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"ज्ञान परंपरा; चलते चलो अविराम, मंजिल स्वयं सफलता का संदेश देगी" : निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर

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भगवान महावीर के निर्वाण के बाद गौतम स्वामी को केवलज्ञान : "ज्ञान परंपरा; चलते चलो अविराम, मंजिल स्वयं सफलता का संदेश देगी" : निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर

Aditi News Team

Fri, Nov 6, 2026

"भगवान महावीर के निर्वाण के बाद गौतम स्वामी को हुआ केवलज्ञान, 683 वर्षों तक सुरक्षित रही।

"ज्ञान परंपरा; चलते चलो अविराम, मंजिल स्वयं सफलता का संदेश देगी" : निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर

कुण्डलपुर। कार्तिक वदी अमावस्या को भगवान महावीर स्वामी का निर्वाण हुआ और इसके पश्चात इंद्रभूति गौतम स्वामी को केवलज्ञान प्राप्त हुआ। उनके माध्यम से भगवान महावीर की दिव्य देशना और ज्ञान परंपरा आगे बढ़ी। 683 वर्षों तक ज्ञान की यह परंपरा लिखित रूप में सुरक्षित रही। इसके पश्चात आचार्यों ने ज्ञान की इस पवित्र धारा को निरंतर प्रवाहित किया, जो आज भी अविरल रूप से आगे बढ़ रही है। उक्त उद्गार निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर जी महाराज ने सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ एवं क्षेत्रीय प्रचारमंत्री जयकुमार जैन ‘जलज’ ने बताया कि मुनि श्री ने भगवान महावीर स्वामी की साधना, केवलज्ञान प्राप्ति और धर्म परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान महावीर ने 30 वर्ष की आयु में दीक्षा ग्रहण की और 12 वर्षों तक कठोर साधना करते हुए मोक्ष मार्ग पर आगे बढ़ते रहे। इस अवधि में ध्यान, स्वाध्याय, आहारचर्या और निरंतर आत्मसाधना के माध्यम से उन्होंने अपनी आध्यात्मिक यात्रा को आगे बढ़ाया। 42 वर्ष की आयु में उन्हें केवलज्ञान प्राप्त हुआ। केवलज्ञान प्राप्ति के बाद भी 66 दिनों तक दिव्यध्वनि नहीं खिरी और इसके पश्चात प्रथम उपदेश हुआ। उन्होंने लगभग 30 वर्षों तक धर्मोपदेश देते हुए विहार किया और 72 वर्ष की आयु में पावापुरी के सरोवर में निर्वाण पद को प्राप्त किया।

मुनि श्री ने कहा कि तीर्थंकरों के धर्मोपदेश से ही धर्म की परंपरा आगे बढ़ती है। गणधर भगवान की देशना को ग्रहण कर ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाते हैं और उनके पश्चात आचार्य, उपाध्याय तथा मुनि इस आध्यात्मिक धरोहर को संरक्षित एवं प्रसारित करते रहते हैं। इंद्रभूति गौतम स्वामी के माध्यम से भगवान महावीर की दिव्य देशना आगे बढ़ी और ज्ञान की यह परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलती आ रही है। कुण्डलपुर सिद्धक्षेत्र में भी वर्षायोग के माध्यम से ज्ञान और धर्म की यही धारा निरंतर प्रवाहित हो रही है। प्रतिदिन यात्रियों का आगमन होता है, श्रद्धालु बड़े बाबा की वंदना, अभिषेक और पूजन का लाभ लेते हैं तथा धर्मोपदेश सुनकर अपनी तीर्थयात्रा को सार्थक बनाते हैं। मुनि श्री ने कहा कि कुण्डलपुर मध्यप्रदेश के दमोह जिले में स्थित प्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र है। यह बड़े बाबा और छोटे बाबा के नाम से विख्यात है तथा आचार्य श्री विद्यासागर महाराज की तपोभूमि के रूप में विशेष पहचान रखता है। आचार्य श्री ने यहां कठोर साधनाएं, स्वाध्याय और आध्यात्मिक साधना की अनेक मिसालें प्रस्तुत की हैं। तीर्थ वंदना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मुनि श्री ने श्रद्धालुओं के उत्साह की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि तीर्थयात्रा का वास्तविक आनंद श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार पैदल चलकर क्षेत्र की वंदना करने में भी है। उन्होंने 90 वर्ष से अधिक आयु के श्रद्धालुओं का उदाहरण दिया, जो शारीरिक कठिनाइयों के बावजूद लाठी के सहारे पहाड़ चढ़कर बड़े बाबा के दर्शन और वंदना के लिए पहुंचे। उन्होंने कहा कि वाहन के बजाय पैदल पहाड़ी चढ़कर वंदना करने का अपना अलग ही महत्व है।। बुजुर्ग राजाराम जी और वीरेंद्र जी का यह उत्साह और श्रद्धा अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि जिनश्रद्धालुओं के लिए पैदल चलना संभव नहीं है, उनके लिए वाहन की व्यवस्था की गई है, ताकि किसी की वंदना छूट न जाए। लेकिन जिनमें सामर्थ्य है, उन्हें अपनी क्षमता के अनुसार पैदल वंदना का भाव रखना चाहिए। विशेषकर जो श्रद्धालु वर्ष में एक-दो बार आते हैं, उन्हें पूरे क्षेत्र की वंदना का लाभ लेना चाहिए। पूरी वंदना का आनंद और अनुभूति अलग ही होती है। आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ने भी वर्ष 2022 में पंचकल्याणक एवं गजरथ महोत्सव के पश्चात बड़े बाबा के दर्शन और वंदना का लाभ लिया था। मुनि श्री ने अपने संदेश में दोहे के माध्यम से प्रेरणा देते हुए कहा कि कब तक चलना है और कितना चलना है, यह मत पूछो। चलते चलो, अविराम चलते चलो। जब तक मंजिल नहीं मिलती, तब तक पुरुषार्थ जारी रखो। सफलता स्वयं एक दिन कह देगी कि अब रुक जाओ, तुम्हारी मंजिल प्राप्त हो गई है। उन्होंने कहा कि जीवन में निरंतर प्रयास, धैर्य और उत्साह का विशेष महत्व है। बाहरी यात्रा के साथ भीतर की आत्मिक यात्रा भी निरंतर चलती रहनी चाहिए। 10 नवंबर 2026 को कुण्डलपुर बड़े बाबा पर्वतराज की परिक्रमा निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर जी महाराज ससंघ के साथ श्रद्धालु भक्त पैदल परिक्रमा करेंगे। 9 नवंबर को भगवान महावीर स्वामी का निर्वाण महोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा।

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अदिति न्यूज,(सतीश लमानिया)

निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर जी महाराज

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