Sunday 6th of September 2026

ब्रेकिंग

जो एक प्राइवेट संस्थान के खिलाफ दायर PIL से जुड़ा था—जिसका असल में टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) से कोई लेना-देना नहीं

शिक्षक दिवस पर विशेष - श्री मति निर्मला पाराशर (शिक्षिक) की कलम से

राष्ट्रीय श्रमजीवी पत्रकार परिषद की जबलपुर संभागीय इकाई के तत्वावधान में

भारत के महान शिक्षाविद् एवं पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी की जयंती के अवसर पर शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में

नर्मदा नदी किनारे एवं निचले क्षेत्रों में निवासरत नागरिकों से सतर्क रहने तथा आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील

तेंदूखेड़ा,संघ शताब्दी वर्ष पर विजयादशमी उत्सव,नगर में भव्य पथसंचलन : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर तेंदूखेड़ा नगर में विजयादशमी उत्सव का भव्य आयोजन

Aditi News Team

Thu, Oct 9, 2025

रिपोर्टर राधावल्लभ पांडे

संघ शताब्दी वर्ष पर विजयादशमी उत्सव, नगर में भव्य पथसंचलन

तेंदूखेड़ा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर तेंदूखेड़ा नगर में विजयादशमी उत्सव का भव्य आयोजन विगत 7 अक्टूबर को तेंदूखेड़ा के कलश गार्डन में किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. निजाम सिंह पटेल और मुख्य वक्ता प्रांत सहकार्यवाह विनोद नेमा सहित खंड संघचालक दीपक सेकटकर उपस्थित रहे। कार्यक्रम में शस्त्र पूजन, अमृतवचन और एकल गीत के बाद बौद्धिक सत्र में मुख्य वक्ता प्रांत सहकार्यवाह विनोद नेमा ने संघ के 100 वर्षों के संघर्ष और योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संघ पर भारत के इतिहास में तीन बार प्रतिबंध लगाए गए—1948, 1975 और 1992। पहला प्रतिबंध महात्मा गांधी की हत्या के बाद लगा, लेकिन जांच में संघ निर्दोष पाया गया और बाद में समाज सेवा, शिक्षा एवं संस्कार निर्माण में संघ ने तेजी से योगदान दिया। दूसरा प्रतिबंध 1975 में आपातकाल के दौरान लगा, जिसमें संघ ने भूमिगत रहकर लोकतंत्र की रक्षा में अहम भूमिका निभाई। तीसरा प्रतिबंध 1992 में अयोध्या घटना के बाद लगाया गया, लेकिन जांच में दोष न पाए जाने पर इसे हटा दिया गया। इस प्रकार, जब-जब संघ को रोकने का प्रयास हुआ, संघ और अधिक निखरकर, राष्ट्र निर्माण की दिशा में अग्रसर हुआ।

मुख्य वक्ता ने कहा कि संघ के स्वयंसेवकों ने गोवा मुक्ति आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाकर देश की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने में मदद की। कच्छ भूकंप राहत कार्य के दौरान संघ के स्वयंसेवक दिन-रात पीड़ितों की सहायता में जुटे रहे और भोजन, वस्त्र तथा पुनर्वास की व्यवस्था में सहयोग किया। उन्होंने आगे बताया कि वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध में संघ के स्वयंसेवकों ने मोर्चे तक रसद, सामग्री और भोजन पहुँचाने में सेना का सहयोग किया। इसी प्रकार 1965, 1971 और 1999 के भारत-पाक युद्धों के दौरान स्वयंसेवकों ने देश के भीतर यातायात नियंत्रण, शरणार्थी सहायता और संचार व्यवस्था संभालने में प्रशासन की मदद की। संघ की अनुशासित और समर्पित सेवा से प्रभावित होकर वर्ष 1963 में संघ को गणतंत्र दिवस परेड में आमंत्रित किया गया, जहाँ करीब 3,000 स्वयंसेवकों ने गणवेश में राजपथ पर संचलन कर अनुशासन और सेवा का अद्भुत प्रदर्शन किया।

मुख्य वक्ता ने यह भी कहा कि कुछ कम्युनिस्ट पार्टियों ने संघ के खिलाफ भ्रम और आरोप फैलाए, लेकिन संघ ने विवाद या बहस से नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा और समाज सेवा के माध्यम से इसका जवाब दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि संघ का उद्देश्य हमेशा समाज और राष्ट्र की सेवा रहा है, और यही कारण है कि संघ हर कठिन परिस्थिति में समाज में सम्मान और स्वीकार्यता के साथ उभरा है। शताब्दी वर्ष के अंतर्गत आगे “गृह गृह संपर्क अभियान” तथा “हिंदू सम्मेलन” जैसे जनजागरण और सामाजिक एकता के कार्यक्रम भी आयोजित किए जाने हैं, जिनके माध्यम से समाज में संगठन, संस्कार और राष्ट्रभावना को सुदृढ़ करने का संकल्प लिया गया।

बौद्धिक सत्र के पश्चात नगर के मुख्य मार्गों से लगभग 400 स्वयंसेवकों ने भव्य पथसंचलन निकाला। स्वयंसेवक गणवेश में हाथों में दंड लिए और घोष दल के साथ पथसंचलन में शामिल हुए। मार्गों में जगह-जगह फूल बरसाकर उनका उत्सवपूर्ण स्वागत किया गया। इस अवसर पर अनुशासन, एकता और उत्साह का अनुपम प्रदर्शन देखने को मिला।

Tags :

गाडरवारा

अदिति न्यूज,(सतीश लमानिया)

तेंदूखेड़ा में हुआ पथ संचलन

जरूरी खबरें