: नरसिंहपुर,शीतलहर व अधिक ठंड के कारण फसलों में पाला से बचाव के लिए समसामयिक सलाह
शीतलहर व अधिक ठंड के कारण फसलों में पाला से बचाव के लिए समसामयिक सलाह
नरसिंहपुर।शीतलहर व अधिक ठंडी के कारण फसलों में पाला पड़ने की संभावना को देखते हुए उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग नरसिंहपुर ने जिले के किसानों को समसामयिक सलाह दी है। फसलों में पाला लगने की संभावना दिसंबर तथा जनवरी के महीने में रहती है। पाला के प्रभाव से प्रमुख रूप से टमाटर, बैंगन, आलू, फूलगोभी, मिर्च, धनिया, पालक, अरहर, मसूर, चना तथा कुछ मात्रा में गेहूं आदि के प्रभावित होने की ज्यादा संभावना रहती है।
पाला से फसलों के बचाव के लिए किसानों को सलाह दी जाती है कि वे रात्रि 10 बजे से पहले दिन में सिंचाई अवश्य करें। फसलों में सिंचाई रात्रि के दूसरे तथा तीसरे पहर में नहीं करें। पाला की आशंका होने पर फसलों तथा उद्यान की फसलों में घुलनशील गंधक 80 प्रतिशत डब्ल्यूपी का दो से ढाई ग्राम मात्रा को प्रति लीटर की दर से पानी में घोल बनाकर डेढ़ से दो सौ लीटर पानी में घोलकर फसलों के ऊपर प्रति एकड़ की दर से छिडकाव करें। इससे दो से ढाई डिग्री सेंटीग्रेड तक तापमान बढने से काफी हद तक पाला से बचाया जा सकता है।
फसलों में पाले की आशंका होने पर थायो यूरिया का 0.5 ग्राम मात्रा को प्रति लीटर पानी में घोल की दर से छिडक़ाव करने से भी पाला से काफी हद तक फसलों को बचाया जा सकता है। प्रत्येक अवस्था में पानी की मात्रा प्रति एकड़ डेढ़ से दो सौ लीटर अवश्य रखें। पाला से सबसे अधिक नुकसान नर्सरी में होता है। इसलिए रात्रि के समय नर्सरी में लगे पौधों को प्लास्टिक की चादर से ढक करके बचाया जा सकता है। ऐसा करने से प्लास्टिक के अंदर का तापमान 2 से 3 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाता है। जिसके कारण तापमान जमाव बिंदु तक नहीं पहुंचता है और पौधे पाला से बच जाते हैं। यह तकनीकी कम क्षेत्र के लिए उपयोगी है। जिन किसानों ने एक से 2 वर्ष के फलदार पौधों का अपने खेतों में वृक्षारोपण किया हो उन्हें बचाने के लिए पुआल, घास-फूस आदि से अथवा प्लास्टिक की सहायता से ढककर बचायें। प्लास्टिक की सहायता से क्लोच अथवा टाटिया बनाकर पौधों को ढक देने से भी पाला से रक्षा होती है। इसके अलावा थालों के चारों ओर मल्चिंग करके सिंचाई करते रहें।
दिसंबर से फरवरी माह तक अधिक ठंड पड़ने के कारण पशु तथा बछड़ों आदि को भी रात्रि के समय घरों के अंदर बांधे तथा उन्हें बोरे तथा जूट के बोरे तथा टाट-पट्टी से ओढ़ाकर ठंड से बचायें। इसी प्रकार मुर्गी, बकरी के घर को भी चारों तरफ से पॉलीथिन की सीट या टाट-पट्टी आदि से बांधकर ठंडी हवाओं से चारों तरफ से बचायें। छोटे किसान जहां पर खेतों का क्षेत्रफल कम हो वहां मध्यरात्रि के बाद मेड़ों के ऊपर उत्तर तथा पश्चिम की तरफ घास- फूस आदि में थोड़ा नमी बनाकर जलाकर धुंआ करें।
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