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शहर से गांव तक जगह-जगह मिट्टी के पहाड़ रात के अंधेरे में दौड़ रहे डंपर, ग्रामीणों की नींद और सुरक्षा दोनों खतरे में

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गाडरवारा में मिट्टी माफियाओं का खेल बेखौफ,रातों-रात हो रहा अवैध खनन : शहर से गांव तक जगह-जगह मिट्टी के पहाड़ रात के अंधेरे में दौड़ रहे डंपर, ग्रामीणों की नींद और सुरक्षा दोनों खतरे में

Aditi News Team

Thu, May 28, 2026

गाडरवारा में मिट्टी माफियाओं का खेल बेखौफ!

रातों-रात हो रहा अवैध खनन, शहर से गांव तक जगह-जगह मिट्टी के पहाड़

रात के अंधेरे में दौड़ रहे डंपर, ग्रामीणों की नींद और सुरक्षा दोनों खतरे में

तेंदूखेड़ा रोड पर निर्माण कार्यों में भारी मात्रा में मिट्टी खपाने की चर्चा, प्रशासनिक निगरानी पर उठे गंभीर सवाल

गाडरवारा। नगर सहित साईंखेड़ा अंचल और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों मिट्टी के अवैध खनन और परिवहन को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। शहर के कई इलाकों, खाली पड़ी जमीनों, प्लाटों की भराई वाले क्षेत्रों, निर्माण स्थलों और सड़क किनारों पर भारी मात्रा में मिट्टी के ढेर दिखाई दे रहे हैं। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में रातों-रात मिट्टी के टीले खड़े होने और डंपरों की लगातार आवाजाही ने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला दिया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रात के अंधेरे में बड़े पैमाने पर मिट्टी का अवैध खनन कर डंपरों के जरिए परिवहन किया जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग कार्रवाई के बजाय चुप्पी साधे हुए हैं।

जानकारी के अनुसार गाडरवारा शहर में लगभग 12 से 15 स्थानों पर प्लाटों की भराई के नाम पर मिट्टी के बड़े-बड़े ढेर लगे हुए हैं। कई स्थानों पर खाली जमीनों पर अचानक भारी मात्रा में मिट्टी डाली गई है। शहर से लगे ग्रामीण क्षेत्रों में भी मिट्टी परिवहन की गतिविधियां लगातार बढ़ती दिखाई दे रही हैं। नागरिकों का कहना है कि देर रात से लेकर सुबह तक भारी वाहनों की आवाजाही लगातार बनी रहती है, जिससे लोगों की नींद और सुरक्षा दोनों प्रभावित हो रही हैं।

ग्रामीणों और शहरवासियों का कहना है कि रात होते ही क्षेत्र के कई मार्गों पर डंपरों की कतारें दिखाई देने लगती हैं। तेज रफ्तार से गुजरने वाले इन भारी वाहनों के कारण गांवों की शांति भंग हो रही है। डंपरों से उड़ती धूल, तेज आवाज और कंपन से सड़क किनारे रहने वाले परिवारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है, वहीं हादसों का खतरा भी लगातार बना हुआ है।

देतपोन सहित कई गांवों में रात के समय गुजरते डंपरों और सुबह सड़क किनारे पड़े मिट्टी के ढेरों ने ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है। लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर खुदाई के स्पष्ट निशान दिखाई दे रहे हैं, जिससे यह आशंका और मजबूत हो रही है कि क्षेत्र में बड़े स्तर पर अवैध खनन चल रहा है। ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में मिट्टी का परिवहन किस अनुमति के तहत किया जा रहा है और संबंधित विभागों द्वारा निगरानी क्यों नहीं की जा रही।

इधर तेंदूखेड़ा रोड भी इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। यहां एक साथ बने पांच वेयरहाउसों के सामने चल रहे बड़े निर्माण कार्य में भारी मात्रा में मिट्टी डाले जाने की बात सामने आ रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार लगातार डंपरों की आवाजाही से सड़क पर धूल का गुबार बना रहता है और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। सुबह से लेकर देर रात तक भारी वाहनों के गुजरने से आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

क्षेत्रवासियों ने यह भी आशंका जताई है कि अनियंत्रित मिट्टी खनन से पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ सकता है। कृषि भूमि की गुणवत्ता प्रभावित होने, भूमि क्षरण बढ़ने और ग्रामीण सड़कों के खराब होने जैसी समस्याएं भविष्य में गंभीर रूप ले सकती हैं। भारी वाहनों की लगातार आवाजाही से कई मार्ग क्षतिग्रस्त होने लगे हैं, जिससे आम लोगों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मिट्टी खनन और परिवहन नियमों के तहत किया जा रहा है तो इसकी पारदर्शी निगरानी होनी चाहिए, लेकिन यदि इसमें अनियमितताएं हैं तो जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि रात में चल रहे मिट्टी परिवहन की जांच कराई जाए, अवैध खनन पर तत्काल रोक लगे और क्षेत्र में डंपरों की अनियंत्रित आवाजाही पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

लगातार बढ़ती इस गतिविधि ने प्रशासनिक व्यवस्था, खनिज विभाग और निगरानी तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले को कितनी गंभीरता से लेकर कार्रवाई करता है या फिर रात के अंधेरे में मिट्टी का यह खेल यूं ही चलता रहेगा।

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अदिति न्यूज,(सतीश लमानिया)

नरसिंहपुर जिला खनिज अधिकारी ओपी बघेल

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