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"ग्रामें वायति आरण्ये,पुण्या सर्वत्र नर्मदा.."नर्मदा जयंती पर विशेष : मैया नर्मदा का अर्थ, सुख और आनंद देने वाली, साक्षात अमृतेश्वरी(आशीष अग्रवाल शासकीय अधिमान्य पत्रकार,करेली की कलम से)

Aditi News Team

Sun, Jan 25, 2026

मैया नर्मदा का अर्थ, सुख और आनंद देने वाली, साक्षात अमृतेश्वरी..

"ग्रामें वायति आरण्ये,

पुण्या सर्वत्र नर्मदा.."

नर्मदा जी के हर घाट का विशेष महत्व है। नर्मदा के तट रूद्रभूमि हैं। यहां का कंकड़ कंकड़ शंकर है। नर्मदा जी वरदानी हैं, योगेश्वर भगवान देवाधिदेव शिव से प्रगट हुई हैं और उनसे वरदान मांगा कि मेरे दोनों तटों में आपका निवास होना चाहिए। नर्मदा के तट तपोभूमि हैं। सातों कल्प में समुद्र, सरिता, नदियां, पर्वत आदि सभी नष्ट हो जाएंगे परंतु नर्मदा जी साक्षात रहेगी। नर्मदा मैया करुणा सागर हैं। नर्मदा जी का एक नाम अमृता भी है। वह साक्षात अमृतेश्वरी देवी हैं। सभी पापों को नष्ट कर पुण्य प्रदान करती हैं। जगदंबा नर्मदा आपकी मां, आपकी गुरु, आपकी मित्र हो सकती हैं, इसके लिए आपको उन्हें भाव से भजना होगा। देवी जी का हृदय भाव मात्र से आपका हो जाता है। नर्मदा तटों की विशेषता है कि नर्मदा के तटों में सूक्ष्म जगत जगह-जगह विद्यमान हैं। उसमें भी समूह के समूह विधमान हैं। नर्मदा तट में गंधर्व, देव, असुर शक्तियां भी सिद्ध बनकर बैठी है। जो सिद्धलीला के आनंद में सिद्धारूढ़ हैं। भू वैज्ञानिक कहते हैं कि नर्मदा तट के नीचे खाली स्थान है। वह खाली स्थान नहीं है, वहां सिद्धजन विराजमान हैं। वे आनंद में रहते हैं, वे नर्मदा जी के पुत्र बनकर रहते है, उनकी भी कृपा बरस रही है। उन सिद्धों के निवास क्षेत्र में कोई भी सत्कर्म हो, वही उनकी खुराक है, भोजन है, वह अशरीरी हैं, इसीलिए किसी साधक, सन्यासी या त्यागी को अपने सत्कर्मो के लिये माध्यम बना लेते हैं। इसीलिए सन्यासियों की सदैव नर्मदा के तटों में निवास की अभिलाषा रही है। अनेक त्यागी, तपस्वी विविध माध्यमों से नर्मदा तटों में मां रेवा की साधना करते हैं।

नर्मदा तटों के अनुभव, असीम अलौकिक, अद्भुत, आनंदमय हैं।नर्मदा घाटों पर अलौकिक रत्नों और देवतुल्य ऋषि, महात्मा पुरुषों के गुप्त वास के दर्शन अनिर्वचनीय एवं मन और वाणी से परे हैं।

मैया नर्मदा का अर्थ, सुख और आनंद देने वाली परमात्मा स्वरुप, अलौकिक, अद्भुत, अगम्य कृपा बरसाने वाली कलयुग और कल्पांत तक रहने वाली हैं।

कई पीढ़ी के पुण्य और पूर्वजों के सत्कर्म फलीभूत होने के संस्कार के फल ही लोगों को नर्मदा के किनारे जन्म लेने और बसने का सौभाग्य मिलता है।

नर्मदा मैया, मां गंगा नदी से भी प्राचीन और श्रेष्ठ महानदी मानी गई है, जो केवल दर्शन मात्र से ही भक्तजनों के पाप कर्मों का क्षय करके पुण्य अर्जित करती हैं। वे अपने भक्तों का संतानों की तरह पालन-पोषण करती हैं। नर्मदा स्नान से, भजन, दर्शन, सत्संग, पूजन से विशेष फल सहज ही प्राप्त हो जाता है।

नर्मदाजी को देखना मात्र दर्शन नहीं हैं। देखना अलग है और दर्शन अलग विषय है। दर्शन में नेत्र के अलावा आपके शरीर की सभी इंद्रियां काम करना बंद करें, तभी दर्शन हैं। संपूर्ण सामर्थ्य आंख में एकत्र हो जावे और दर्शन हों, वही मां नर्मदा के दर्शन हैं।

गंगा श्रेष्ठ नदी हैं परंतु प्राचीन नर्मदा जी हैं। जो कल्प कल्प में नष्ट नहीं होती। गंगा जी भागीरथी गंगा है और नर्मदा जी वेद गंगा है। नर्मदा कल्प कल्प में कन्या के रूप में विराजमान हैं। नर्मदा जी के अंदर सुर नदी भी बहती है। सुर नदी गंगा जी को कहते हैं, देव नदी। साक्षात शिवजी की जटा से मां नर्मदा कन्या के रूप में प्रगट हुई हैं। उन्हें शंकरी भी कहा जाता है, वह ऋषि कुल तरणी हैं। एक कल्प की समाप्ति मैं दूसरे कल्प का निर्माण होना है और सृष्टि की रचना के लिए वेद नहीं मिल रहा है। जिसे नर्मदा जी ने बताया, इसीलिए उनका नाम वेद गंगा भी पड़ा।

ऐसी दूसरी कोई मां वात्सल्यता नहीं दे सकती जो नर्मदा जी से मिलता है। जिसके साथ नर्मदा जी की कृपा हो उस पर पूरे जगत की कृपा है।

नर्मदा जी की जलधारा को अवश्य नमन करना है, परंतु नदी मानकर नहीं। यह भाव रखना है कि नर्मदा मैया अमृत रूप में प्रवाहमान हैं। यह जल नहीं है, यह अमृत है। दर्शन करने मात्र से ही कल्याण करने वाली केवल नर्मदा मां हैं। जिस पर मैया कृपा करती है, उस पर संपूर्ण लौकिक अलौकिक जगत कृपा करने आतुर हो जाता है। मां रेवा सभी की है, अनुभूति सभी को हो सकती है, केवल साधना और तप करने की जरूरत है।

दिन में, तीन दिन में, सप्ताह में, पखवाड़े में अथवा माह में एक बार नर्मदा दर्शन जरूर करने का प्रयत्न करते रहने का जतन करना चाहिए, इससे अपना जीवन परिवर्तित होने लगेगा। दर्शन संपूर्ण सुधबुध खोकर, मां नर्मदा में लीन होकर, मां रेवा की दया, कृपा की कामना के साथ करना चाहिए। मैया के लिए कोई भी नियम, सिद्धांत अपना लो और यदि निभा लो, दुनिया कुछ भी सोचे, कुछ भी बोले, आपका जीवन सफल हो जाएगा।

परम् पूज्य, सदगुरुदेव, नर्मदापुत्र श्री श्री श्री स्वामीजी महाराज हीरापुर वालों की दिव्य वाणी..

(दिव्य आध्यात्मिक श्री नर्मदा अमृत रस वर्षा, आध्यात्मिक अनुष्ठान मां रेवा मेरे अनुभव में..)

शिवसुता, वेदगंगा, शंकरी, ऋषिकुल तरणी, पावनी, सर्वदा, सौम्या, रमणी, आदिशक्ति, सिद्धेश्वरी, माँ अमृता, अमृतेश्वरी, जगतानंदी, वत्सला, मंगला, तारिणी, अमृत रूप में प्रवाहमान, कल्प कल्प में कन्या के रूप में विराजमान, दर्शन मात्र से कल्याण करने वाली, असीम, अलौकिक, अगम्य कृपा बरसाने वाली, देवी माँ भगवती, श्री रेवा, श्री श्री नर्मदा जयंती के पुनीत एवं पावन पर्व पर मां श्री रेवा, राजिका की अतिविशेष कृपा, अनुकंपा प्राप्त समस्त नर्मदांचल वासियों को शुभ अशेष मंगलकामनाएं..।

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अदिति न्यूज,(सतीश लमानिया)

आशीष अग्रवाल शासकीय अधिमान्य पत्रकार करेली

परम् पूज्य, सदगुरुदेव, नर्मदापुत्र श्री श्री श्री स्वामीजी षड्मुखानन्द महाराज श्री हीरापुर

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