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साईखेड़ा में महिला एवं बाल विकास विभाग की लापरवाही का गंभीर मामला : साईखेड़ा में महिला बाल विकास एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की गंभीर लापरवाही उजागर

Aditi News Team

Tue, Sep 30, 2025

साईखेड़ा में महिला बाल विकास एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की गंभीर लापरवाही उजागर

साईखेड़ा (नरसिंहपुर)।विकासखंड साईखेड़ा में महिला एवं बाल विकास विभाग की लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। सरकार की ओर से कुपोषण उन्मूलन और बच्चों के पोषण स्तर सुधारने के लिए अनेक योजनाएँ चलाई जा रही हैं, जिनका सीधा लाभ पाँच वर्ष तक के बच्चों को मिलना चाहिए। इनमें एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS), सुपोषण अभियान (POSHAN Abhiyaan), पूरक पोषण आहार योजना (SNP), प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) और पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) जैसी योजनाएँ शामिल हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य है कि कोई भी बच्चा भूखा या कुपोषित न रहे। आंगनबाड़ी एवं स्वास्थ्य विभाग मिलकर बच्चों का नियमित वजन, स्वास्थ्य परीक्षण और ज़रूरत पड़ने पर उपचार सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार हैं। लेकिन साईखेड़ा ब्लॉक की ग्राम पंचायत तुमड़ा में स्थिति बेहद चिंताजनक पाई गई। यहाँ लगभग ढाई वर्ष (2 वर्ष 6 माह) के एक बच्चे का वजन मात्र 6.5 किलो पाया गया। बच्चे को उसके परिवारजन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, साईखेड़ा लेकर पहुँचे, जहाँ उन्हें पता चला कि बच्चे को पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में भर्ती कराना आवश्यक है ।परिजनों का कहना है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कभी-कभी ही केंद्र पर नज़र आती हैं और उन्होंने बच्चों का वजन कम होने या उपचार के बारे में कभी जानकारी नहीं दी। यही नहीं, ग्राम पंचायत के एक अन्य व्यक्ति ने भी अपनी पहचान गुप्त रखते हुए बताया कि उनके बच्चे का वजन सामान्य से कम है, परंतु आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं ने कभी NRC या पूरक पोषण आहार की जानकारी नहीं दी ।परिणामस्वरूप, जब बच्चा गंभीर रूप से कुपोषित हो गया तब उसे शासकीय सिविल अस्पताल, नरसिंहपुर में भर्ती करना पड़ा।

जवाबदेही पर सवाल

गौरतलब है कि सरकार द्वारा हर माह बच्चों का वजन और स्वास्थ्य जांच अनिवार्य रूप से करने के निर्देश जारी हैं। इसके बावजूद यह मामला ब्लॉक स्तर के महिला बाल विकास अधिकारी और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की जानकारी में तक नहीं आ सका। यह स्थिति विभागीय अधिकारियों और कार्यकर्ताओं की उदासीनता और गंभीर लापरवाही को उजागर करती है। ग्रामीणों ने माँग की है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जाँच कर दोषी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही से मासूम बच्चों की ज़िंदगी खतरे में न पड़े।

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साईखेड़ा में महिला एवं बाल विकास विभाग की लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया

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