: नरसिंहपुर जिले के प्रमुख समाचार
Wed, Jan 24, 2024
गणतंत्र दिवस की फायनल रिहर्सल का एसपी व अपर कलेक्टर ने किया अवलोकन
नरसिंहपुर। जिला मुख्यालय पर गणतंत्र दिवस पर स्टेडियम ग्राउंड में आयोजित होने वाले मुख्य समारोह की तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। समारोह की फायनल रिहर्सल का पुलिस अधीक्षक श्री अमित कुमार व अपर कलेक्टर श्रीमती अंजली शाह ने अवलोकन किया। इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी रिहर्सल की गई।
जिले में 24 जनवरी को 6 ग्राम पंचायतों में पहुंची विकसित भारत संकल्प यात्रा
गोटेगांव में शामिल हुए विधायक श्री नागेश
नरसिंहपुर। केंद्र शासन की योजनाओं का सभी पात्र हितग्राहियों को लाभ पहुँचाने चलाई जा रही विकसित भारत संकल्प यात्रा के अंतर्गत बुधवार को जिले की 3 जनपद पंचायतों की 6 ग्राम पंचायतों में शिविर लगाये गये। विकसित भारत संकल्प यात्रा 24 जनवरी को जनपद पंचायत नरसिंहपुर की ग्राम पंचायत ऊसरी व गोरखपुर, जनपद पंचायत गोटेगांव की ग्राम पंचायत करेलीकला व चंदली, जनपद पंचायत चांवरपाठा की ग्राम पंचायत सडूमर व महगवां (गु.) पहुंची। शिविरों में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और बड़ी संख्या में क्षेत्र के नागरिकों ने शिरकत की। केंद्र सरकार और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी इस मौके पर नागरिकों को दी गई।विकसित भारत संकल्प यात्रा के दौरान जनपद पंचायत गोटेगांव की ग्राम पंचायत ऊसरी एवं गोरखपुर में आयोजित कार्यक्रम में विधायक श्री महेन्द्र नागेश ने विभिन्न योजनाओं के स्वीकृति पत्रक वितरित किये। उन्होंने देश को विकसित राष्ट्र बनाने के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प को साकार करने की शपथ भी दिलाई। उन्होंने शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के बारे में बताया और इसका लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी और ग्रामीणजन मौजूद थे।शिविरों के दौरान स्थानीय नागरिकों का स्वास्थ्य परीक्षण भी किया गया। विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों की ई-केवायसी करने, आधार लिंकिंग, आधार अपडेशन एवं आधार रजिस्ट्रेशन के लिये भी स्टॉल लगाये गये थे। इसके साथ ही यात्रा के साथ चल रहे प्रचार रथ से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सन्देश का प्रसारण किया गया। लोगों को भारत को विकसित बनाने का संकल्प भी दिलाया गया। केंद्र शासन की योजनाओं का लाभ प्राप्त कर चुके हितग्राहियों ने अपने अनुभव भी सुनाये।
बालिका दिवस के अवसर पर किया बच्चियों को सम्मानित
नरसिंहपुर।राष्ट्रीय बालिका दिवस 24 जनवरी के अवसर पर बेटी बचाओ- बेटी पढाओं योजनांतर्गत 19 जनवरी से 24 जनवरी 2024 तक विविध गतिविधियों एवं कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा बेटी बचाओ- बेटी पढाओ शपथ ग्रहण समारोह ,सीएसआर बाल संरक्षण, बालिकाओं के कौशल विकास के महत्व, खेल को बढ़ावा देने, बाल- विवाह रोकने, स्वच्छता, स्वास्थ्य, शिक्षा पर आधारित विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।बालिका सप्ताह की समाप्ति पर कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई कक्ष में बालिका दिवस समापन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर अपर कलेक्टर श्रीमती अंजली शाह, जिला योजना एवं सांख्यिकीय अधिकारी, श्रीमती लतावान, अन्य अधिकारी- कर्मचारी और प्रतिभागी और उनके परिजन मौजूद थे।कार्यक्रम की शुरूआत दीप प्रज्जवलन व कन्या कन्या पूजन कर किया गया। कार्यक्रम में अपर कलेक्टर श्रीमती अंजली शाह ने कहा कि बालिकाओं को उच्च शिक्षा प्रदान की जाये,लिंग भेद नहीं हो। बालिकाओं को हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाये।कार्यक्रम में हस्ताक्षर अभियान में हस्ताक्षर कर बेटी बढाओ- बेटी बचाओ योजना का संदेश दिया। एमएलबी स्कूल की क्रीड़ा अधिकारी ने बताया कि बालिकाओं के विकास में खेल का भी विशेष महत्व है। जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी श्री राधेश्याम वर्मा ने बालिकाओं के लिये शासन की योजनाओं और कार्यक्रमों के बारे में जानकारी दी।कार्यक्रम में खो- खो प्रतियोगिता में राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त करने वाली एमएलबी विद्यालय की 03 छात्राओं एवं जिले की कक्षा 10 वीं में मैरिट आने वाली 13 छात्राओं को सम्मानित किया गया। इस दौरान रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया। इसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली सभी छात्राओं को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर सभी लोकल चैंपियनों को पौधे भी प्रदान किये गये। कार्यक्रम का संचालन पर्यवेक्षक श्रीमती चन्द्रिका सोनी व आभार प्रदार्शन पर्यवेक्षक श्रीमती नीरजा वर्मा ने किया।
नरसिंहपुर में पंचायत एवं ग्रामीण विकास व श्रम मंत्री श्री पटैल करेंगे ध्वजारोहण
नरसिंहपुर। गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 2024 को नरसिंहपुर जिले के मुख्य समारोह में प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास व श्रम मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटैल ध्वजारोहण करेंगे। जिला मुख्यालय पर नरसिंहपुर के स्टेडियम ग्राउन्ड पर आयोजित होने वाले मुख्य समारोह में मंत्री श्री पटैल सुबह 9 बजे राष्ट्रीय ध्वज फहरायेंगे और मुख्यमंत्री के संदेश का वाचन करेंगे।
गणतंत्र दिवस के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्य अतिथि द्वारा प्रात: 9 बजे ध्वजारोहण किया जाएगा। इसके पश्चात राष्ट्र धुन एवं सलामी, गुब्बारे छोड़े जायेंगे। प्रात: 9.05 बजे परेड कमांडर द्वारा परेड निरीक्षण हेतु अनुरोध व प्रात: 9.07 बजे मुख्य अतिथि द्वारा परेड निरीक्षण होगा। प्रात: 9.15 बजे मुख्य अतिथि द्वारा मुख्यमंत्री के संदेश का वाचन किया जायेगा। प्रात: 9.30 बजे जयघोष एवं हर्ष- फायर के बाद प्रात: 9.36 बजे परेड द्वारा मार्च- पास्ट किया जायेगा। प्रात: 9.45 बजे मुख्य अतिथि परेड कमांडरों से परिचय प्राप्त करेंगे। प्रात: 9.50 बजे मध्यप्रदेश गान और प्रात: 10 बजे झांकियों का चल प्रदर्शन किया जायेगा। इसके पश्चात प्रात: 10.30 बजे मुख्य अतिथि द्वारा पुरस्कार वितरण और पूर्वान्ह 11 बजे कार्यक्रम का समापन होगा।
25 जनवरी को 6 ग्राम पंचायतों में पहुंचेगी विकसित भारत संकल्प यात्रा
नरसिंहपुर।भारत शासन की महत्वपूर्ण योजनाओं को पात्र अंतिम व्यक्ति तक लाभ देने के उद्देश्य से विकसित भारत संकल्प यात्रा जिले में आयोजित की जा रही है।
रूट चार्ट के अनुसार विकसित भारत संकल्प यात्रा 25 जनवरी को जनपद पंचायत नरसिंहपुर की ग्राम पंचायत खमरिया(नारिया) व कोदरास कला, जनपद पंचायत गोटेगांव की ग्राम पंचायत बेलखेड़ी मुआर व मुरदई और जनपद पंचायत चांवरपाठा की ग्राम पंचायत चिर्रिया व कौड़िया पहुंचेगी।
नगर पालिका गाडरवारा में 6 नवीन उचित मूल्य दुकान आवंटन के लिए 4 फरवरी तक ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित
नरसिंहपुर।मध्यप्रदेश खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के निर्देशानुसार जिले की नगर पालिका गाडरवारा में 6 नवीन उचित मूल्य दुकान सुभाष वार्ड, निरंजन वार्ड, राजेन्द्र बाबू वार्ड, राजीव वार्ड, बीजासेन वार्ड व कामथ वार्ड में आवंटन के लिए प्रक्रिया ऑनलाइन सम्पन्न की जायेगी। इस संबंध में पोर्टल https://rationmitra.nic.in पर 6 नवीन दुकानों के लिए पात्र संस्थायें 4 फरवरी 2024 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकती हैं। नियत तिथि के बाद प्राप्त आवेदनों पर कोई विचार नहीं किया जायेगा। दुकान आवंटन की कार्रवाई अनुविभागीय राजस्व अधिकारी गाडरवारा द्वारा की जायेगी। यह जानकारी अनुविभागीय राजस्व अधिकारी गाडरवारा ने दी है।
: सुभाष के रास्ते से आज़ादी के मायने [आलेख - सुशील शर्मा ]
Wed, Jan 24, 2024
सुभाष के रास्ते से आज़ादी के मायने
[आलेख - सुशील शर्मा ]
23 जनवरी, 1897 को ओडिशा के कटक में जानकीनाथ बोस एवं प्रभावती के घर जन्मे सुभाष चंद्र बोस का जीवन अत्यंत संघर्ष पूर्ण, शौर्यपूर्ण और प्रेरणादायी है।विवेकानंद की शिक्षाओं का सुभाष पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा। अपने विशिष्ट व्यक्तित्व एवं उपलब्धियों की वजह से सुभाष चन्द्र बोस भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखते है। सुभाष चन्द्र बोस का जन्म उस समय हुआ जब भारत में अहिंसा और असहयोग आन्दोलन अपनी प्रारम्भिक अवस्था में थें।बचपन से ही हमारे दिमाग में यह धारणा बैठा दी गयी है कि ‘गाँधीजी की अहिंसात्मक नीतियों से’ हमें आजादी मिली है। इस धारणा को पोंछकर दूसरी धारणा दिमाग में बैठाना कि ‘नेताजी और आजाद हिन्द फौज की सैन्य गतिविधियों के कारण’ हमें आजादी मिली- जरा मुश्किल काम है।कांग्रेस के अधिवेशन में नेताजी ने कहा था - “मैं देश से अंग्रेजों को निकालना चाहता हूँ। मैं अहिंसा में विश्वास रखता हूँ किन्तु इस रास्ते पर चलकर स्वतंत्रता काफी देर से मिलने की आशा है। उन्होंने क्रान्तिकारियों को सशक्त बनने को कहा। वे चाहते थे कि अंग्रेज भयभीत होकर भाग खड़े हों। वे देश सेवा के काम पर लग गए। न दिन देखा ना रात। उनकी सफलता देख देशबन्धु ने कहा था- मैं एक बात समझ गया हूँ कि तुम देश के लिए रत्न सिद्ध होगे।नेताजी ने अपने रेडियो सम्बोधन में आज़ाद हिन्द फ़ौज़ की वैधता को जाहिर करते हुए कहा था "मैं जानता हूँ कि ब्रिटिश सरकार भारत की स्वाधीनता की माँग कभी स्वीकार नहीं करेगी। मैं इस बात का कायल हो चुका हूँ कि यदि हमें आज़ादी चाहिये तो हमें खून के दरिया से गुजरने को तैयार रहना चाहिये। अगर मुझे उम्मीद होती कि आज़ादी पाने का एक और सुनहरा मौका अपनी जिन्दगी में हमें मिलेगा तो मैं शायद घर छोड़ता ही नहीं। मैंने जो कुछ किया है अपने देश के लिये किया है। विश्व में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाने और भारत की स्वाधीनता के लक्ष्य के निकट पहुँचने के लिये किया है। भारत की स्वाधीनता की आखिरी लड़ाई शुरू हो चुकी है। आज़ाद हिन्द फौज़ के सैनिक भारत की भूमि पर सफलतापूर्वक लड़ रहे हैं। हे राष्ट्रपिता! भारत की स्वाधीनता के इस पावन युद्ध में हम आपका आशीर्वाद और शुभ कामनायें चाहते हैं।"21 अक्टूबर 1943 को नेताजी ने आज़ाद हिन्द की अस्थाई सरकार की घोषणा की। 5 जुलाई 1943 को सिंगापुर में टाउन हॉल के सामने एक बड़े मैदान में सुभाष चन्द्र बोस ने सैनिक वर्दी में आज़ाद हिन्द फौज के अधिकारियों एवं सैनिकों से भव्य परेड में सलामी ली। अपने ऐतिहासिक भाषण में उन्होंने कहा- “आज मेरी ज़िंदगी में सबसे अधिक अभिमान करने का दिन है। क्योंकि आज ईश्वर की कृपा से मुझे संसार के सामने यह घोषणा करने का अवसर मिला है कि हिन्दुस्तान को आज़ाद कराने वाली सेना बन चुकी है। आज़ाद हिन्द फौज वह सेना है जो हिन्दुस्तान को अंग्रेजों के जुल्मों से मुक्त करवाएगी।” भाषण के अन्त में जब उन्होंने आज़ाद हिन्द फौज के सेनानियों को ‘चलो दिल्ली’ का नारा दिया तो सारा हॉल ‘इंक़लाब ज़िन्दाबाद’, ‘भारत माता की जय’ और ‘आज़ाद हिन्द’ के विजय घोष से गूंज उठा। लगभग 25 माह तक तूफ़ानी दौरे करके, सभाएँ करके भारतीय नागरिकों एवं सैनिकों में उन्होंने अभूतपूर्व आत्मविश्वास, एकता, निष्ठा एवं त्याग जैसे उच्चतम आदर्शों की भावना का संचार किया। स्वयंसेवक बनने के लिए क़तारें लग गईं। लोग स्वेच्छा से उन्हें धन देने लगे। हबीबुर्ररहमान नामक एक मुस्लिम व्यापारी ने उन्हें एक करोड़ की संपत्ति एवं रत्न दान में दिए। उसे इस त्याग के लिए ‘सेवक हिन्द’ की उपाधि दी गई।जोशीले भाषण में उन्होंने अपील की- ‘ईश्वर के नाम पर, पूर्वजों के नाम पर जिन्होंने भारतीयों को एक सूत्र में बांधकर एक राष्ट्र बनाया, उन स्वर्गवासी वीरों के नाम पर जिन्होंने शौर्य एवं आत्मबलिदान की परम्परा बनाई, हम भारतवासियों को देश की स्वतंत्रता के लिए युध्द करने और भारतीय झण्डे के नीचे आने का आहवान करते हैं।’ आज़ाद हिन्द की स्थापना के तुरंत बाद सुभाष चन्द्र बोस ने सिंगापुर में झाँसी रानी की रेजीमेन्ट का गठन किया। कैप्टन डॉ.लक्ष्मी स्वामीनाथन को इसका संचालक बनाया गया। इस संगठन में महिलाएँ नियमित परेड और राइफ़ल चलाती थीं। कुछ सेविकाएँ, नर्स तथा अन्य कार्य संभालती थीं। 28 अक्टूबर 1943 को जापान के प्रधानमंत्री जनरल तोजो ने पूर्वी एशिया के युध्द में अंग्रेजों से जीता गया अंडमान-निकोबार द्वीप नेताजी की इस अस्थायी सरकार के अधीन कर दिया गया। आज़ाद हिंद सरकार ने इस द्वीप का नाम शहीद एवं स्वराज द्वीप रखा।अडंमान-निकोबार के बाद भारत के पूर्वी द्वार बर्मा से अंग्रेजों को खदेड़कर वहाँ पर आज़ाद हिन्द सरकार का तिरंगा फहराने की महत्वाकांक्षा उनमें ज़ोर पकड़ रही थी। अत: अपना कार्यालय जनवरी 1944 में रंगून में स्थापित कर दिया। बर्मा के सभी भारतवासियों में अपार उत्साह का संचार हुआ।नेताजी के मार्गदर्शन में आज़ाद हिन्द फौज की सेनाएँ मलाया, थाइलैंड, बर्मा के सीमावर्ती क्षेत्रों को पार करती हुई भारत की सीमा तक पहुँच गई। कर्नल रतूड़ी के नेतृत्व में 4 फरवरी 1944 को अराकान युध्द के मोर्चे पर अंग्रेजों से घमासान युध्द करके वहाँ से अंग्रेजी सैनिकों को खदेड़कर 18 मार्च 1944 को विजय का झंडा फहराया तथा भारत भूमि पर अपने विजय का शंखनाद फूँका। मणिपुर के मोरांग पर तिरंगा फहराने के बाद 8 अप्रैल 1944 को कोहिमा का क़िला फ़तह कर लिया तथा इंफाल पर चारों ओर से घेरा डाल दिया।परन्तु इसके पश्चात् मानसून के भयकंर मौसम के हिसाब से तैयारी न होने के कारण आज़ाद हिंद फौज जो भारत की भूमि पर 150 मील अन्दर तक पहुँच चुकी थी, आगे न बढ़ सकी।उन्होंने घोषणा की कि अब भारत के पास सुनहरा मौका है उसे अपनी मुक्ति के लिये अभियान तेज कर देना चहिये। 8 सितम्बर 1939 को युद्ध के प्रति पार्टी का रुख तय करने के लिये सुभाष को विशेष आमन्त्रित के रूप में काँग्रेस कार्य समिति में बुलाया गया। उन्होंने अपनी राय के साथ यह संकल्प भी दोहराया कि अगर काँग्रेस यह काम नहीं कर सकती है तो फॉरवर्ड ब्लॉक अपने दम पर ब्रिटिश राज के खिलाफ़ युद्ध शुरू कर देगा। जुलाई 1940 मे 'हालवेट स्तम्भ' जो भारत की गुलामी का प्रतीक था, के इर्द-गिर्द सुभाष की यूथ ब्रिगेड के स्वयंसेवक भारी मात्रा में एकत्र हुए और देखते-देखते वह स्तम्भ मिट्टी में मिला दिया। स्वयंसेवक उसकी नींव तक की एक-एक ईंट तक उखाड़ ले गये। यह तो एक प्रतीकात्मक शुरुआत थी। इसके माध्यम से सुभाष ने यह सन्देश दिया कि जैसे उन्होंने यह स्तम्भ धूल में मिला दिया है उसी तरह वे ब्रिटिश साम्राज्य की भी ईंट-से-ईंट बजा देंगे।"आजाद हिन्द फौज को छोड़कर विश्व-इतिहास में ऐसा कोई भी दृष्टांत नहीं मिलता जहाँ तीस-पैंतीस हजार युद्धबन्दियों ने संगठित होकर अपने देश की आजादी के लिए ऐसा प्रबल संघर्ष छेड़ा हो।आजाद हिन्द फौज के माध्यम से भारत को अंग्रेजों के चंगुल से आजाद करने का नेताजी का प्रयास प्रत्यक्ष रूप में सफल नहीं हो सका किन्तु उसका दूरगामी परिणाम हुआ। सन् 1946 में रॉयल अयर फोर्स के विद्रोह इसके तुरंत बाद के नौसेना विद्रोह इसका उदाहरण है। नौसेना विद्रोह के बाद ही ब्रिटेन को विश्वास हो गया कि अब भारतीय सेना के बल पर भारत में शासन नहीं किया जा सकता और भारत को स्वतन्त्र करने के अलावा उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा।महात्मा गांधी और स्वयं के संबंधों पर सुभाषचन्द्र बोस ने लिखा है "महात्मा गाँधी और मेरे बीच हुई समझौता वार्ताओं से यह जाहिर हो गया कि एक तरफ गाँधी धड़ा मेरे नेतृत्व को कतई स्वीकार नहीं करेगा और दूसरी तरफ मैं कठपुतली अध्यक्ष बनने के लिए तैयार नहीं था। नतीजतन, मेरे लिए अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के अलावा कोई विकल्प ही नहीं बचा। मैंने 29 अप्रैल, 1939 को इस्तीफा दे दिया और कांग्रेस पार्टी के भीतर एक परिवर्तनकारी व प्रगतिशील समूह के गठन के लिए मैंने तुरंत कदम आगे बढ़ाए ताकि समूचा वाम धड़ा एक बैनर के तले एकजुट हो सके।” 26 जनवरी 1931 को कोलकाता में राष्ट्र ध्वज फहराकर सुभाष एक विशाल मोर्चे का नेतृत्व कर रहे थे तभी पुलिस ने उन पर लाठी चलायी और उन्हें घायल कर जेल भेज दिया। जब सुभाष जेल में थे तब गांधीजी ने अंग्रेज सरकार से समझौता किया और सब कैदियों को रिहा करवा दिया। लेकिन अंग्रेज सरकार ने सरदार भगत सिंह जैसे क्रान्तिकारियों को रिहा करने से साफ इन्कार कर दिया। भगत सिंह की फाँसी माफ कराने के लिये गांधीजी ने सरकार से बात तो की परन्तु नरमी के साथ। सुभाष चाहते थे कि इस विषय पर गांधीजी अंग्रेज सरकार के साथ किया गया समझौता तोड़ दें। लेकिन गांधीजी अपनी ओर से दिया गया वचन तोड़ने को राजी नहीं थे। अंग्रेज सरकार अपने स्थान पर अड़ी रही और भगत सिंह व उनके साथियों को फाँसी दे दी गयी। भगत सिंह को न बचा पाने पर सुभाष गांधीजी और कांग्रेस के तरीकों से बहुत नाराज हो गये।नवम्बर 1945 में दिल्ली के लालकिले में आजाद हिन्द फौज पर चलाये गये मुकदमे ने नेताजी के यश में वर्णनातीत वृद्धि की और वे लोकप्रियता के शिखर पर जा पहुँचे। अंग्रेजों के द्वारा किए गये विधिवत दुष्प्रचार तथा तत्कालीन प्रमुख राजनीतिक दलों द्वारा सुभाष के विरोध के बावजूद सारे देश को झकझोर देनेवाले उस मुकदमे के बाद माताएँ अपने बेटों को ‘सुभाष’ का नाम देने में गर्व का अनुभव करने लगीं। घर–घर में राणा प्रताप और छत्रपति शिवाजी महाराज के जोड़ पर नेताजी का चित्र भी दिखाई देने लगा।जहाँ स्वतन्त्रता से पूर्व विदेशी शासक नेताजी की सामर्थ्य से घबराते रहे, तो स्वतन्त्रता के उपरान्त देशी सत्ताधीश जनमानस पर उनके व्यक्तित्व और कर्तृत्व के अमिट प्रभाव से घबराते रहे। स्वातंत्र्यवीर सावरकर ने स्वतन्त्रता के उपरान्त देश के क्रांतिकारियों के एक सम्मेलन का आयोजन किया था और उसमें अध्यक्ष के आसन पर नेताजी के तैलचित्र को आसीन किया था। यह एक क्रान्तिवीर द्वारा दूसरे क्रान्ति वीर को दी गयी अभूतपूर्व सलामी थीनेताजी ने युवा वर्ग को आजादी की लड़ाई से जोड़ने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई। सिंगापुर के रेडियो प्रसारण द्वारा नेताजी के आह्वान, 'तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा' का ही परिणाम रहा जिसने युवाओं को प्रेरणा दी।बोस का मानना था कि युवा शक्ति सिर्फ गांधीवादी विचारधारा पर चलकर स्वतंत्रता नहीं पा सकती, इसके लिए प्राणों का बलिदान जरूरी है। यही वजह थी कि उन्होंने 1943 में 'आजाद हिंद फौज' को एक सशक्त स्वतंत्र सेना के रूप में गठित किया और युवाओं को इससे प्रत्यक्ष रूप से जोड़ा।द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जापान की सहायता से बनी इस फौज में उन्होंने महिलाओं के लिए 'झांसी की रानी' रेजिमेंट बनाकर महिलाओं को आजादी के आंदोलन में शामिल किया।नेताजी सुभाष चंद्र बोस की छवि हमेशा से एक 'विजनरी और मिशनरी' नेता के रूप में रही, जिन्होंने न सिर्फ पूर्णतः स्वतंत्र और लोकतांत्रिक भारत का स्वप्न देखा बल्कि उसे बतौर मिशन पूरा किया।उनके नेतृत्व की क्षमता के बारे में यह कहना गलत नहीं होगा कि यदि वह आजादी के समय मौजूद होते तो देश का विभाजन न होता और भारत एक संघ राष्ट्र के रूप में कार्य करता।
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: पुलिस अधीक्षक जबलपुर श्री आदित्य प्रताप सिंह ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सभी शाखा प्रभारियों की ली बैठक
Tue, Jan 23, 2024
पुलिस अधीक्षक जबलपुर श्री आदित्य प्रताप सिंह ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सभी शाखा प्रभारियों की ली बैठकलंबित पैंशंन, मेडिकल बिल, समयमान वेतनमान, पासपोर्ट, जी.पी.एफ/डी.पी.एफ/ एन.पी.एस. तथा अनुकंपा नियुक्ति सम्बंधी प्रकरण के शीघ्र निराकरण हेतु किया आदेशितआज दिनांक 23-1-2024 को शाम 5 बजे पुलिस कन्ट्रोलरूम में *पुलिस अधीक्षक जबलपुर श्री आदित्य प्रताप सिंह (भा.पु.से.)* द्वारा अति. पुलिस अधीक्षक शहर श्रीमति प्रियंका शुक्ला (भा.पु.से.), अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर दक्षिण) श्री कमल मौर्य, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर (उत्तर/यातायात) श्री प्रदीप कुमार शेण्डे, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) श्री सूर्यकांत शर्मा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण श्रीमति सोनाली दुबे, की उपस्थिति मे जबलपुर पुलिस अधीक्षक कार्यालय की सभी शाखाओं के प्रभारियों की बैठक ली गयी।
आपके द्वारा कार्यालय की ओ.एम. शाखा, पेंशन शाखा, स्थापना शाखा, एस.आर.सी शाखा, वेतन शाखा, भवन शाखा, पासपोर्ट शाखा, के सम्बंधित शाखा प्रभारियों से समस्यायें जानी एवं लंबित प्रकरणों के सम्बंध में पूछताछ करते हुये लंबी अवधी से शाखा में लंबित प्रकरणों की कारण सहित जानकारी ली एवं आवश्यक दिशा निर्देश देते हुये 15 दिवस में निराकरण करने हेतु आदेशित किया गया।
आपने पैंशन के लंबित प्रकरणों का 1 माह के अंदर निकाल करवाने हेतु निर्देशित किया तथा मेडिकल एवं अन्य आवश्यक कार्य के बिल जिनका बजट की कमी के कारण भुगतान समय पर नहीं हो पा रहा है उसके लिये पुलिस मुख्यालय को पत्राचार करवाकर स्वीकृति प्राप्त कर लंबित बिलों के निराकरण हेतु निर्देशित किया गया ।
जी.पी.एफ/डी.पी.एफ/एन.पी.एस. के एैसे प्रकरण जिनमें कोई समस्या आ रही हो तो सम्बंधित अधिकारी से संपर्क कर उसका प्राथमिकता के आधार पर निराकरण कराने तथा अनुंकपा नियुक्ति एवं पैंशन प्रकरण 15 दिवस कें अंदर निराकरण हेतु आदेशित किया ।बैठक में सभी शाखा प्रभारियों के अलावा प्रशिक्षु (भा.पु.से.) श्री आदर्श कांत शुक्ला, प्रशिक्षु (भा.पु.से.) श्री आदित्य पटले एवं रक्षित निरीक्षक श्री जय प्रकाश आर्य उपस्थित रहे।