सांईखेड़ा तहसील में भी उठी गौ माता को राष्ट्र माता बनाने की मांग : गौ सम्मान आव्हान अभियान के तहत गौ माता को राष्ट्र माता का सम्मान दिलाने को लेकर सौंपा प्रार्थना पत्र
Aditi News Team
Mon, Apr 27, 2026
सांईखेड़ा तहसील में भी उठी गौ माता को राष्ट्र माता बनाने की मांग

सांईखेड़ा में गौ भक्तों ने गौ माता को राष्ट्र माता का सम्मान दिलाने को लेकर प्रार्थना पत्र सौंपा
यह प्रार्थना पत्र महामहिम राष्ट्रपति मान.प्रधानमंत्री, मान .राज्यपाल, एवं मुख्यमंत्री के नाम सौंपा गया
सभी गौ भक्तों ने गो माता को माता की पूजा कर तहसीलदार के प्रतिनिधि को प्रार्थना पत्र सौंपा
सम्पूर्ण भारत में अखिल वेदलक्षणा गोमाता (सम्पूर्ण देशी गोवंश) की विधिवत सेवा, पूर्ण सुरक्षा एवं राष्ट्रीय सम्मान प्रदान करने हेतु केंद्रीय कानून बनाने और गौ पालन मंत्रालय स्थापना के लिए सम्पूर्ण भारतवासियो की ओर से आज पूरे देश में प्रार्थना पत्र सौंपे गए।
आपके 'पंचप्राण' के संकल्प में 'अपनी विरासत पर गर्व' एक मुख्य स्तंभ है। भारतीय देशी गोवंश हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। जब तक गोमाता असुरक्षित है, तब तक हमारी सांस्कृतिक पूर्णता अधूरी है। जिस प्रकार आपने काशी विश्वनाथ धाम और महाकाल लोक के माध्यम से भारत की आध्यात्मिक आभा को पुनर्जीवित किया है, उसी प्रकार गोमाता को 'राष्ट्रीय सम्मान' देकर आप ही भारत के 'सांस्कृतिक पुनरुत्थान' के इस महायज्ञ की पूर्णाहुति कर सकते हैं।
आपसे देश के समस्त सनातनी गो भक्तों, कार्यकर्ताओं, जागरूक नागरिकों एवं संत समाज की ओर से विनम्र निवेदन है कि वर्तमान में भारतीय गोवंश की स्थिति अत्यंत पीड़ादायक है। तस्करी, वध (हत्या) एवं सड़कों पर उनकी दुर्दशा देखकर प्रत्येक सनातनी भारतीय का हृदय विदीर्ण है। इसलिए आज सम्पूर्ण राष्ट्र को आपसे गोवंश के सम्मान, सुरक्षा और सेवा की प्रतीक्षा है।
महोदय, गोवंश केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की धुरी भी है। 'आत्मनिर्भर भारत' का सपना तभी साकार होगा जब हमारा किसान रासायनिक खाद के विषैले चक्र से मुक्त होकर गो आधारित प्राकृतिक कृषि को अपनाएगा।
हर भारतीय के द्वारा श्रीमान गोवंश की वर्तमान पीड़ादायक स्थिति को देखते हुए समाधान हेतु निम्नलिखित आग्रह प्रेषित किए गए।

1. एकीकृत केंद्रीय कानून एवं स्वतंत्र मंत्रालयः संविधान के अनुच्छेद 48 के तहत गो-संरक्षण राज्य का विषय है, कुछ राज्यों ने गोवध पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाया भी है किंतु कई राज्यों की असमर्थता अथवा अरुचि को देखते हुए केंद्र सरकार संविधान में आवश्यक संशोधन करते हुए 'केन्द्रीय गो सेवा एवं संरक्षण अधिनियम' लागू करें। समस्त गो वधशालाओं (कसाईखाने) के लाइसेंस निरस्त हो और वधशालाओं (कसाईखाने) पर शीघ्र अति कठोर कार्रवाई हो इसके क्रियान्वयन हेतु स्वतंत्र 'केंद्रीय गो सेवा मंत्रालय' और स्पेशल टास्क फोर्स का गठन हों।
2. संवैधानिक सर्वोच्चताः देशी गोवंश को "राष्ट्रमाता" या "राष्ट्र आराध्या" के रूप में आधिकारिक संवैधानिक मान्यता प्रदान कर उसे विशेष राष्ट्रीय संरक्षण दिया जाए।
3. कठोर दंडात्मक प्रावधानः गो तस्करी और गो वध को 'संज्ञेय एवं गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में रखकर आजीवन कारावास तथा अपराध में संलिप्त दोषियों की संपत्ति कुर्क (राजसात्) करने का कठोर विधिक प्रावधान हो।
4. आर्थिक आत्मनिर्भरता (गव्य आधारित अर्थव्यवस्था): पंचगव्य (गोबर-गोमूत्र) अनुसंधान को बढ़ावा देकर इन्हें प्राकृतिक कृषि हेतु जैविक खाद, कीटनाशक और औषधि के रूप में सरकारी खरीद तंत्र से जोड़ा जाएं। स्कूलों में मिड-डे मील व मंदिरों के 'प्रसाद' में केवल देशी गो-घृत व दुग्ध का उपयोग अनिवार्य हों।
5. बुनियादी ढांचा विकासः प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर 'नंदीशाला' और जिला स्तर पर न्यूनतम एक 'आदर्श गो अभ्यारण्य' अथवा 'वृहद् गोशाला' की स्थापना अनिवार्य हों, जहाँ निराश्रित गोवंश को ससम्मान आश्रय मिलें।
6. राजमार्ग सुरक्षा एवं चिकित्साः राष्ट्रीय व राज्य राजमार्गों पर प्रति 50 से 100 किमी पर सुसज्जित 'गो-वाहिनी एम्बुलेंस और 150 से 200 किमी के अंतराल पर आधुनिक ट्रॉमा सेंटरों की व्यवस्था हो जाएं ताकि दुर्घटनाग्रस्त गोवंश को तत्काल उपचार मिल सकें।
7. शिक्षा एवं सामाजिक सुधारः स्कूली पाठ्यक्रमों में 'गो-विज्ञान' को अनिवार्य विषय के रूप में शामिल किया जाएं ताकि भावी पीढ़ी गोवंश के आध्यात्मिक, वैज्ञानिक, औषधीय और आर्थिक महत्व को समझ सके।
8. एकीकृत चारा एवं गोचर संरक्षण नीतिः एक सुदृढ़ 'चारा सुरक्षा कानून' बनाकर चारे के औद्योगिक उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगे, चारे के अवैध भण्डारण एवं अनियंत्रित मूल्य वृद्धि को रोका जाये साथ ही समस्त गोचर, ओरण और वन भूमियों को अतिक्रमण मुक्त कर 'गोचर विकास बोर्ड' के अधीन आरक्षित किया जाए, जिससे गोवंश के वर्षभर गोचारण की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
'गो सम्मान आह्वान अभियान' के आवेदन पत्र पर हस्ताक्षर करने वाला प्रत्येक नागरिक आज एक ही स्वर में अपने प्रिय प्रधानमंत्री से विनम्रता पूर्वक कह रहा है- "अब गोमाता को न्याय मिलना ही चाहिए।"
गोवंश संरक्षण केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि कृषि, पर्यावरण, अर्थव्यवस्था एवं सतत विकास से जुड़ा एक राष्ट्रीय विषय है। अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि उपरोक्त बिंदुओं पर गंभीरतापूर्वक विचार कर आवश्यक नीतिगत एवं विधिक निर्णय शीघ्र लेने की कृपा करें।
हमें पूर्ण विश्वास है कि आपके सक्षम नेतृत्व में इस दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।
प्रार्थना पत्र सौंपते समय,गौ संत, गणमान्य नागरिक, समाजसेवी एवं मातृशक्ति तथा युवा एवं गौ भक्त बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
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अदिति न्यूज,(सतीश लमानिया)
गौ सम्मान आव्हान अभियान सांईखेड़ा