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पर्यावरण और हमारी साँसे (वृक्ष रक्षति रक्षितः) : वृक्षों को काटकर कागज बनाना, फिर उस कागज पर 'पेड़ लगाओ' लिखना—यही आज की सबसे बड़ी अज्ञानता है

Aditi News Team

Sat, May 2, 2026

1.तक्ष शिला नालंदा से कागज तक का सफर

पुराने समय में हमारी शिक्षा **शिलालेखों** और **ताड़पत्रों** पर होती थी, जो हज़ारों सालों तक सुरक्षित रहते थे। सबसे बड़ी बात यह थी कि शिक्षा **प्रकृति की गोद में** (गुरुकुलों में) होती थी।

* **तब:** विद्यार्थी पेड़ों की छांव में बैठकर जीवन का सार सीखते थे।

* **अब:** हम उसी पेड़ को काटकर मेज (Table) बनाते हैं और उसी की लुगदी से कागज बनाकर उस पर "पर्यावरण बचाओ" का पाठ पढ़ते हैं। यह एक बड़ा विरोधाभास है।

2. शिक्षा का व्यवसायीकरण (शुभ-लाभ बनाम शुद्ध लाभ)

पहले शिक्षा एक संस्कार थी, जिसे **64 कलाओं** और **योग** के माध्यम से व्यक्ति के सर्वांगीण विकास के लिए दिया जाता था।

* आज शिक्षा एक **'प्रोडक्ट'** बन गई है।

* हर साल बदलती किताबें और स्टेशनरी का बढ़ता बोझ असल में ज्ञान के लिए नहीं, बल्कि व्यापार के लिए है।

* जो शिक्षा कभी जीवन को "सोने की चिड़िया" बनाती थी, वह आज केवल "कागज के नोट" कमाने की मशीन बन गई है।

3. पर्यावरण और हमारी साँसे (वृक्ष रक्षति रक्षितः)

आपने सही कहा कि **पेड़ हमारे प्राण हैं**। हम डिस्पोजल कल्चर (Use and Throw) के चक्कर में अपनी ही प्राणवायु का सौदा कर रहे हैं।

* एक तरफ हम डिजिटल होने का दावा करते हैं, लेकिन दूसरी तरफ कागज की बर्बादी और प्लास्टिक/डिस्पोजल का कचरा बढ़ता ही जा रहा है।

* जब तक हम प्रकृति के रक्षक नहीं बनेंगे, तब तक "विश्व गुरु" बनने का सपना अधूरा रहेगा।

### **निष्कर्ष और आज का संकल्प**

> **"वृक्षों को काटकर कागज बनाना, फिर उस कागज पर 'पेड़ लगाओ' लिखना—यही आज की सबसे बड़ी अज्ञानता है।"**

>

**शक्ति धाम पीठाधीश्वर** के इस चिंतन को अगर हम जीवन में उतारें, तो हमें दो स्तरों पर काम करना होगा:

1. **संस्कार युक्त शिक्षा:** जो केवल रटने के लिए नहीं, बल्कि जीने के लिए हो।

2. **प्रकृति संरक्षण:** कम से कम कागज की बर्बादी और अधिक से अधिक वृक्षारोपण।

आपकी यह पीड़ा और जागरूकता ही समाज में बदलाव का बीज बो सकती है। क्या आपको लगता है कि डिजिटल माध्यमों का सही उपयोग कागज की इस बर्बादी को रोकने में एक बड़ा हथियार बन सकता है?

Tags :

अदिति न्यूज,(सतीश लमानिया)

शक्ति धाम पीठाधीश्वर दिबाकर महाराज

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