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भगवान पार्श्वनाथ निर्वाण महोत्सव पर हुआ महामस्तकाभिषेक एवं निर्वाण लाडू चढ़ाया गया

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चातुर्मास आत्मचिंतन, तप और समता की साधना का अवसर : मुनि श्री : भगवान पार्श्वनाथ निर्वाण महोत्सव पर हुआ महामस्तकाभिषेक एवं निर्वाण लाडू चढ़ाया गया

Aditi News Team

Wed, Aug 19, 2026

भगवान पार्श्वनाथ निर्वाण महोत्सव पर हुआ महामस्तकाभिषेक एवं निर्वाण लाडू चढ़ाया गया

चातुर्मास आत्मचिंतन, तप और समता की साधना का अवसर : मुनि श्री समतासागर जी

कुण्डलपुर। सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर में 23 वे तीर्थंकर भगवान श्री पार्श्वनाथ का निर्वाण कल्याणक महोत्सव भगवान श्री पार्श्वनाथ जी का मस्तकाभिषेक करके एवं निर्वाण लाडू चढ़ाकर मनाया गया। अविनाश जैन विद्यावाणी एवं कुण्डलपुर क्षेत्र प्रचार मंत्री जयकुमार जैन ‘जलज’ने बताया कुण्डलपुर चातुर्मास के इसअवसर को निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर जी महाराज ने ऐतिहासिक चातुर्मास बताते हुये कहा कि पिछला चातुर्मास जहां श्री सम्मेदशिखर की पुण्य भूमि पर 57 पिच्छिओँ के साथ हुआ जो पूरे देश में चर्चा का विषय बना और इस वर्ष का चातुर्मास भी देश में चर्चा का विषय बना हुआ है, उन्होंने कहा कि श्रावण मास की सार्थकता, भगवान पार्श्वनाथ के निर्वाण दिवस तथा जीव के उपादान, कर्म और निमित्त के गूढ़ सिद्धांत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि चातुर्मास केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, स्वाध्याय, संयम, तप और अपने परिणामों को निर्मल बनाने का महत्वपूर्ण अवसर है।मुनि श्री ने कहा कि गुरु की वाणी मिले तो उसे केवल कानों से सुनना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अपने जीवन रूपी पात्र में भरकर उसे आचरण में उतारना चाहिए। श्रावण का अर्थ श्रवण से है। इसलिए श्रावण मास हमें अपने कान खोलकर धर्म और गुरु की वाणी सुनने तथा उसे आत्मसात करने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने अषाढ़ और श्रावण मास की तुलना किसान के परिश्रम से करते हुए कहा कि जैसे किसान अषाढ़ में आलस्य नहीं करता और पूरी सक्रियता से खेती करता है, उसी प्रकार धर्म के क्षेत्र में भी साधक को समय की महत्ता समझनी चाहिए। यदि अषाढ़ में आलस्य किया, श्रावण में श्रवण नहीं किया और भाद्रपद में परिणाम भद्र नहीं हुए तो आगे का समय आध्यात्मिक रूप से खाली निकल सकता है। इसके विपरीत पुरुषार्थ, श्रवण और शुभ परिणामों के माध्यम से जीवन में धर्म के दीप प्रज्वलित हो सकते हैं।मुनि श्री ने कहा कि चातुर्मास आध्यात्मिक कमाई के महीने हैं। इन दिनों देशभर में साधु-संतों के सान्निध्य का लाभ लेकर श्रावक-श्राविकाएं स्वाध्याय, साधना और तप कर रहे हैं। पंचम, षष्ठम, सप्तम उपवास से लेकर बेला-तेला और अनेक प्रकार की तपस्याएं चल रही हैं।

भगवान पार्श्वनाथ के निर्वाण दिवस का उल्लेख करते हुए मुनि श्री समतासागर जी महाराज ने कहा कि भगवान पार्श्वनाथ के जीवन में अनेक महत्वपूर्ण प्रसंग हैं, लेकिन मुनि अवस्था में हुआ घोर उपसर्ग उनकी आत्मसाधना की सबसे कठिन परीक्षा थी।

उन्होंने बताया कि पूर्व भव का कमठ का जीव संवर नामक ज्योतिषी देव बना। पूर्व वैर के संस्कारों के कारण उसने मुनिराज पार्श्वनाथ पर अनेक प्रकार के घोर उपसर्ग किए। यह उपसर्ग लगातार सात दिनों तक चलता रहा। मुनिराज ने इन कठिन परिस्थितियों में भी अपने परिणामों में समता और वीतरागता बनाए रखी।मुनि श्री ने कहा कि मुनिराज के सामने यह भावना रही कि आत्मा पर अभी कुछ कर्मों का क्षय होना शेष है और यह जीव उन कर्मों के क्षय में निमित्त बन रहा है, तो उसे निमित्त बनने दो। इसी अद्भुत समता और आत्मसाधना के बीच पार्श्वनाथ भगवान को केवलज्ञान की प्राप्ति हुई। केवलज्ञान प्राप्त होते ही उपसर्ग स्वतः समाप्त हो गया और समवसरण की रचना हुई।

उन्होंने कहा कि पार्श्वनाथ भगवान की क्षमा का प्रभाव इतना महान् था कि जिस जीव ने अनेक भवों तक उनके जीव के प्रति वैर रखा और उपसर्ग किए, उसी के परिणामों में भी परिवर्तन आया। समवसरण में संवर देव को पश्चाताप हुआ और उसने सम्यक्त्व की प्राप्ति की।

मुनि श्री ने कहा कि वैर का अंत वैर से नहीं, क्षमा और समता से होता है। पार्श्वनाथ भगवान का जीवन हमें सिखाता है कि विपरीत परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, साधक को अपने परिणामों की निर्मलता नहीं छोड़नी चाहिए। इस अवसर पर मुनि श्री पवित्र सागर महाराज एवं संघस्थ सभी ऐलक क्षुल्लक मंच पर विराजमान थे। प्रथम अभिषेक, शांतिधारा रिद्धि कलश, निर्वाण लाडू आदि चढ़ाने का सौभाग्य पाने वाले श्रेष्ठी परिवार अनिल सरोज फिरोजाबाद गौरव रिचा आरव जैन आगरा अमन अंकिता जैन कैलिफोर्निया, पियूष सचिन नई दिल्ली, तारणचंद रोहिणी दिल्ली, सरोज सुरेशचंद्र जैन चंदेरी, जयकुमार नीरज जैन बाड़ी बरेली,आशीष चौगुले कोल्हापुर, नेम कुमार सराफ स्वर्गीय बाबूलाल सराफ दमोह, दिनेश अलका हर्ष मीमांसा अनंदीलाल दमोह, ऊषा राजाराम जैन नोहटा, ऋतु जैन गुनौर, अमित जैन मंडी बामोरा, रमेश जैन बलोदा बाजार सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्तों ने पूज्य बड़े बाबा का चरणाभिषेक एवं भगवान पार्श्वनाथ जी का मस्तकाभिषेक करने का सौभाग्य अर्जित किया।

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अदिति न्यूज,(सतीश लमानिया)

मुनि श्री समतासागर जी कुंडलपुर

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