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होली के पावन अवसर पर जीव-जंतुओं पर रंग न डालें – भागीरथ तिवारी : करेली भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड (भारत सरकार) के मानद पशु कल्याण प्रतिनिधि

Aditi News Team

Tue, Mar 3, 2026

होली के पावन अवसर पर जीव-जंतुओं पर रंग न डालें – भागीरथ तिवारी

करेली भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड (भारत सरकार) के मानद पशु कल्याण प्रतिनिधि भागीरथ तिवारी ने होली के शुभ अवसर पर समस्त देशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए संवेदनशील, संयमित और जिम्मेदार आचरण अपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समरसता, भाईचारे, प्रेम और सद्भाव का प्रतीक है। ऐसे पावन पर्व पर यह सुनिश्चित करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि हमारे उत्सव का उल्लास किसी भी जीव-जंतु के लिए पीड़ा या कष्ट का कारण न बने।

भगीरथ तिवारी ने बोर्ड के पत्र का हवाला देते हुए आगे कहा है कि भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड के सचिव डाक्टर एस के दत्ता ने अपने पत्र में कहा कि विगत वर्षों में यह प्रवृत्ति देखने को मिली है कि कुछ लोग कुत्तों, गायों, बिल्लियों तथा अन्य बेसहारा पशुओं पर जबरन रंग डाल देते हैं। कई बार इसे मनोरंजन या उत्साह का हिस्सा समझ लिया जाता है, किंतु वास्तविकता यह है कि यह कृत्य पशुओं के लिए अत्यंत कष्टदायक और भय उत्पन्न करने वाला होता है। पशु अपनी असुविधा और पीड़ा को शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकते, परंतु उनके व्यवहार, घबराहट और शारीरिक प्रतिक्रियाओं से उनकी परेशानी स्पष्ट झलकती है।

उन्होंने बताया कि बाजार में उपलब्ध अधिकांश रंगों में कृत्रिम रसायन, डाई और अन्य रासायनिक तत्व मिलाए जाते हैं, जो जानवरों की त्वचा और आँखों के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकते हैं। पशुओं की त्वचा मनुष्यों की तुलना में अधिक संवेदनशील होती है तथा उनके शरीर की संरचना भिन्न होती है। ऐसे में रासायनिक रंगों का प्रभाव उनके शरीर पर अधिक तीव्रता से पड़ता है। रंग लगने से उन्हें खुजली, जलन, लाल चकत्ते, एलर्जी, दाने या घाव जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। कई बार त्वचा पर संक्रमण हो जाता है, जिसके उपचार में लंबा समय लग सकता है।

यदि रंग उनकी आँखों में चला जाए तो जलन, सूजन, पानी आना और दृष्टि संबंधी परेशानी उत्पन्न हो सकती है। कुछ पशु घबराकर इधर-उधर भागने लगते हैं, जिससे वे स्वयं को चोट पहुँचा सकते हैं या सड़क दुर्घटना का शिकार हो सकते हैं। रंग लगने के बाद पशु अपने शरीर को चाटकर साफ करने का प्रयास करते हैं। इस प्रक्रिया में रंग उनके पेट में चला जाता है, जिससे उल्टी, दस्त, पेट दर्द या कमजोरी जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। कई बार स्थिति गंभीर रूप ले सकती है और पशु चिकित्सकीय उपचार की आवश्यकता पड़ती है।

होली के अवसर पर अत्यधिक भीड़, शोर-शराबा और अनावश्यक रूप से तेज हॉर्न बजाना भी पशुओं में भय और तनाव उत्पन्न करता है। पशु तेज ध्वनि के प्रति अत्यंत संवेदनशील होते हैं। घबराहट की स्थिति में वे अनियंत्रित होकर दौड़ सकते हैं, जिससे उनके घायल होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए आवश्यक है कि उत्सव मनाते समय हम अपने आसपास के वातावरण और जीव-जंतुओं का ध्यान रखें।

मानद पशु कल्याण प्रतिनिधि भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड भारत सरकार जी सी सी आई के प्रदेश संयोजक प्रेस मीडिया प्रभारी भागीरथ तिवारी ने स्पष्ट किया कि किसी भी पशु को अनावश्यक कष्ट पहुँचाना दंडनीय अपराध है। #Prevention of #Cruelty to #Animals Act के अंतर्गत पशुओं के साथ #क्रूरता करने पर दंड और सजा का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त भारतीय #संविधान के Article 51A(g) of the Constitution of India के अनुसार प्रत्येक नागरिक का यह मौलिक कर्तव्य है कि वह सभी जीवों के प्रति करुणा का भाव रखे। अतः यह केवल नैतिक दायित्व ही नहीं, बल्कि संवैधानिक जिम्मेदारी भी है कि हम अपने व्यवहार में दया और संवेदनशीलता प्रदर्शित करें।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं में पशु-पक्षियों को विशेष स्थान दिया गया है। सह-अस्तित्व और करुणा की भावना हमारी सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा है। होली जैसे उत्सव हमें केवल आनंद मनाने का अवसर ही नहीं देते, बल्कि यह भी सिखाते हैं कि हम समाज में सकारात्मक संदेश कैसे दें।

नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव

होली केवल आपसी सहमति और सुरक्षित, प्राकृतिक रंगों के साथ ही खेलें।

किसी भी बेसहारा या पालतू पशु पर रंग, गुलाल या पानी न डालें।

पानी के गुब्बारे या पिचकारी जानवरों की ओर न चलाएँ।

अनावश्यक रूप से तेज हॉर्न बजाने से बचें, क्योंकि इससे पशु भयभीत हो जाते हैं।

यदि किसी पशु पर अनजाने में रंग लग जाए तो उसे जोर से रगड़कर साफ न करें, बल्कि स्वच्छ पानी से धीरे-धीरे साफ करने में सहायता करें।

आसपास रहने वाले पशुओं के लिए स्वच्छ पानी की व्यवस्था रखें, ताकि वे रंग मिला पानी पीने से बच सकें।

बच्चों और युवाओं को पशुओं के प्रति दयालु व्यवहार की प्रेरणा दें।

भागीरथ तिवारी ने सभी नागरिकों, युवाओं एवं अभिभावकों से विशेष अनुरोध किया कि वे स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करें। समाज में जागरूकता केवल संदेश देने से नहीं, बल्कि आचरण से आती है। यदि प्रत्येक नागरिक यह संकल्प ले कि वह किसी भी जीव-जंतु को कष्ट नहीं पहुँचाएगा और दूसरों को भी ऐसा करने से रोकेगा, तो निश्चित रूप से एक सकारात्मक परिवर्तन संभव है।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि कहीं पशुओं के साथ दुर्व्यवहार होता दिखाई दे तो तुरंत स्थानीय #प्रशासन या #पुलिस को सूचित करें, ताकि समय रहते उचित कार्रवाई की जा सके। कानून का पालन और संवेदनशीलता का प्रदर्शन ही एक सभ्य समाज की पहचान है।

अंत में उन्होंने कहा कि होली का सच्चा अर्थ केवल बाहरी रंगों में नहीं, बल्कि हृदय में बसे प्रेम, दया और करुणा के रंगों में है। आइए, इस होली पर हम यह सुनिश्चित करें कि हमारा उत्सव किसी भी मूक प्राणी के लिए भय या पीड़ा का कारण न बने।

“होली का सच्चा रंग करुणा और जिम्मेदारी में है।”

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अदिति न्यूज,(सतीश लमानिया)

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