पंच परिवर्तन साइकल यात्रियों का जगह जगह पर हो रहा सीधा जनसंवाद : कश्मीर से शुरू कन्याकुमारी के लिए पंच परिवर्तन संकल्प की साइकिल यात्रा पहुंची मध्यप्रदेश
Aditi News Team
Sun, Jan 18, 2026
कश्मीर से शुरू कन्याकुमारी के लिए पंच परिवर्तन संकल्प की साइकिल यात्रा पहुंची मध्यप्रदेश
पंच परिवर्तन साइकल यात्रियों का जगह जगह पर हो रहा सीधा जनसंवाद
कश्मीर से कन्याकुमारी तक करीब 4000 किलोमीटर की साइकिल यात्रा 25 दिसंबर से लाल चौक श्रीनगर से प्रारंभ हुई है। इस राष्ट्रव्यापी यात्रा का नेतृत्व वरिष्ठ स्वयंसेवक डॉ. अनंत दुबे कर रहे हैं। उनके साथ सामाजिक कार्यकर्ता देवेन्द्र दुबे एवं जुगल किशोर शर्मा भी सहभागी है। यह यात्रा लगभग 11 प्रांतों से होकर गुजर रही है , जिसमें करीब 45 बड़े शहर शामिल हो रहे हैं। यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर संवाद कार्यक्रम आयोजित कर समाज से पंच परिवर्तन,नशा मुक्ति,राष्ट्र निर्माण ,सनातन राष्ट्र सशक्त सनातनी समाज निर्माण पर विभिन्न कार्यक्रमों में संवाद किया जा सकता है।
यह साइकिल यात्रा मुरैना ग्वालियर डबरा और दतिया में अनेक स्थानों पर बड़े कार्यक्रमों और आयोजनों में शामिल होकर संवाद बनाते हुए मध्य प्रदेश में प्रवेश कर चुकी है और झांसी माल्थोन सागर गौरझामर देवरी महाराजपुर में आगामी कार्यक्रम की योजना रूपरेखा के साथ गृह राज्य में आगे बढ़ने वाली है। यात्रा के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग को महानगरों और विराम स्थलों पर यात्रा के संदेश के साथ यात्रियों का भी स्वागत अभिनंदन भी लगातार किया जा रहा है। आम जनों के उत्साह को देखते हुए साइकिल यात्रियों की थकान स्वस्फूर्त तरीके से खत्म हो जाती है और वह नित्य नए ऊर्जा और उत्साह से आगे बढ़ाने के लिए कृत संकल्पित हो जाते हैं।
डॉ. दुबे ने बताया कि यह यात्रा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा प्रतिपादित “पंच परिवर्तन” विचार को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से की जा रही है। संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर पंच परिवर्तन के माध्यम से प्रत्येक परिवार तक पहुंचने का संकल्प लिया गया है। पंच परिवर्तन के अंतर्गत स्व का बोध (आत्मबोध),सामाजिक समरसता,नागरिक कर्तव्य,कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर जन जागरूकता और जनसंवाद का प्रयास किया जा रहा है।जागरुक और प्रखर समाजसेवी देवेंद्र दुबे ने कहा कि पंच परिवर्तन का मुख्य उद्देश्य समाज के हर स्तर पर सकारात्मक परिवर्तन लाकर राष्ट्र को और अधिक सशक्त व समृद्ध बनाना है। केवल उपदेश और नारों से नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति से संवाद कर स्थायी समाधान निकालना ही इस यात्रा का मूल भाव है। आत्मनिर्भर भारत का अर्थ आर्थिक के साथ-साथ सांस्कृतिक रूप से भी आत्मनिर्भर राष्ट्र का निर्माण है।
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अदिति न्यूज,(सतीश लमानिया)
कश्मीर से कन्याकुमारी