कोटक महिंद्रा और एसबीआई बैंक खातों में लगाई सेंध, पढ़िए पूरा मामला : सांईखेड़ा में कमलेश अबधिया के खाते से ₹1.50 लाख पार,साइबर ठगों ने लगाया चूना
Aditi News Team
Tue, Jan 13, 2026
सांईखेड़ा में कमलेश अबधिया के खाते से ₹1.50 लाख पार,साइबर ठगों ने लगाया चूना
कोटक महिंद्रा और एसबीआई बैंक खातों में लगाई सेंध,अमेजॉन वॉलेट में ट्रांसफर किए पैसे
सांईखेड़ा। आज के आधुनिक और सोशल मीडिया के दौर में साइबर अपराधी आम लोगों की मेहनत की कमाई पर गिद्ध की तरह नजर गड़ाए हुए हैं। तकनीकी जानकारी और सावधानी की कमी का फायदा उठाकर ये अपराधी पल भर में बैंक खाते खाली कर रहे हैं। ताजा मामला साईंखेड़ा का है, जहाँ कमलेश कुमार अवधिया साइबर ठगी का शिकार हो गए। अपराधियों ने फर्जी तरीके से 'ई-सिम' (E-SIM) एक्टिवेट कर उनके दो अलग-अलग बैंक खातों से कुल 1 लाख 50 हजार रुपये पार कर दिए।
ऐसे हुई ठगी की शुरुआत
पीड़ित कमलेश अवधिया ने बताया कि घटना की शुरुआत 6 जनवरी की रात करीब 9:00 बजे हुई। उनके मोबाइल पर एक एसएमएस (SMS) आया, जिसमें ई-सिम बनाने की रिक्वेस्ट भेजी जाने की सूचना थी। चूँकि उन्होंने ऐसी कोई रिक्वेस्ट नहीं भेजी थी, उन्होंने इसे सामान्य समझा। लेकिन अगली सुबह उनके मोबाइल का नेटवर्क पूरी तरह गायब हो गया। जब उन्होंने संबंधित कंपनी के ऑपरेटर से संपर्क किया, तो पता चला कि उनकी फिजिकल सिम बंद कर दी गई है और उनके नंबर पर एक ई-सिम एक्टिवेट हो चुकी है।
वॉलेट और अन्य खातों में उड़ाए पैसे
8 जनवरी को जब कमलेश ने एटीएम जाकर अपने बैंक खातों का स्टेटमेंट निकाला, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। शातिर अपराधियों ने 7 जनवरी की सुबह 9:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे के बीच उनके महिंद्रा कोटक बैंक के खाते से ₹1,45,000 फर्जी तरीके से 'अमेजॉन वॉलेट' में ट्रांसफर कर लिए थे। इसके अलावा, उनके स्टेट बैंक (SBI) के खाते से ₹5,000 किसी मुकेश दास नामक व्यक्ति के खाते में भेजे गए। ठगों ने खाते की जांच करने के लिए सबसे पहले रंजीत सिंह के नाम पर ₹1 का डेबिट ट्रांजैक्शन भी किया था।
आमजन के लिए कमलेश की अपील
ठगी का शिकार होने के बाद कमलेश अवधिया ने क्षेत्र के नागरिकों से सचेत रहने की अपील की है। उन्होंने कहा, "अपनी मेहनत की कमाई को बचाने के लिए कभी भी किसी अनजान व्यक्ति को अपना फोन न दें। मोबाइल पर आने वाले किसी भी संदिग्ध लिंक जैसे- जनधन योजना, आईटीओ या अन्य प्रलोभन वाली लिंक्स को न खोलें। किसी को भी अपना ओटीपी (OTP) शेयर न करें, क्योंकि अपराधी आपके मोबाइल से मैसेज डिलीट कर आपको भनक भी नहीं लगने देते।"
पुलिस और साइबर सेल में शिकायत दर्ज
इस पूरे मामले की ऑनलाइन रिपोर्ट साइबर सेल में दर्ज करा दी गई है। पत्रकार ने शासन-प्रशासन और साइबर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से निवेदन किया है कि इन अपराधियों को जल्द से जल्द ट्रेस कर सख्त सजा दी जाए, ताकि क्षेत्र का कोई अन्य व्यक्ति इनके जाल में न फंस सके। फिलहाल साइबर सेल ट्रांजैक्शन हिस्ट्री और ई-सिम रिक्वेस्ट के आईपी एड्रेस के आधार पर जांच कर रही है।
बॉक्स: क्या है ई-सिम स्वैपिंग (E-SIM Swapping)?
साइबर एक्सपर्ट्स के अनुसार, इसमें अपराधी सबसे पहले आपकी व्यक्तिगत जानकारी जुटाते हैं। इसके बाद वे मोबाइल ऑपरेटर को आपकी ओर से ई-सिम की रिक्वेस्ट भेजते हैं। एक बार ई-सिम अपराधी के फोन में एक्टिवेट हो जाए, तो पीड़ित की असली सिम बंद हो जाती है। इसके बाद बैंक के सभी ओटीपी अपराधी के पास जाने लगते हैं और वे आसानी से खाते से पैसे निकाल लेते हैं ।
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नरसिंहपुर पुलिस अधीक्षक ऋषिकेश मीना
सांईखेड़ा थाना प्रभारी