्ध जल का बहाव होगा, तब हम नरसिंहपुर में कुछ बेहतर कार्य कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि आज डांगीढाना जाकर मुरलीपौड़ी से चौराखेड़ा तक पैदल चलेंगे और कल यहां से समनापुर तक जायेंगे। किसानों से अपील करें कि दूषित पानी का उपयोग अपनी खेत में सिंचाई के लिए नहीं करें, आने वाले समय में गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। सींगरी नदी कब से है यह कोई नहीं जानता, हमें पीढ़ियों से इसका आशीर्वाद मिला है।मंत्री पटेल ने कहा कि उनके पूज्यगुरू श्रीबाबाश्री जी ने बताया था कि चाहे वह नदी का संगम हो, पर्वतों, वृक्ष और मनुष्य का संगम हो, जीवन की संभावनायें जहाँ होती है, उसे रौंदने की गलती नहीं करना। हर व्यक्ति को बेहतर जीवन की तलाश है। राज्य सरकार जल गंगा संवर्धन अभियान चला रही है। अभियान के तहत खेत- तालाब का निर्माण, कुंओ व प्राचीन बावड़ियों की साफ- सफाई का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मैंने तय किया है कि नदियों के उद्गम को देखा जाये। यदि छोटी नदी बारहमासी होंगी, तो बड़ी नदी भी बारहमासी होंगी। उन्होंने कहा कि हम सभी ने सींगरी नदी से कुछ न कुछ लिया है, अब सिंगरी नदी को वापिस करने का समय आ गया है। उन्होंने सभी नागरिकों से निवेदन किया कि सींगरी नदी में गीष्मऋतु में पुनर्रूद्धार, बरसात के समय में पौधरोपण और बरसात उपरांत बोरी बंधान से आगे नदी में बेहतर पानी रहेगा। इस पर हम सभी बेहतर काम कर सकते हैं। हम पानी से प्यार करते हैं, लेकिन यह पानी कहां से आता है, उसका पता नहीं है।इस अवसर पर विधायक महेन्द्र नागेश, पूर्व राज्यमंत्री जालम सिंह पटेल, रामसनेही पाठक, अन्य जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक मौजूद थे।
: शासन के निर्देशानुसार राईस मिलों की पुन: जांच करें- कलेक्टर श्री सक्सेना
Fri, May 23, 2025
शासन के निर्देशानुसार राईस मिलों की पुन: जांच करें- कलेक्टर श्री सक्सेना
कलेक्टर श्री दीपक सक्सेना ने आज राईस मिल की जांच के संबंध में समीक्षा बैठक की। इस दौरान उन्होंने सभी एसडीएम से उनके द्वारा किये गये जांच प्रतिवेदन पर चर्चा की और कहा कि शासन के जो निर्देश है उसके अनुसार पुन: जांच करें। कलेक्टर श्री सक्सेना ने कहा कि जांच का आधार शासन के निर्देश तथा जिला प्रशासन द्वारा समय-समय पर दिये गये निर्देश हों। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वाहन का परिवहन विभाग के पोर्टल में किस श्रेणी में दर्ज है यह देखें। धान परिवहन के दौरान टोल एंट्री है या नहीं। साथ ही जीपीएस सिस्टम का भी इस्तेमाल करें। उन्होंने कहा कि धान चालान, ट्रेक चालान, रिलीज ऑर्डर के बारे में विस्तृत जांच करें। धान के बोरे किस वाहन में आये इसकी भी जांच करें। कलेक्टर श्री सक्सेना ने कहा कि मिलर्स को धान परिवहन की जांच नियमानुसार व सतर्कता से करें। इसमें लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जायेगी। सभी जांच अधिकारी जांच उपरांत जांच प्रतिवेदन शीघ्रता से प्रदाय करें। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि खाद्य सामग्री में संगठित रूप से सोच समझकर किया गया अवैधानिक कार्य गंभीर अपराध की श्रेणी में है, अत: सभी अधिकारी इस दिशा में सावधानी से जांच करें। बैठक में सीईओ जिला पंचायत श्री अभिषेक गहलोत, अपर कलेक्टर श्री नाथूराम गोंड, सभी एसडीएम व उपार्जन से संबंधित अधिकारी मौजूद थे।