: भारतीय सेना के शौर्य सम्मान में निकाली गई राष्ट्र भक्तों के द्वारा तिरंगा यात्रा
Sat, May 24, 2025
भारतीय सेना के शौर्य सम्मान में निकाली गई राष्ट्र भक्तों के द्वारा तिरंगा यात्रा
नरसिंहपुर करेली 24 मई*हिंदुस्तान का गौरव पूरे विश्व में बड़ा है,भारतीय सेना ने आपनी जान जोखिम में डालकर देश की सुरक्षा सुनिश्चित की है अतः वीर जवानों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने हेतु शहर स्तरीय तिरंगा यात्रा करेली नगर में निकाली गई सेना के सम्मान में इस तिरंगा यात्रा में सभी शहरवासियों धार्मिक ,सामाजिक स्वयंसेवी संगठन, स्कूली छात्र छात्रायें,खिलाड़ी टीमें,डाॅक्टर्स, वकील पत्रकार, व्यापारी एवं करेली तहसील अंर्तगत ग्रमीण जनों सहित सभी वर्गों की उपास्थिति रही है।कार्यक्रम के समापन के अवसर पर भूतपूर्व सैनिकों का सम्मान किया गया। लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व राज्यसभा सांसद कैलाश जी सोनी ने सभा को सम्बोधित किया। भाजपा नगर मंडल करेली अध्यक्ष जितेंद्र स्वामी ने आभार व्यक्त किया।
रिपोर्टर भागीरथ तिवारी
: सेना के शौर्य को सलाम, सिहोरा में निकाली गई भव्य यात्रा
Sat, May 24, 2025
सेना के शौर्य को सलाम, सिहोरा में निकाली गई भव्य यात्रा
ऑपरेशन सिन्दूर भारतीय सेना के शौर्य की सराहना करते हुए विधानसभा तेंदूखेड़ा के कौड़िया मण्डल में क्षेत्रीय विधायक विश्वनाथ सिंह जी पटेल के नेतृत्व में भाजपा जिला उपाध्यक्ष श्री हरीप्रताप सिंह ममार, वरिष्ठ नेता श्री रमाकांत शर्मा, जिला पंचायत सदस्य श्री धनंजय पटेल, मंडल अध्यक्ष श्री प्रताप कौरव, श्री ईश्वर पटेल सहित अन्य की उपस्थिति में तिरंगा यात्रा निकाली गई। इस दौरान ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का जश्न मनाया गया है और जय जवान का नारा लगाया गया। इसके साथ ही शहीदों को श्रद्धांजलि भी दी गई। गौरतलब की भारतीय सशस्त्र सेनाओं द्वारा 6-7 मई की रात पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर (पीओके) में किए गए एक सैन्य हवाई अभियान था। भारत ने कहा कि इसका उद्देश्य पाकिस्तान और आतंकी संगठन से जुड़े पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर में आतंकवादी ढाँचे को निशाना बनाना था। तिंरगा यात्रा में बड़ी संख्या में नागरिकों ने यात्रा निकालकर देश की बहादुर सेना के जज्बे को सलाम किया। तिरंगा यात्रा में सभी नागरिकों द्वारा भारत माता के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर यात्रा का प्रारंभ हुआ तिरंगा यात्रा पूरे नगर में देश भक्ति गीत एवं भारत माता के जयकारे लगाए गए।
रिपोर्टर सना खान
: मैं अब भी प्रतीक्षा में हूँ,
Fri, May 23, 2025
मैं अब भी प्रतीक्षा में हूँ
(जैव विविधता पर एक कविता)
सुशील शर्मा
मैं पृथ्वी हूँ।जिन पैरों से तुमने मुझे रौंदा,उनमें मेरी मिट्टी थी।जिस छाया में तुमने विश्राम किया,वह मेरे वनों से निकली थी।तुम्हारे फेफड़ों में जो साँस चल रही है,वह मेरी बनाई हवा है। मैं तुम्हारी जननी थी,मैंने तुम्हें जन्म दियाकेवल मनुष्य नहीं,हिरण को भी, बाघ को भी,तोते, मछली, चींटी को भी।मैंने किसी को कम नहीं दियाऔर किसी को अधिक नहीं छीना।सभी को संतुलन दिया,जीवन की एक विराट श्रृंखला दी,जहाँ एक का जीवन,दूसरे के जीवन की शर्त थी। लेकिन तुमने क्या किया? तुमने संतुलन तोड़ा।तुमने सोचा तुम सबसे श्रेष्ठ हो।तुमने नदियों को बाँध दिया,पहाड़ों को काट डाला,तुमने जंगलों को जला दियाऔर फिर कहा “यह विकास है।” तुम्हारा विकासकितना अलग है मेरे विकास से!मैंने तो बीज से वटवृक्ष बनाया,तुमने वटवृक्ष को कागज़ बना डाला।मैंने सागर रचा, उसमें जीवन बोया,तुमने उसे रसायनों से भर दिया।मैंने जैव विविधता रचीविविध रंग, आकार, वाणी, आचरण।हर जीव में मैंने एक कहानी बुनी,हर फूल में एक रहस्य रखा,हर पक्षी की उड़ान में एक स्वप्न छोड़ा। और तुमने? तुमने उन्हें विलुप्त कर दियाबिना पछतावे,बिना उत्तरदायित्व के।हर साल सैकड़ों प्रजातियाँतुम्हारी अनदेखी सेहमेशा के लिए इस धरती से चली जाती हैं। और फिर तुम शोक मनाते हो“बाघ अब दुर्लभ है,”“पानी अब खत्म हो रहा है,”“जलवायु बदल रही है।” नहीं!यह जलवायु नहीं,तुम बदल रहे होअपने स्वार्थ में, अपनी गति में,अपने अत्याचार में। तुम भूल गएकि तुम अकेले नहीं हो।तुम किसी विशाल जैविकताने-बाने का हिस्सा हो।जिसमें एक सूक्ष्म जीव भीतुम्हारे अस्तित्व के लिए आवश्यक है।एक मधुमक्खी के लुप्त हो जाने सेतुम्हारा पूरा भोजन-चक्र डगमगा सकता है। सतत विकास क्या है? क्या वह गगनचुंबी इमारतें हैंजो धूप को छीन लेती हैं?या वह सड़कें जो नदियों कीराह में दीवार बन जाती हैं? सतत विकास वह हैजो वृक्षों को काटे बिना छाया दे,जो धरती को बाँधे बिना ऊर्जा पैदा करे,जो नदी के गीत को रोके बिनातुम्हें गति दे सके।सतत विकास वह हैजहाँ मनुष्य भी बढ़ेऔर बाकी जीवन भी साँस ले सके। मैं पूछती हूँक्या तुम्हें याद है,जब तुम बच्चे थे,तब तुमने गिलहरी को देखा थाया तितली को हाथ में पकड़ने की चेष्टा की थी?क्या तुम्हारे भीतर आज भीउन लहरों की स्मृति हैजो बिना पूछे भी तुम्हें अपनाती थीं? प्रकृति तुम्हारा उपभोग नहीं चाहतीवह तुम्हारा सहभाग चाहती है।उसे पूजा मत बनाओ,उससे संवाद करो।उससे लड़ो मत,उसके साथ चलो। मुझे खेद है—कि आज जैव विविधता दिवसएक आयोजन बनकर रह गया है।कुछ भाषण, कुछ फोटो, कुछ पोधारोपणऔर फिर वापसउसी पुराने मार्ग परजो केवल विकास कीरफ्तार जानता है,दिशा नहीं। मैं अब भी प्रतीक्षा में हूँकि तुम रुकोगे।अपनी मशीनों से,अपने अंधे प्रगति-पथ से,और एक बार फिरमेरी आँखों में झाँकोगे।जहाँ अब भी पक्षियों के घोंसले हैं,जहाँ हिरण अब भी डरते हैं,जहाँ झील अब भी सूखने से पहलेआकाश की छाया अपने भीतर सँजोती है। मैं पृथ्वी हूँअब भी जीवन देती हूँ।पर अब चाहती हूँसाझेदारी।तुमसे।तुम्हारे बच्चों से।तुम्हारे विकास से। क्या तुम तैयार हो?अपने भीतर की उस संवेदना कोफिर से जागृत करने के लिए,जो एक तितली के पंखों की थरथराहट मेंसृष्टि की कविता पढ़ सकती है? क्या तुम तैयार हो?विकास को फिर से परिभाषित करने के लिएजहाँ ‘आधुनिक’ होने का अर्थ‘निर्दयी’ होना न हो,बल्कि ‘सहजीवी’ होना हो। क्या तुम तैयार हो?प्रकृति से माफ़ी माँगने के लिएमुझे समझने के लिए,मेरे साथ चलने के लिए। मैं पृथ्वी हूँ,मैं क्षमा कर सकती हूँयदि तुम सचमुच बदल सको।मैं पुनः फूल खिला सकती हूँ,यदि तुम केवलतोड़ने की जगहसीखो सँजोना। अब समय नहीं हैकेवल भाषणों का,अब समय हैसंवेदनाओं को क्रिया में बदलने का। मैं अब भी प्रतीक्षा में हूँकिसी ऐसे मानव कीजो मनुष्य से आगे बढ़करफिर से ‘जीव’ बन सके। सुशील शर्मा