सरकारी कर्मचारी ही फसल अवशेषों में लगा रहे आग व किसानों पर जता रहे रोब : कलेक्टर के पराली जलाने वाले आदेश की अवहेलना कर रहे गाडरवारा बीज निगम के जिम्मेदार
Aditi News Team
Fri, Oct 31, 2025
कलेक्टर के पराली जलाने वाले आदेश की अवहेलना कर रहे गाडरवारा बीज निगम के जिम्मेदार
सरकारी कर्मचारी ही फसल अवशेषों में लगा रहे आग और किसानों को बता रहे साहब गिरी
गाडरवारा। पूर्व दिनो जिला दंडाधिकारी रजनी सिंह ने नरवाई और फसलों के अवशेषों में आग लगाने पर प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया था, जिसमें वायु मंडल, पर्यावरण एवं भूमि की क्षति को दृष्टिगत रखते हुए सार्वजनिक हित में नरसिंहपुर जिले की सम्पूर्ण राजस्व सीमा क्षेत्र के लिए नरवाई जलाने की प्रथा पर तत्काल अंकुश लगाने हेतु भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत जन सामान्य को बाधा, क्षति, मानव जीवन स्वास्थ्य, क्षेम के खतरे के प्रभाव को दृष्टिगत रखते हुए जिले की सीमाओं में खेत में खड़ी फसलों के डंठलों (नरवाई) एवं फसल अवशेषों में आग लगाए जाने पर प्रतिबंध लगाने के आदेश जारी किए हैं। इस आदेश 16 अक्टूबर 2025 से 2 माह की अवधि के लिए प्रभावशील रहेगा। उक्त आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति के विरूद्ध भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 के अंतर्गत कार्यवाही की बात कही थी।
परंतु अब कलेक्टर नरसिंहपुर के आदेश से निर्भीक शासकीय बीज निगम गाडरवारा के जिम्मेदार अधिकारी ही निगम की जमीन में लगी फसल को काट कर आग लगा रहे हैं नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। जिन पर किसी भी प्रशासनिक अधिकारी का ध्यान केंद्रित नहीं हो रहा है। और किसानो के खेतों में आग लगने पर पूरी तरह साहब गिरी बता कर चालानी और वैधानिक कार्यवाही करने की धोस दिखाई जाती है।
किसानों का कहना है कि प्रशासन और कृषि विभाग एक बार स्वयं एक एकड़ भूमि पर अवशेष प्रबंधन करके बताएं कि हटाने के लिए कितना खर्च आता है। मौसम की मार में वैसे ही हमारी फैसले पूरी तरह नष्ट हो रही हैं और अवशेषों के प्रबंधन पर लगने वाले खर्च का प्रबंध कहा से करें। सारे नियम और कानून अन्यदाता के लिए ही बनाए जाते हैं एक तरफ कुदरती आफत बनकर बरस रहा बे मौसम बारिश फसलों को नष्ट कर रही है वहीं दूसरी तरफ सरकार किसानों को आए दिन फांसी लगाने के लिए मजबूर कर रही है। इतना ही नहीं जब सरकारी अधिकारी अपनी मनमानी कर रहे हैं जिससे यह लगता है कि संविधान को दो भागों में बांट दिया हो एक गरीब अन्नदाता और दूसरा अमीर और रसूखदार व्यापारियों का।* किसानों का गभीर आरोप हैं कि प्रशासन को उद्योगपतियों के बड़े-बड़े उद्योग, कारखाने रोड पर चल रहे वाहनों या अन्य संसाधनों से प्रदूषण नहीं दिखता है जो साल भर हो रहा है अन्नदाता के द्वारा एक दिन अपनी फसल के डंठलों (नरवाई) एवं अवशेषों में आग लगाने में ही प्रदूषण दिखता हैं।
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अदिति न्यूज,(सतीश लमानिया)
नरसिंहपुर कलेक्टर के आदेशों की हो रही अवहेलना
गाडरवारा बीज निगम के कर्मचारी