: भगवान नृसिंह जयंती पर दोहे, सुशील शर्मा
भगवान नृसिंह जयंती पर दोहे
सुशील शर्मा
गोधूलि की बेल थी, प्रकट भए प्रभु पाल।
ना दिन था ना रात थी , टूटे सारे जाल।
प्रकट भए प्रभु खम्भ से, अद्भुत रूप अनूप।
सुर नर मुनि सब डर गए, देखा नरहरि रूप।।
नरसिंहम का रूप धर, रखा भक्त सम्मान।
हिरण्य बंधु को मार कर,हरा दुष्ट अभिमान।
देख भक्ति प्रह्लाद की, दौड़े आए नाथ।
शरणागत वत्सल प्रभु, चरणों में मम माथ।।
केहरि मुख नर तनु धरे, दंत बने हथियार।
असुरों का मर्दन किया, भक्तों के रखवार।।
भक्तों के संकट हरन, पल में आए आप।
नरसिंहम प्रभु रूप है,दर्शन कटते पाप।।
नृसिंहम का अवतरण,, भक्ति भाव विस्तार।
सकल हृदय मंगल जगे, मन के मिटें विकार।।
असुरों का अभिमान हर, हरे सभी के पाप।
श्री नरहरि की कृपा से, मिटे जगत का ताप।।
गरज उठे नरसिंह प्रभु, गूँज दिशाएं घोर।
नाश पापियों का हुआ, मिटा पाप का शोर।।
नरसिंहम प्रभु जो जपे, संकट मिटे तुरंत।
भय बाधा सब दूर हो, अंत मिलें भगवंत।
✒️सुशील शर्मा✒️
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