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: गाडरवारा,तिरंगा अंगीकार दिवस मनाया गया

Aditi News Team

Wed, Jul 24, 2024
तिरंगा अंगीकार दिवस मनाया गया शासकीय माध्यमिक शाला स्टेशन गंज गाडरवारा में 22 जुलाई सोमवार को तिरंगा अंगीकार दिवस मनाया गया इस अवसर पर शाला के प्रधान पाठक विनोद सोनी ने बताया22 जुलाई 1947 को हमारे राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को संविधान द्वारा अंगीकृत किया गया था इसी उपलक्ष्य में पूरे देश भर में तिरंगे का अंगीकार दिवस मनाया जाता है इस तिरंगे की लंबाई चौड़ाई का अनुपात 3अनुपात 2 होता है ऊपर केसरिया रंग बीच में सफेद रंग नीचे हरा रंग और सारनाथ सम्राट अशोक की राजधानी में तीन शेरों के बीच लगा अशोक चक्र इसके बीच में सुशोभित किया गया चक्र की परिधि सफेद रंग के बराबर ही रखी गई है वर्तमान तिरंगा भारतीय राष्ट्रीय ध्वज 1916 में मछलीपट्टनम के पिंगली वेंकैया द्वारा डिजाइन किया गया था। हालांकि ध्वज में कई बदलाव हुए हैं, लेकिन इसके प्रारंभिक डिजाइन का श्रेय पिंगली वेंकैया को जाता है। अशोक चक्र को कर्तव्य का पहिया भी कहा जाता है. ये 24 तीलियाँ मनुष्य के 24 गुणों को दर्शातीं हैं. दूसरे शब्दों में इन्हें मनुष्य के लिए बनाये गए 24 धर्म मार्ग भी कहा जा सकता है.। राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे में समान अनुपात में तीन क्षैतिज पट्टियां हैं: केसरिया रंग सबसे ऊपर, सफेद बीच में और हरा रंग सबसे नीचे है। ध्वज की लंबाई-चौड़ाई का अनुपात 3:2 है। सफेद पट्टी के बीच में नीले रंग का चक्र है। भारत की संविधान सभा ने राष्ट्रीय ध्वज का प्रारूप 22 जुलाई 1947 को अपनाया। भारत के राष्‍ट्रीय ध्‍वज की ऊपरी पट्टी में केसरिया रंग है जो देश की शक्ति और साहस को दर्शाता है। बीच में स्थित सफेद पट्टी धर्म चक्र के साथ शांति और सत्‍य का प्रतीक है। निचली हरी पट्टी उर्वरता, वृद्धि और भूमि की पवित्रता को दर्शाती है। चक्र इस धर्म चक्र को विधि का चक्र कहते हैं जो तीसरी शताब्‍दी ईसा पूर्व मौर्य सम्राट अशोक द्वारा बनाए गए सारनाथ मंदिर से लिया गया है। इस चक्र को प्रदर्शित करने का आशय यह है कि जीवन गति‍शील है और रुकने का अर्थ मृत्‍यु है। हमें हमारे राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का सम्मान करना चाहिए इसे कभी नीचे नहीं गिरने देना चाहिए यदि किसी ने नीचे गिरा दिया है तो उसको उठाकर चुपचाप रख देना चाहिए और अकेले में नष्ट करना चाहिए यह गंदा और फटा नहीं होना चाहिए इस अवसर पर शाला की शिक्षिकाएं चंद्रिका कौरव गीता अग्रवाल अनीता सोनी ज्योति द्विवेदी मनोरमा ढिमोले कुसुम भार्गव ने भी अपने विचार व्यक्त किया कार्यक्रम का संचालन श्रीमती चंद्रिका कौरव ने किया ।

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