: बीटीआई स्कूल में मेधावी छात्र हुए सम्मानित
Wed, Jul 24, 2024
बीटीआई स्कूल में मेधावी छात्र हुए सम्मानित
गाडरवारा। गत दिवस स्थानीय पीएमश्री शासकीय बालक उ मा विद्यालय (बीटीआई) में सत्र 23-24 के दसवीं एवं बारहवीं वार्षिक परीक्षा में उच्चतम अंक प्राप्त विद्यार्थियों का वैश्य महिला मंडल के द्वारा प्रतिभा सम्मान किया गया। उक्त कार्यक्रम के तहत 10 वी के 14 और 12 वी के 18 छात्रों को स्कूल बैग प्रदान किये गए । इस कार्यक्रम में वैश्य महिला मंडल की जिला अध्यक्ष श्रीमती सपना जैन,तहसील प्रभारी श्रीमती मृदुला अग्रवाल, तहसील अध्यक्ष मंजू जैन, कोषाध्यक्ष श्रीमती अंजलि अग्रवाल,शिखा नीखरा, किरण साहू, संगीता सोनी,गीता अग्रवाल, निर्मला पटेल, अनुराधा अग्रवाल, सुरभि नीखरा आदि बहनों ने छात्रों को सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन सुनीता शर्मा और शिल्पी गुप्ता द्वारा किया गया। संस्था प्राचार्य श्रीमती सुनीता पटेल के द्वारा सभी अतिथियों और छात्रों का अभिवादन किया गया। इस कार्यक्रम के सफल आयोजन में संस्था के समस्त स्टाफ के सराहनीय सहयोग और उपस्तिथि से छात्रों को प्रेरणा प्राप्त हुई।
: गाडरवारा,तिरंगा अंगीकार दिवस मनाया गया
Wed, Jul 24, 2024
तिरंगा अंगीकार दिवस मनाया गया
शासकीय माध्यमिक शाला स्टेशन गंज गाडरवारा में 22 जुलाई सोमवार को तिरंगा अंगीकार दिवस मनाया गया इस अवसर पर शाला के प्रधान पाठक विनोद सोनी ने बताया22 जुलाई 1947 को हमारे राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को संविधान द्वारा अंगीकृत किया गया था इसी उपलक्ष्य में पूरे देश भर में तिरंगे का अंगीकार दिवस मनाया जाता है इस तिरंगे की लंबाई चौड़ाई का अनुपात 3अनुपात 2 होता है ऊपर केसरिया रंग बीच में सफेद रंग नीचे हरा रंग और सारनाथ सम्राट अशोक की राजधानी में तीन शेरों के बीच लगा अशोक चक्र इसके बीच में सुशोभित किया गया चक्र की परिधि सफेद रंग के बराबर ही रखी गई है वर्तमान तिरंगा भारतीय राष्ट्रीय ध्वज 1916 में मछलीपट्टनम के पिंगली वेंकैया द्वारा डिजाइन किया गया था। हालांकि ध्वज में कई बदलाव हुए हैं, लेकिन इसके प्रारंभिक डिजाइन का श्रेय पिंगली वेंकैया को जाता है।अशोक चक्र को कर्तव्य का पहिया भी कहा जाता है. ये 24 तीलियाँ मनुष्य के 24 गुणों को दर्शातीं हैं. दूसरे शब्दों में इन्हें मनुष्य के लिए बनाये गए 24 धर्म मार्ग भी कहा जा सकता है.।राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे में समान अनुपात में तीन क्षैतिज पट्टियां हैं: केसरिया रंग सबसे ऊपर, सफेद बीच में और हरा रंग सबसे नीचे है। ध्वज की लंबाई-चौड़ाई का अनुपात 3:2 है। सफेद पट्टी के बीच में नीले रंग का चक्र है। भारत की संविधान सभा ने राष्ट्रीय ध्वज का प्रारूप 22 जुलाई 1947 को अपनाया।भारत के राष्ट्रीय ध्वज की ऊपरी पट्टी में केसरिया रंग है जो देश की शक्ति और साहस को दर्शाता है। बीच में स्थित सफेद पट्टी धर्म चक्र के साथ शांति और सत्य का प्रतीक है। निचली हरी पट्टी उर्वरता, वृद्धि और भूमि की पवित्रता को दर्शाती है।
चक्र
इस धर्म चक्र को विधि का चक्र कहते हैं जो तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व मौर्य सम्राट अशोक द्वारा बनाए गए सारनाथ मंदिर से लिया गया है। इस चक्र को प्रदर्शित करने का आशय यह है कि जीवन गतिशील है और रुकने का अर्थ मृत्यु है। हमें हमारे राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का सम्मान करना चाहिए इसे कभी नीचे नहीं गिरने देना चाहिए यदि किसी ने नीचे गिरा दिया है तो उसको उठाकर चुपचाप रख देना चाहिए और अकेले में नष्ट करना चाहिए यह गंदा और फटा नहीं होना चाहिए इस अवसर पर शाला की शिक्षिकाएं चंद्रिका कौरव गीता अग्रवाल अनीता सोनी ज्योति द्विवेदी मनोरमा ढिमोले कुसुम भार्गव ने भी अपने विचार व्यक्त किया कार्यक्रम का संचालन श्रीमती चंद्रिका कौरव ने किया ।
: गुरु पूर्णिमा पर पाली में ग्रामवासियों से शिक्षक हुए सम्मानित
Mon, Jul 22, 2024
गुरु पूर्णिमा पर पाली में ग्रामवासियों से शिक्षक हुए सम्मानित
गाडरवारा । गत रविवार गुरु पूर्णिमा के अवसर पर ग्राम पाली (खैरी) में ग्रामवासियों ने शासकीय प्राथमिक शाला के शिक्षकों को माला पहनाकर, शाल श्रीफल से सम्मानित किया । इस अवसर पर ग्राम सरपंच अजय द्विवेदी ने शाला के प्रधानपाठक सिराज अहमद सिद्दिकी एवं प्राथमिक शिक्षक ब्रजेश श्रीवास को सम्मानित करते हुए कहा कि हमारे गांव की प्राथमिक शाला में आप दोनों शिक्षकों के द्वारा किए गए बेहतर नवाचारों से बच्चों को बेहतर गुणवत्ता युक्त शिक्षा मिल रही है । ये सम्मान आप दोनों द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्यों का प्रतिफल है। इस अवसर पर प्रधानपाठक सिराज अहमद सिद्धिकी ने ग्रामवासियों द्वारा किए गए सम्मान के लिए उनका आभार जताया। इस मौके पर ग्राम सरपंच अजय द्विवेदी , शाला प्रबंधन समिति अध्यक्ष शिवपाल धानक , वार्ड पंच कुठारी राजपूत,गोरेलाल , लाल ठाकुर ,भगवान सिंह ठाकुर ,जितेंद्र राजपूत, संतोष ठाकुर ,ग्राम कोटवार शांति बाई , मुराली धानक एवं गायत्री स्वसहायता समूह के सदस्य गणआदि मौजूद थे ।