शाम होते ही गायब हो जाती हैं सरकारी 108 एम्बुलेंस! : गाडरवारा में गरीब मरीजों की मजबूरी बना निजी एम्बुलेंस नेटवर्क, जिला स्तर की व्यवस्थाओं पर उठे गंभीर सवाल,
Aditi News Team
Thu, May 28, 2026
शाम होते ही गायब हो जाती हैं सरकारी 108 एम्बुलेंस!
गाडरवारा में गरीब मरीजों की मजबूरी बना निजी एम्बुलेंस नेटवर्क,
जिला स्तर की व्यवस्थाओं पर उठे गंभीर सवाल
गाडरवारा। शासकीय सिविल अस्पताल गाडरवारा क्षेत्र में शासकीय 108 एम्बुलेंस सेवाओं की कमी को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं, लेकिन अब हालात इतने गंभीर बताए जा रहे हैं कि गरीब और मजदूर वर्ग के मरीजों को मजबूरी में निजी एम्बुलेंस संचालकों की मनमानी का शिकार होना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शाम होते ही सरकारी एम्बुलेंस अस्पताल परिसर में दिखाई ही नहीं देतीं, जबकि अस्पताल के सामने सड़क पर निजी एम्बुलेंसों का जमावड़ा लग जाता है। इस पूरे घटनाक्रम ने जिला स्तर की स्वास्थ्य एवं परिवहन व्यवस्थाओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
मरीजों के परिजनों का कहना है कि जब गंभीर मरीजों को गाडरवारा से नरसिंहपुर रेफर किया जाता है, तब 108 सेवा पर कई बार फोन लगाने के बावजूद “गाड़ी उपलब्ध नहीं है” कहकर जवाब दिया जाता है। ऐसे में मजबूरी में निजी एम्बुलेंसों का सहारा लेना पड़ता है। गाडरवारा से नरसिंहपुर की लगभग 60 से 65 किलोमीटर दूरी के लिए निजी एम्बुलेंस संचालकों द्वारा ₹2500 से ₹3000 तक वसूले जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। गरीब और मजदूर वर्ग के लोगों का कहना है कि यह उनके साथ खुली आर्थिक लूट है।
स्थानीय नागरिकों के बीच यह आशंका भी लगातार चर्चा में बनी हुई है कि सरकारी एम्बुलेंसों की कमी का हवाला देकर निजी एम्बुलेंस संचालकों को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुंचाया जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि अस्पताल क्षेत्र में शाम होते ही निजी एम्बुलेंस आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं, तो फिर सरकारी 108 सेवाएं अचानक कहां गायब हो जाती हैं?
विश्वसनीय सूत्रों का दावा है कि यदि परिवहन विभाग एवं यातायात विभाग द्वारा क्षेत्र में संचालित निजी एम्बुलेंसों की नियमपूर्वक सघन जांच कराई जाए, तो कई गंभीर अनियमितताएं सामने आ सकती हैं। सूत्रों के अनुसार कई निजी एम्बुलेंसों में फिटनेस, इंश्योरेंस, पीयूसी और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की कमी हो सकती है। यहां तक कि कुछ वाहनों में तकनीकी स्तर पर गंभीर गड़बड़ियों की आशंका भी जताई जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मरीजों और मजदूर वर्ग की जान जोखिम में डालकर कई निजी एम्बुलेंस सड़क पर दौड़ाई जा रही हैं। यदि किसी वाहन में तकनीकी खराबी या दस्तावेजी अनियमितता सामने आती है, तो यह सीधे तौर पर मरीजों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ माना जाएगा। गौरतलब है कि गाडरवारा का 100 बिस्तरों वाला शासकीय सिविल अस्पताल पहले से ही डॉक्टरों की कमी, दवाइयों की अनुपलब्धता और अन्य व्यवस्थागत समस्याओं को लेकर चर्चाओं में बना हुआ है। ऐसे में अब एम्बुलेंस सेवाओं को लेकर उठ रहे सवालों ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की स्थिति पर और चिंता बढ़ा दी है। “स्वास्थ्य सेवाएं गरीबों के लिए राहत का माध्यम होनी चाहिए, लेकिन यदि मरीजों की मजबूरी को कमाई का जरिया बना दिया जाए, तो यह व्यवस्था पर सबसे बड़ा सवाल है।”
"" इस पूरे मामले पर शासकीय सिविल अस्पताल गाडरवारा के प्रभारी अधिकारी डॉ. उपेंद्र वस्तकार ने कहा कि “आपके द्वारा मामला अवगत कराया गया है। यदि शासकीय अस्पताल परिसर या अस्पताल के सामने इस प्रकार की गतिविधियां संचालित हो रही हैं, तो तत्काल प्रभाव से जांच कराई जाएगी और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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अदिति न्यूज,(सतीश लमानिया)
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनीष मिश्रा
शासकीय सिविल अस्पताल गाडरवारा प्रभारी अधिकारी डॉ. उपेंद्र वस्तकार