जो करता है, वह कहता नहीं : नदी कभी यह नहीं कहती,कि वह प्यास बुझाएगी,पर चुपचाप,पहाड़ों से उतरकर,गाँव-गाँव बहती है और थके हुए जीवन को शीतलता दे जाती
Aditi News Team
Sun, Mar 15, 2026
जो करता है, वह कहता नहीं
(निर्मला पाराशर)
नदी
कभी यह नहीं कहती
कि वह प्यास बुझाएगी,
पर चुपचाप
पहाड़ों से उतरकर
गाँव-गाँव बहती है
और थके हुए जीवन को
शीतलता दे जाती है।
दीपक
कभी यह घोषणा नहीं करता
कि वह अंधकार हर लेगा,
पर धीरे-धीरे
अपनी लौ जलाकर
रात की निस्तब्धता में
उजाले की राह बना देता है।
फूल
कभी यह दावा नहीं करते
कि वे संसार को महकाएँगे,
पर भोर की पहली किरण के साथ
चुपचाप खिलते हैं
और हवा के संग
अपनी सुगंध बिखेर देते हैं।
पर्वत
कभी नहीं कहते
कि वे सबको सहारा देंगे,
पर सदियों से
अडिग खड़े होकर
आँधियों और तूफानों के बीच
धरती का संतुलन थामे रहते हैं।
इस संसार में
अक्सर वही महान होता है
जो शोर नहीं करता,
जो बस
अपने कर्मों से
जीवन की राह रोशन करता है।
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अदिति न्यूज,(सतीश लमानिया)
निर्मला पराशर