नरसिंहपुर,कागजों तक सीमित रहा जिला शिक्षा अधिकारी का आदेश? : निजी स्कूलों की मनमानी पर अब तक नहीं हुई कार्रवाई, अभिभावकों में आक्रोश
Aditi News Team
Sat, Jul 4, 2026
कागजों तक सीमित रहा जिला शिक्षा अधिकारी का आदेश?
निजी स्कूलों की मनमानी पर अब तक नहीं हुई कार्रवाई, अभिभावकों में आक्रोश
नरसिंहपुर।निजी स्कूलों द्वारा नियमों को ताक पर रखकर की जा रही अत्यधिक फीस वृद्धि और महंगी किताबों के जबरन थोपे जाने के खिलाफ भाजपा नेता व गन्ना उत्पादक किसान मजदूर संघ के संयोजक पवन पटेल द्वारा लगातार मोर्चा खोला गया है. हालांकि, इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) नरसिंहपुर द्वारा जांच के आदेश तो जारी किए गए थे, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि धरातल पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है. आदेश की समय-सीमा बीतने के बाद भी परिणाम 'शून्य' रहने से अब अभिभावकों और छात्र संगठनों में प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर भारी आक्रोश है।
क्या था जिला शिक्षा अधिकारी का वह आदेश?
दस्तावेजों के अनुसार, भाजपा नेता पवन पटेल की लगातार शिकायतों और कलेक्टर कार्यालय के 'स्मरण पत्र' के बाद जिला शिक्षा अधिकारी नरसिंहपुर ने आदेश क्रमांक 3096 जारी किया था।इस आदेश के तहत सहायक संचालकों (श्री ए.एस. मसरम, श्री सिद्धांत बागड़े और सुश्री सीमा डोंगरे) की एक 'विकासखंड स्तरीय जांच समिति' का गठन किया गया था।समिति को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि वे जिले के निजी स्कूलों द्वारा किए जा रहे नियमों के उल्लंघन की विद्यालयवार जांच करें और 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपें।
आदेश के बाद भी कार्रवाई नहीं, ठंडे बस्ते में जांच!
प्रशासनिक तंत्र की सुस्ती का आलम यह है कि जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा समय-सीमा तय किए जाने के बावजूद अभी तक किसी भी दोषी स्कूल पर न तो कोई दंडात्मक कार्रवाई हुई है और न ही जांच रिपोर्ट का अता-पता है। इस ढुलमुल रवैए के कारण निजी स्कूलों के हौसले और बुलंद हैं और वे बेखौफ होकर अभिभावकों का आर्थिक शोषण कर रहे हैं।
पवन पटेल ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत आवेदन लगाकर भी प्रशासन से पूछा है कि उनकी शिकायतों पर अब तक क्या कार्रवाई की गई, जांच में कौन-कौन से स्कूल दोषी पाए गए और उनके खिलाफ क्या नोटिस या दंडात्मक कार्रवाई की गई? लेकिन अधिकारियों की तरफ से अभी तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है।
इन गंभीर मुद्दों पर मौन बैठा है प्रशासन
अभिभावकों का आरोप है कि शिक्षा विभाग की इस ढील के कारण स्कूल संचालक धड़ल्ले से इन नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं:
नियम विरुद्ध फीस वृद्धि: 'म.प्र. निजी विद्यालय अधिनियम 2017 और नियम 2020' को ताक पर रखकर मनमानी फीस वसूली जा रही है।
महंगी किताबों का बोझ: कक्षा 1 से 12वीं तक एनसीईआरटी (NCERT) की सस्ती पुस्तकों के स्थान पर निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकें जबरन थमाई जा रही हैं।
कमीशनखोरी का खेल: निर्धारित दुकानों से ही पुस्तकें, यूनिफॉर्म और स्टेशनरी खरीदने के लिए अभिभावकों को मजबूर किया जा रहा है।
अवैध शुल्कों की मार: विकास शुल्क और स्मार्ट क्लास के नाम पर बिना किसी पारदर्शिता के अवैध वसूली जारी है।
पीड़ित विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के हित में भाजपा नेता पवन पटेल का कहना है कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा केवल कागजी खानापूर्ति करने के लिए आदेश जारी कर दिया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर स्कूलों से सांठगांठ के चलते कार्रवाई को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।यदि प्रशासन ने जल्द ही इन जांच रिपोर्टों को सार्वजनिक कर दोषी स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की और अभिभावकों को राहत नहीं दिलाई, तो विद्यार्थियों और अभिभावकों के हक में कानूनी रूप से निरंतर प्रयास किया जाएगा।
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अदिति न्यूज,(सतीश लमानिया)
जिला शिक्षा अधिकारी नरसिंहपुर
स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदयप्रताप सिंह
नरसिंहपुर जिला कलेक्टर श्रीमती रजनी सिंह