कलेक्टर के सामने CHO मरीज का ब्लड प्रेशर नहीं नाप पाई : टीकमगढ़ कलेक्टर विवेक श्रोतिय ने महिला CHO रितु अहिरवार को समझाया मरीज का BP नापने का सही तरीका
Aditi News Team
Mon, Aug 31, 2026
टीकमगढ़ कलेक्टर विवेक श्रोतिय के औचक निरीक्षण के दौरान एक सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) महिला मरीज का ब्लड प्रेशर सही तरीके से नहीं नाप सकीं।
कलेक्टर ने महिला CHO रितु अहिरवार को समझाया मरीज का BP नापने का तरीका
टीकमगढ़। जिले के एक सामुदायिक स्वास्थ केंद्र में स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। निरीक्षण के दौरान एक महिला CHO कलेक्टर के सामने मरीज का ब्लड प्रेशर (BP) तक नहीं नाप पाईं। स्थिति ऐसी बनी कि कलेक्टर विवेक श्रोतिय ने नोटिस देते हुए आगे आकर CHO रितु अहिरवार को मरीज का BP नापने की प्रक्रिया समझानी पड़ी।
घटना का वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में हेल्थ सेंटरों पर तैनात स्वास्थ्यकर्मियों से मरीजों की प्राथमिक जांच और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की अपेक्षा की जाती है। ऐसे में यदि एक बेसिक जांच की प्रक्रिया को लेकर ही स्वास्थ्यकर्मी असहज नजर आएं, तो ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
सिर्फ एक सेंटर का मामला या बड़ी समस्या?
इस घटना ने सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा किया है कि यदि एक हेल्थ सेंटर में ऐसी स्थिति सामने आ सकती है, तो जिले और प्रदेश के अन्य ग्रामीण हेल्थ सेंटरों में स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति क्या है? क्या वहां तैनात स्वास्थ्यकर्मियों को पर्याप्त प्रशिक्षण मिला है? क्या समय-समय पर उनके कौशल की जांच और रिफ्रेशर ट्रेनिंग कराई जाती है?
भर्ती और प्रशिक्षण व्यवस्था पर भी उठे सवाल
मामले के बाद स्वास्थ्य विभाग की भर्ती एवं प्रशिक्षण व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य केंद्रों पर काम करने वाले कर्मचारियों की जिम्मेदारी बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि कई बार प्राथमिक स्तर पर मरीज की जांच और शुरुआती उपचार ही आगे की चिकित्सा प्रक्रिया की दिशा तय करता है।
ऐसे में यह जरूरी है कि स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात कर्मचारियों की कार्यक्षमता और प्रशिक्षण की नियमित समीक्षा हो। केवल नियुक्ति कर देना पर्याप्त नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों को सही तरीके से निभाने में सक्षम हैं।
जिम्मेदार अधिकारियों से जवाबदेही की मांग
यह मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग से यह सवाल भी किया जाना चाहिए कि संबंधित स्वास्थ्यकर्मी को किस प्रकार का प्रशिक्षण दिया गया था और क्या उनकी कार्यक्षमता का कभी मूल्यांकन किया गया? साथ ही जिले के अन्य हेल्थ सेंटरों में भी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और कर्मचारियों की दक्षता की समीक्षा की जानी चाहिए।
ग्रामीण इलाकों के मरीजों की स्वास्थ्य सेवाएं सीधे इन हेल्थ सेंटरों पर निर्भर करती हैं। इसलिए ऐसी घटनाओं को केवल एक कर्मचारी की कमी मानकर नजरअंदाज करने के बजाय पूरे सिस्टम की समीक्षा के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए।
अब देखना यह है कि इस मामले के बाद स्वास्थ्य विभाग क्या कार्रवाई करता है और क्या जिले के अन्य सामुदायिक स्वास्थ केंद्र की भी वास्तविक स्थिति की जांच कराई जाती है।
Tags :
अदिति न्यूज,(सतीश लमानिया)
स्वास्थ मंत्री शिवाजी पटेल
टीकमगढ़ कलेक्टर
टीकमगढ़ मुख्य चिकित्सा स्वास्थ अधिकारी
स्वास्थ विभाग मप्र शासन भोपाल