भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही अमृत स्टेशन योजना : "करेली रेलवे स्टेशन पर घटिया निर्माण और श्रमिक कानून का उल्लंघन"
Aditi News Team
Sun, Feb 22, 2026
रिपोर्टर भागीरथ तिवारी
भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही अमृत स्टेशन योजना
"करेली रेलवे स्टेशन पर घटिया निर्माण और श्रमिक कानून का उल्लंघन"
करेली। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'अमृत भारत स्टेशन योजना' के तहत करेली रेलवे स्टेशन के आधुनिकीकरण का कार्य इन दिनों विवादों के घेरे में है। करोड़ों की लागत से हो रहे इस कायाकल्प में गुणवत्ता को ताक पर रखकर धड़ल्ले से भ्रष्टाचार का खेल खेला जा रहा है। स्थानीय स्तर पर विभाग और उपयंत्री को बार-बार शिकायत करने के बावजूद जिम्मेदार मौन साधे हुए हैं, जिससे ठेकेदार के हौसले बुलंद हैं।
इस निर्माण के तहत प्लेटफॉर्म नंबर दो पर चल रहे निर्माण कार्य में तकनीकी मानकों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। प्रत्यक्षदर्शियों और मौके की स्थिति के अनुसार, कंक्रीट मिश्रण में गिट्टी के साथ बारीक धूलयुक्त बारीक गिट्टी का उपयोग किया जा रहा है।
इतना ही नहीं, कंक्रीट की मजबूती के लिए सबसे अनिवार्य प्रक्रिया 'तराई' की भारी कमी देखी गई है। बिना पर्याप्त पानी के सीमेंट अपना सामर्थ्य नहीं खोखला आधार खड़ा कर रही है, जो भविष्य में किसी हादसे को आमंत्रण दे सकता है।
"अधिकारी की आमद पर 'लीपापोती' की कोशिश"
हैरानी की बात यह है कि जो निर्माण कार्य हफ़्तों से कछुआ गति से चल रहा था, वह आज वरिष्ठ अधिकारी के निरीक्षण की सूचना मिलते ही अचानक 'सुपरफास्ट' मोड में आ गया। इस हड़बड़ाहट में गुणवत्ता में भी कार्य की गुणवत्ता नहीं सुधरी,
प्लेटफॉर्म नंबर दो पर पिछले दिनों किए गए घटिया कंक्रीट कार्य के दोषों को छिपाने के लिए आनन-फानन में सीमेंट के 'थेगड़े' लगाए गए, ताकि निरीक्षण के दौरान सब कुछ दुरुस्त नजर आए।
"श्रमिक कानून की उड़ी धज्जियां: निर्माण कार्य में लगा बाल श्रमिक"
भ्रष्टाचार के साथ-साथ यहाँ श्रमिक कानून की धज्जियां देखने मिलीं । जहाँ एक ओर भारी भरकम बजट खर्च किया जा रहा है, वहीं प्लेटफॉर्म पर तराई जैसे महत्वपूर्ण कार्य के लिए एक बाल श्रमिक को लगाया गया था। सार्वजनिक स्थल पर इस तरह बाल श्रम कानून का उल्लंघन रेलवे प्रशासन और ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
"सरकार की मंशा को लग रहा पलीता"
प्रधानमंत्री की अमृत स्टेशन योजना का उद्देश्य यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं देना है, लेकिन करेली में जिम्मेदारों की लापरवाही और भ्रष्टाचार की मंशा इस योजना की साख को बट्टा लगा रही है। लचर निर्माण और गुणवत्ताहीन सामग्री का प्रयोग सीधे तौर पर सरकारी धन का दुरुपयोग है।
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